युगवार्ता

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चुनावी मैदान में राजनीतिक वंशबेल......

22/10/2019

चुनावी मैदान में राजनीतिक वंशबेल

 नरेंद्र जग्गा

हरियाणा में एक समय तीन लालों देवीलाल, बंशीलाल व भजनलाल की धमक थी। उनके बेटे-बेटियों व बहुओं ने भी राजनीतिक पारी खेली। लेकिन इस बार मामला जरा अलग है।

हरियाणा में कई दशकों तक एक दौर ऐसा भी चला है जब यहां की राजनीति तीन लालों देवीलाल, बंसीलाल व भजनलाल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इन तीनों लालों की वंशबेल आज भी राजनीति में पूरी तरह से फल फूल रही है और हरियाणा की राजनीति में इनकी खास अहमियत भी है। लेकिन जिस तरह से भाजपा ने राज्य में अपनी जबर्दस्त पैठ बनाई है उसे देखते हुए इस बार इनकी राह आसान नहीं है। अगर कहा जाय कि इन तीनों राजनीतिक परिवारों के वंशज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं तो भी अतिशयोक्ति नहीं होगी। वैसे एक समय ऐसा था जब हरियाणा में चौधरी देवीलाल, बंसीलाल और भजन लाल न केवल सक्रिय थे बल्कि सत्ता के केंद्र में यही तीन नेता ही रहे हैं। ताऊ देवीलाल ने हरियाणा में बतौर मुख्यमंत्री दो बार सत्ता संभाली।
बंसीलाल तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने जबकि चौधरी भजन लाल भी तीन ही बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। बाद के दिनों में इनके बेटे बेटियों ने इनका रिक्त स्थान भरने की कोशिश की। ताऊ देवीलाल के बेटों ने अलग-अलग मंच से अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया लेकिन चौधरी ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा की राजनीति के शिखर तक पहुंचे। ओम प्रकाश चौटाला ने अपने पिता को पीछे छोड़ते हुए हरियाणा में मुख्यमंत्री की कुर्सी चार बार हासिल की। दूसरी तरफ बंसीलाल के बेटे चौधरी सुरेंद्र सिंह तथा रणबीर महेंद्रा राजनीति में तो आए लेकिन पिता की तरह सत्ता के शिखर तक नहीं पहुंच पाए।
रणबीर महेंद्रा कभी क्रिकेट की दुनिया तो कभी राजनीति में अपनी पहचान को जिंदा रखे हुए हैं वहीं चौधरी सुरेंद्र सिंह जब पिता की तरह राजनीति में तेजी से आगे बढ़ रहे थे तो कैबिनेट मंत्री होते हुए एक विमान हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। कमोबेश कुछ ऐसी ही स्थिति भजनलाल परिवार की भी रही है। भजनलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बेटे चंद्रमोहन तथा छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई राजनीति में आए लेकिन वह भी अपने पिता वाला मुकाम हासिल नहीं कर पाए। राजनीति से इतर चंद्रमोहन ने चांद मोहम्मद के रूप में मीडिया की खूब सुर्खियां बटोरी थीं। चौधरी भजनलाल के दूसरे बेटे कुलदीप बिश्नोई कभी लोकसभा तो कभी विधानसभा में पहुंचने में कामयाब तो हुए लेकिन न तो वह अपनी राजनीतिक पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस का बेहतर तरीके से संचालन कर पाए और न ही वह कांग्रेस में शीर्ष तक पहुंच पाए। ऐसी ही स्थिति चंद्रमोहन की भी रही।
हुड्डा सरकार में वह उपमुख्यमंत्री की कुर्सी तक तो पहुंचे लेकिन पूर्व महाधिवक्ता अनुराधा बाली उर्फ फिजा प्रकरण के चलते वह राजनीतिक रूप से हाशिए पर पहुंच गए। इसके बाद हरियाणा की राजनीति में तीनों लालों की पुत्र वधुएं भी आर्इं, जो इस समय भी हरियाणा के चुनावी रण में ताल ठोंक रही हैं। इस समय ताऊ देवीलाल की तीसरी पीढ़ी एवं ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र से तो अजय चौटाला के पुत्र दुष्यंत चौटाला उचाना से चुनावी रण में उतरे हुए हैं। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बड़े बेटे स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह की पत्नी किरण चौधरी तोशाम से तो बंसीलाल के दूसरे बेटे रणबीर महेंद्रा बाढड़ा से चुनावी रण में कूदे हुए हैं। कांग्रेस पार्टी ने भजनलाल परिवार में दो टिकट दिए हैं।
भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन पंचकूला से चुनाव मैदान में हैं तो उनके छोटे बेटे अपने गढ़ आदमपुर से चुनावी रण में उतरे हुए हैं। अब देखना है कि अपने जमाने में हरियाणा में अपनी खास धमक रखने वाले हरियाणा के इन तीनों लालों की विरासत संभाल रहे उनके परिवार के सदस्यों की राजनीति कहां और किस मुकाम तक पहुंचती है। इसको जानने के लिए हमें 24 अक्टूबर तक इंतजार करना होगा क्योंकि उसी दिन परिणाम घोषित होंगे।


 
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