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पंजाब में किसान आंदोलन सोमवार से एक पखवाड़े के लिए स्थगित, बहाल होंगी ट्रेनें

21/11/2020

नरेन्द्र जग्गा
चंडीगढ़, 21 नवम्बर (हि.स.)। केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब में आंदोलनरत किसानों ने आज मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हुई बातचीत के बाद 23 नवम्बर से एक पखवाड़े के लिए नाकेबंदी स्थगित करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही रेलवे भी अपनी बंद पड़ी मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को बहाल करने की तैयारी शुरू कर दी है।

नाकेबंदी हटाने के फ़ैसलों का ऐलान भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के उपरांत किया। हालांकि राजेवाल ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार अगले 15 दिनों में किसान प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने में असफल रही तो रेल नाकेबंदी फिर लगा दी जाएंगी। किसान नेताओं ने पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों को केंद्रीय कृषि कानूनों के मुद्दे पर राजनीति करने की बजाय इन कानूनों के खि़लाफ़ एकजुट होकर किसानों के संघर्ष की हिमायत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पंजाब के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

मुख्यमंत्री ने रेल बहाली की अपील स्वीकार करने के लिए किसान यूनियनों का धन्यवाद दिया और उन्होंने किसान नेताओं को विश्वास दिलाया कि वह उनकी मांगों के लिए दबाव डालने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से जल्द ही मिलेंगे। उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि किसानों के संघर्ष में वह (मुख्यमंत्री) उनके साथ हैं।कैप्टन ने किसान प्रतिनिधियों से गन्ने की कीमत में वृद्धि, बकाए की अदायगी और अवशेष जलाने के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द कराने जैसे मामलों का निपटारा करने का भी भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि वह इन मुद्दों पर अगले एक हफ्ते में बातचीत करेंगे और इस मामले पर विचार-विमर्श के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाएंगे।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज की बैठक में किसान प्रतिनिधियों से कहा कि यदि रेल सेवाएं बहाल न हुईं तो राज्य को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा और पंजाब के हित में यही होगा कि रेल सेवा जल्द से जल्द शुरू की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग समेत राज्य के लिए वह ख़ुद भी बहुत चिंतित हैं। मुख्यमंत्री ने किसान यूनियनों को रेल सेवाएं बहाल करने की अपील की क्योंकि रेल रोकने से अब तक राज्य को 40,000 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। ज़रूरी वस्तुओं समेत कोयला, खाद, यूरिया की कमी का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कच्चे माल की कमी के कारण लुधियाना और जालंधर में बड़ी संख्या में यूनिट बंद हो चुकी हैं, जिससे 6 लाख प्रवासी कामगार अपने-अपने पैतृक राज्यों को वापस जा रहे हैं।

किसान संगठनों द्वारा नाकेबंदी  हटाने के फ़ैसले का स्वागत करते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राज्य और किसानों के हित में सभी पार्टियों को एकजुट होने का न्योता दिया। 

उधर, फिरोजपुर मंडल के रेल प्रबंधक राजेश अग्रवाल ने बताया कि किसानों द्वारा 23 नवम्बर से धरना खत्म करने के ऐलान के बाद रेलवे भी अपनी सेवाओं को बहाल करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पंजाब में किसान यूनियनों के आंदोलन के कारण 24 सितम्बर से राज्य में ट्रेनों का परिचालन बंद है।

हिन्दुस्थान समाचार 


 
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