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लाखों युवाओं को मिला रोजगार – महेंद्र नाथ पाण्डेय

22/10/2019

लाखों युवाओं को मिला रोजगार – महेंद्र नाथ पाण्डेय


देशभर के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एक लंबा सफर तय कर चकी है। कहां तक पहुंचा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का सफर? क्या रहीं मंत्रालय की उपलब्धियां? पहले चरण से कितना अलग है दूसरा चरण? रोजगार, उपलब्धियां, प्रशिक्षण के तरीके और प्रशिक्षण अवधि जैसे तमाम बिंदुओं पर कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री महेंन्द नाथ पाण्डेय से बातचीत की यथावत संवाददाता आशुतोष कुमार पाण्डेय ने। प्रस्तुत है उसके संपादित अंश।

हमारे युवाओं को विदेशों में भी रोजगार मिल सके इसके लिए हमारा मंत्रालय दुनिया के तमाम देशों से संपर्क कर रहा है। साथ ही उनकी जरूरतों का अध्ययन कर रहा है। हाल ही में हमारे मंत्रालय द्वारा की गई पहल के चलते 52 प्रशिक्षित युवाओं को हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य सत्कार) क्षेत्र में जापानी भाषा का प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए वहां भेजा गया है।

 कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय युवाओं को रोजगार दिलाने में कितना सहायक हो रहा है?

मंत्रालय ने अभी तक 50 लाख, 60 हजार युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया है। जिनमें से 12 लाख 60 हजार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराए गए हैं। हमारे मंत्रालय के अलावा भी कई मंत्रालय युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें हुनरमंद बना रहे हैं और उनको रोजगार दे रहे हैं।

 आपके मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत किस तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है?

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत रिकगनेशन आॅफ प्रियोर लर्निंग (आरपीएल) सर्टिफिकेट योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत जो लोग पारंपरिक काम कर रहे हैं, उनको उसी काम के लिए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है और उन्हें भारत सरकार की ओर से प्रमाणपत्र भी दिया जा रहा है। इससे उनके काम में गुणवत्ता भी आ रह है और सर्टिफिकेट होने के कारण उनको रोजगार मिलने में भी आसानी हो रही है। इस योजना से बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

 आरपीएल योजना के तहत कितने लोगों को प्रशिक्षण अभी तक दिया गया है और ये योजना कितनों को रोजगार देने में सहायक हुई है?

अभी तक 72 लाख लोगों को आरपीएल प्रदान किया गया है। इसके कारण उनका जीवन बेहतर हो रहा है। ये जो काम पहले से करते आ रहे हैं उस काम में इस प्रशिक्षण के बाद और बेहतर तरीके से कर रहे हैं। यह योजना लोगों को एक पहचान दिला रही है। मोदी सरकार ने मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया की शुरुआत कर देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कौशल विकास के क्षेत्र में मोदी सरकार ने बेहतर माहौल बनाया है। आने वाले दिनों में इसके और भी सुखद परिणाम आएंगे।

 देश में बेरोजगारी चरम पर है। इस चुनौती को आप कैसे देखते हैं?

मोदी सरकार देश के युवाओं को ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब गिवर’ बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी सरकार शहरों के साथ-साथ गांवों की ओर बढ़ रही है। लोगों को हुनरमंद बनाने के लिए प्रशिक्षण देने, व्यवसाय लगाने के लिए ऋण व व्यापार करने का हुनर सिखा रही है। जब हर हाथ हुनरमंद होगा और हर हुनरमंद को काम मिलेगा और उसके काम का उचित दाम मिलेगा, तो बेरोजगारी की समस्या खुद ही खत्म हो जाएगी।

 आपके मंत्रालय ने तीन भारतीय कौशल संस्थान बनाने का निर्णय लिया है। यहां किस तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा?

क्या यहां कोई डिग्री कोर्स भी शुरु किए जाएंगें? यहां युवाओं को आॅटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर टेक्नोलॉजी और ऊर्जा संरक्षण जैसे पाठ्यक्रम पढ़ाए जाने की योजना है। साथ ही पारंपरिक कार्यों को आधुनिकता से जोड़ने सहित कम पढ़े-लिखे युवाओं के लिए भी प्रशिक्षण देने की व्यवस्था कराने की योजना है। यह कैंपस मुंबई, कानपुर और अहमदाबाद में खोले जाएंगे। इन कैंपसों को सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। इसमें सरकार के साथ टाटा ने सहयोग किया है। इस पर करीब 300 करोड़ रुपये का निवेश होगा।

 प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का पहला चरण पूरा होने वाला है। लेकिन प्रशिक्षण और ट्रेनिंग देने को लेकर कई सेंटरों पर सवाल उठे हैं?

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का पहला चरण 2020 में पूरा हो जाएगा। पहले चरण की पूरी समीक्षा होगी। जो भी प्रशिक्षण केन्द्र सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं उन्हें बंद किया जाएगा और अच्छा काम करने वालों को दूसरे चरण में भी प्राथमिकता दी जाएगी। हमारा प्रयास है कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए।

 रोजगार के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण होना जरूरी है इसके लिए आपका मंत्रालय व्यापक तौर पर क्या कर रहा है?

गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के लिए हमारा मंत्रालय व्यापक तौर पर कार्य कर रहा है। इसके लिए देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) को मजबूत करने की योजना है। जहां जरूरत होगी वहां और भी आईटीआई सेंटर खोले जाएंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नोएडा में हमारे पास विश्वस्तरीय संस्थान हैं, जिसका नाम राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु कारोबार विकास संस्थान (निसबड) है। इसे हमारा मंत्रालय देख रहा है। यहां भारत के अलावा 25 देशों के लोग प्रशिक्षण ले रहे हैं। सेवानिवृत्त सूबेदार, मेजर आदि को वहां उद्यम लगाने का प्रशिक्षण मिल रहा है, जो पहले सिक्योरिटी गार्ड का काम ही करते थे। निसबड में लोग निर्यात की बारीकियां सीख रहे हैं। अब यह तय किया गया है कि इस सेंटर को और बेहतर बनाया जाए। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लोगों को मुद्रा योजना के जरिए वित्तीय सहायता दी जाए।

 जम्मू-कश्मीर में रोजगार को लेकर सरकार क्या करने वाली है?

जम्मू-कश्मीर में हर युवा को रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए राज्य में नये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) खोले जाएंगे। जो आईटीआई पहले से हैं, उनको और मजबूत किया जाएगा। जम्मू- कश्मीर में हमने 10 सदस्यों की एक टीम भेजी थी। इस टीम ने हर पहलुओं पर अध्ययन किया है। जम्मू-कश्मीर घाटी और लद्दाख में आईटीआई व अन्य रोजगार प्रशिक्षण खोले जाएंगे। यहां जो लोग पारंपरिक कामों में लगे हैं, उनके लिए प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएंगे।

 कौशल विकास के लिए वैसे तो हर मंत्रालय इसमें सहयोग कर रहा है।

लेकिन क्या कोई योजना किसी बाहरी देश की किसी योजना से संबद्ध है। हमारे युवाओं को विदेशों में भी रोजगार मिल सके इसके लिए हमारा मंत्रालय दुनिया के तमाम देशों से संपर्क कर रहा है, साथ ही उनकी जरूरतों का अध्ययन कर रहा है। हाल ही में हमारे मंत्रालय द्वारा की गई पहल के चलते 52 प्रशिक्षित युवाओं को हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य सत्कार) क्षेत्र में जापानी भाषा का प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए वहां भेजा गया है। हम और लोगों को भी जापान भेज सकें, इसके लिए जापान सरकार से बात की है। हमारा उदेश्य है कि हम हर वर्ष 5 हजार लोग जापान भेजें।

 प्रधानमंत्री मोदी ने 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में आप का मंत्रालय क्या योगदान करने वाला है?

हमारा लक्ष्य है कि हम देश के युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें देश सहित विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही छोटे कारोबारियों को बेहतर प्रशिक्षण देकर उन्हें व्यापार के लिए अनुकूल माहौल देंगे जिससे और अधिक रोजगार बढ़े।


 
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