मधुप
  
कोलकाता, 03 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजे आ चुके हैं। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आसीन होने जा रही है। राज्य में 1952 से 2016 के दरम्यान हुए 16 विधानसभा चुनावों का संक्षिप्त लेखा-जोखा प्रस्तुत है:-

प्रथम चुनाव-1952 
विधान चंद्र राय के नेतृत्व वाली कांग्रेस इस चुनाव में 150 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। विपक्षी वाम मोर्चे को 39 सीटें ही मिल सकी थी। किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 15 जबकि भारतीय जनसंघ को 9 सीटें मिली थी। अन्य के खाते में 25 सीटें गई। उस समय राज्य में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 238 हुआ करती थी।

द्वितीय चुनाव-1957 
इस चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में वापसी करने में सफल रही थी। कांग्रेस को कुल 152 सीटें मिली। सीपीआई को 46 एवं प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को 21 सीटें प्राप्त हुई। अन्य के खाते में 33 सीटें गई थी। कांग्रेस नेता बिधन चंद्र रॉय मुख्यमंत्री बने थे। इस चुनाव में विधानसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 252 हो चुकी थी। 

तृतीय चुनाव-1962 
चुनाव में कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज हुई थी। राज्य की कुल 252 में से कांग्रेस ने 157 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की थी। वाम दलों के गठबंधन यूनाइटेड सलेक्शन कमेटी को 80 सीटें हासिल हुई थी। चुनाव के बाद प्रफुल्ला चंद्र सेन मुख्यमंत्री बने।

चतुर्थ  चुनाव-1967 
इस चुनाव में पहली बार कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा। वामदलों का यूनाइटेड फ्रंट 138 सीटें जीतकर पहली बार बंगाल की सत्ता पर काबिज हुआ था। कांग्रेस को 127 सीटें मिली। चुनाव के बाद अजय मुखर्जी और बाद में प्रफुल्ल चंद्र घोष मुख्यमंत्री बने। गठबंधन की यह सरकार महज दो साल ही चल सकी थी।

पंचम चुनाव-1969 
राज्य की कुल 280 में से 214 सीटें जीतकर अजय मुखर्जी के नेतृत्व वाले यूनाइटेड फ्रंट ने सरकार का गठन किया था। हालांकि यह सरकार महज एक वर्ष और 155 दिन ही सत्ता में टिकी रह सकी थी। कांग्रेस को 55 सीटें मिली थी। इस चुनाव में 33 सीटें जीतने वाली बांग्ला कांग्रेस के नेता अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री बने।

छठा चुनाव-1971 
बीच में 215 दिनों तक राष्ट्रपति शासन जारी रहने के बाद कराए गए चुनाव में कांग्रेस ने फिर से जीत हासिल की और प्रफुल्ल चंद्र घोष मुख्यमंत्री बने। इस चुनाव में कांग्रेस को 216 सीटें मिली थी जबकि वाम मोर्चा को 52 सीटें हासिल हुई थी।

7वां चुनाव-1972
सातवें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फिर से जीत मिली। इस बार कांग्रेस ने सीपीआई के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 216 सीटें जीत कर सिद्धार्थ शंकर राय मुख्यमंत्री बने। 

आठवां चुनाव-1977 
केंद्र में इंदिरा गांधी सरकार के पतन के बाद 14 जून 1977 को यह चुनाव हुआ था। इस चुनाव में वाम मोर्चा भारी बहुमत से जीत हासिल करने में सफल रही थी। माकपा नेता ज्योति बसु के नेतृत्व में राज्य में पहली बार बार मोर्चा की सरकार बनी। इस चुनाव में वाममोर्चा को 294 में से 231 सीटें मिली थी। यह नतीजे वाममोर्चा के लिए भी चौंकाने वाले थे।

नौवां चुनाव-1982 
1982 में वाम मोर्चा और शक्तिशाली होकर उभरा। अब तक सीपीआई, पश्चिम बंगाल सोशलिस्ट पार्टी एवं डीएसपी भी वाम मोर्चा का हिस्सा बन चुकी थी। दूसरी तरफ कांग्रेस (आई) एवं कांग्रेस (एस) ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। 19 मई, 1982 को हुए चुनाव में एक बार फिर वाम मोर्चा ने बड़ी जीत हासिल की। चुनाव में कांग्रेस (आई) ने अपनी सीटों की संख्या 20 से बढ़ाकर 49 तक पहुंचाकर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था। इस चुनाव में वाम मोर्चा ने 294 में से 238 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि बुद्धदेब भट्टाचार्य, अशोक मित्र, पार्थ दे जैसे वाम मोर्चा के कई बड़े नेता चुनाव हार गए थे।

दसवां चुनाव-1987
दसवें विधानसभा चुनाव में भी वाम मोर्चा को जीत हासिल हुई। इस चुनाव में अब मोर्चा को कुल 251 सीटें मिली जबकि कांग्रेस को 40 सीटें हासिल हुई। एक बार फिर ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने।

ग्यारहवां चुनाव-1991 
वाम मोर्चा सरकार द्वारा समय से पूर्व कराये गये इस चुनाव में मोर्चा का नेतृत्व कर रही माकपा को अकेले 187 सीटें मिली थी, जबकि उसकी सहयोगी फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी एवं सीपीआई को क्रमशः 29, 18 एवं छह सीटें हासिल हुई। दूसरी तरफ कांग्रेस के खाते में 43 सीटें गई। एक बार फिर ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 

12वां चुनाव-1996 
इस चुनाव में ज्योति बसु के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा ने लगातार पांचवीं बार जीत हासिल की। वाममोर्चा को 294 में से 203 सीटों पर जीत हासिल हुई। कांग्रेस को 82 सीटें हासिल हुई।

13वां चुनाव-2001 
इस चुनाव से पहले ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अस्तित्व में आ चुकी थी। ममता बनर्जी की पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन एक बार फिर वाममोर्चा पूर्ण बहुमत से सरकार गठन करने में सफल रहा। लगातार 23 सालों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद ज्योति बसु ने यह जिम्मेदारी बुद्धदेव भट्टाचार्य को सौंप दी। 

14वां चुनाव-2006 
पहली बार बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे वाममोर्चा 235 सीटें जीतकर एक बार फिर भारी बहुमत से सत्ता हासिल करने में सफल रहा। विपक्षी तृणमूल-भाजपा गठबंधन को सिर्फ 30 सीटें ही मिल सकी जबकि कांग्रेस के खाते में 21 सीटें आई।

15वां चुनाव-2011 
इस ऐतिहासिक चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत करने में सफलता हासिल की। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस गठबंधन को 227 सीटें मिली जबकि वाम मोर्चा को महज 62 सीटों से संतोष करना पड़ा। पहली बार ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं। 

16वां चुनाव- 2016 
इस चुनाव में पहली बार तृणमूल कांग्रेस ने अकेले दम पर जीत हासिल की। हालांकि चुनाव बाद तृणमूल को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के तीन विधायकों का समर्थन हासिल हुआ था। इस चुनाव में साथ मिलकर लड़े वामो और कांग्रेस गठबंधन को 77 सीटें मिली थी। भारतीय जनता पार्टी ने तीन सीटें हासिल की थी जबकि तीनों सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई। 
हिन्दुस्थान समाचार
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