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आरबीआई का फैसला आर्थिक विकास के लिए कारगर साबित होगाः मेहता

06/06/2019

राधेश्याम
मुम्बई, 06 जून (हि.स.)। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई)ने गुरुवार को दूसरी द्वि-मासिक नीतिगत समीक्षा की बठक में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। आरबीआई के इस फैसले का उद्योग व बैंकिंग सेक्टर्स ने स्वागत किया है और इसे सराहनीय कदम बताया है। 
इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के अध्यक्ष सुनील मेहता ने बताया कि रेपो रेट में लगातार तीसरी बार 25 बीपीएस की कटौती की गई थी, जो अपेक्षित थी। मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ बनाए रखने के लिए यह कटौती जरूरी थी। इस बदलाव से पता चलता है कि हमेशा दरों में वृद्धि करना समय के लिहाज से ठीक नहीं होता। आऱबीआई का यह कदम स्पष्ट रूप से आर्थिक विकास के लिए कारगर साबित होगा। इस फैसले के बाद बैंकों और बाजारों के लिए सकारात्मक कदम साबित होगा। 
आईबीए के अध्यक्ष मेहता ने बताया कि आरबीआई ने अब तक तीन बार रेपो रेट में कटौती करने का फैसला किया है। आरबीआई ने अब तक बैंकों से उधार लेने की लागत को कम करने का प्रयास किया है, जिससे विकास की गति को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। पिछले छह महीने के भीतर रेपो दर में कुल 75 बीपीएस की कमी की जा चुकी है। आरबीआई के इस कदम के बाद बैंकों ने भी पिछली कटौती तक लगभग 21 बीपीएस को उपभोक्ताओं तक ट्रांसमिट कर दिया है। आर्थिक विकास को देखते हुए, बैंक आगे भी ब्याज दरों में कटौती करने के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 के लिए आरबीआई ने मुद्रास्फीति की दर को 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रखा है, इसलिए अब पूरा फोकस विकास को गति देने पर ही होगा। हालांकि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अपने जीडीपी अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर 7.0 कर दिया है। इस नीति में स्पष्ट रूप से विकास को महत्व दिया गया है। 
मेहता ने बताया कि डिजिटल लेनदेन प्रणाली को बेहतर करने के लिए आईबीए के तत्वावधान में एटीएम इंटरचेंज शुल्क संरचना की समीक्षा की जाएगी और इसके लिए एक समिति का गठन भी किया जाएगा, जो डिजिटल लेनदेन में सुधार के लिए एक ठोस कदम है। राज्य विकास ऋण में खुदरा भागीदारी निवेशक आधार बढ़ाने के साथ-साथ इस उत्पाद में तरलता में सुधार करने में मदद मिलेगी। लघु वित्त बैंकों के अच्छे प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए, आरबीआई ने इस समूह के लिए ऑन-टैप लाइसेंस का एक तंत्र प्रस्तावित किया है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वित्तीय समावेशन में भी मदद मिलेगी।   
मुंबई से संचालित होनेवाले आईटी सेक्टर की कंपनी आर. सी. इन्फोटेक के प्रोपराइटर आर. एस. यादव ने बताया कि डिजिटल लेन-देन की प्रक्रिया को बेहतर करने की जरूरत है। गुरुवार को एमपीसी की बैठक में आरबीआई ने आरटीजीएस और एनईएफटी माध्यम से लेनदेन करने पर शुल्क नहीं लगाने का फैसला किया है। यह एक सराहनीय कदम है। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वसूला जानेवाला शुल्क न्यूनतम है, लेकिन आरबीआई को क्रेडिट व डेबिट कार्ड से लेनदेन पर लगनेवाले चार्जेज को भी खत्म कर देना चाहिए। आरटीजीएस और एनईएफटी माध्यम से लेनदेन करने पर शुल्क नहीं लगाने के फैसले से बैंकों को इन लेनदेन के लिए ग्राहकों से ली जाने वाली फीस को कम करने में मदद मिलेगी। 
सिंघी एडवाइजर के संस्थापक और एमडी महेश सिंघी ने बताया कि आरबीआई की ओऱ से नीतिगत दर को 25 आधार अंकों तक घटाकर 5.75 फीसदी करने का जो निर्णय लिया गया है, वह विकास और निवेश को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे अर्थव्यवस्था में तरलता की स्थिति में सुधार करने और आर्थिक विकास को गति देने में भी मदद मिलेगी। मुद्रास्फीति और महंगाई दर को नियंत्रित में रखने के लिए एमपीसी की बैठक में कई ठोस उपायों पर चर्चा की गई है। एमपीसी का यह निर्णय आर्थिक विकास का समर्थन करने की केंद्रीय बैंक की घोषित नीति के अनुरूप है। इस कदम से अर्थव्यवस्था में तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करने की उम्मीद है, जिससे मांग की स्थिति में सुधार होगा। 
रियल्टी और इन्फ्रा सेक्टर की कंपनी पीएमटी के मैनेजर ए. के. मिश्रा ने बताया कि आरबीआई के इस फैसले के बाद विनिर्माण गतिविधि को बढ़ावा दिया जा सकेगा। इससे उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी होगी। निजी कॉरपोरेट क्षेत्र को इससे ज्यादा लाभ होगा। निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी और अधिक रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। बुनियादी ढांचगत क्षेत्र में अधिक पूंजी प्रवाहित होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को पुनर्जीवित करने और अधिक रोजगार पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। ग्रामीण क्षेत्रों की आय और मांग में इजाफा होगा। उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों में बिक्री और लाभ में सुधार के लिए उपभोग की मांग को पुनर्जीवित करने के लिए आरबीआई का यह फैसला सकारात्मक कदम है।   
हिन्दुस्थान समाचार

 

 
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