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ममता डराएं, मोदी बांटें ईदी!

08/06/2019

डॉ. प्रभात ओझा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुस्लिम हितों की अलमबरदार हैं। वह अपने आचरण में भी इस तरह का प्रदर्शन करती हैं। सिर पर मुस्लिम औरतों की तरह साड़ी का पल्लू बांध लेना और इबादत करने में उन्हें परहेज नहीं है। बहस का विषय हो सकता है कि सर्वधर्म समभाव में जन्मजात धर्म को छोड़े बिना कोई और पूजा पद्धति अपनाना ही सभी धर्मों के प्रति बराबर का सम्मान है या सिर्फ दिखावा। उदाहरण के लिए ममता दीदी चर्च में प्रभू यीशू को भी याद करतीं और गुरुद्वारे में गुरवाणी का पाठ करतीं तो कितना अच्छा लगता। वह ऐसा इसलिए नहीं करतीं कि उनका सर्वधर्म समभाव अपने धर्म के अलावा मुस्लिम मतावलंबियों के कारण इसलिए है कि वे पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका रखते हैं।

लोकसभा चुनाव के परिणाम से ममता बनर्जी चिंता में हैं। आंकलन से साफ है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार भारी मतों से विजयी हुए हैं। 2014 में राज्य की 42 लोकसभा सीटों में सिर्फ दो सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस चुनाव में 18 सीटों पर जीत हासिल की। इसके विपरीत राज्य की सत्ताधारी टीएमसी को पिछले चुनाव में मिलीं 34 सीटों के मुकाबले 22 पर ही संतोष करना पड़ा है। बीजेपी की जीती आठ सीटें बांग्लादेश सीमा से लगी हैं। इस सच्चाई को भी देखना होगा कि उत्तर बंगाल की आठ सीटों में से सात भाजपा ने छीन ली है। इनमें अलीपुरद्वार के अलावा सभी छह रायगंज, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, बालुरघाट, दार्जिलिंग और मालदा उत्तर में मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं। रायगंज के 49 से 53 फीसद मुस्लिम मतदाताओं के बीच देवश्री चौधरी का जीतना खास है। कूचबिहार में भी 27 से 30 फीसद मुस्लिम वोटर हैं, जहां भाजपा के निशीथ प्रमाणिक जीते हैं। जलपाईगुड़ी सीट 17 से 20 फीसद मुस्लिम मतदाताओं के बीच भाजपा उम्मीदवार जयंत रॉय ने तृणमूल उम्मीदवार को 1.84 लाख वोटों से हराया। एक तिहाई से अधिक मुस्लिम मतदाताओं वाले बालुरघाट में भी भाजपा की सुकांत मजूमदार ने तृणमूल सांसद अर्पिता घोष को हरा दिया। दार्जिलिंग सीट पर नेपाली और बंगाली समुदाय के मतदाता अधिक हैं। वहां लगभग 14.6 फीसद मुस्लिम वोट भी शामिल हैं। यहां भाजपा उम्मीदवार ने तृणमूल प्रत्याशी को चार लाख से अधिक वोटों से हाराया। लगभग आधे मुस्लिम वोटर वाले क्षेत्र मालदा उत्तर में भी भाजपा जीत दर्ज करने में कामयाब रही। उधर, दक्षिण बंगाल में बांग्लादेश से लगते जिले नदिया की सीट राणाघाट से भी भाजपा के जगन्नाथ सरकार ने तृणमूल उम्मीदवार रुपाली विश्वास को 2.33 लाख वोटों के भारी अंतर से हराया। तृणमूल प्रत्याशी रुपाली के विधायक पति सत्यजीत विश्वास की कुछ माह पहले ही हत्या कर दी गई थी। उनको अपने पति की हत्या के बाद सहानुभूति मत भी जिता नहीं सके।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा की जीत का आशय बहुत साफ है। धीरे-धीरे अल्पसंख्यक समाज के लोग यह समझने लगे हैं कि उनके हितैषी दिखने और उनके लिए काम करने में बहुत फर्क होता है। गैर मुस्लिम भी एकेडमिक तौर पर मुस्लिम धर्म के विद्वान हो सकते हैं। सभी धर्मों में मानव मात्र पर लागू होने वाले सिद्धांत पर चर्चा कर सकते हैं। इसके विपरीत मानव मात्र का कल्याण समझे बिना सिर्फ वोटों के लिए किसी समुदाय का हितैषी दिखना, अब हास्य अथवा घृणा तक का विषय बन रहा है। यहीं पश्चिम बंगाल में ईद के दिन ममता बनर्जी और मुस्लिम उपदेशक काजी फजलुर रहमान के भाषण-अंश देखे जाने चाहिए। ईद के मौके पर अल्पसंख्यकों को मुबारकबाद देते हुए ममता बनर्जी ने फिर से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को निशाने पर लिया। ममता बनर्जी ने कहा कि डरने की जरूरत नहीं है। दीदी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि जो भी उनसे टकराएगा, वह चूर-चूर हो जाएगा। वहीं, काजी फजलुर रहमान ने मुसलमानों को किसी भी राजनीतिक पार्टी पर निर्भर नहीं रहने की नसीहत दी। मौलाना हर साल ईद के मौके पर समुदाय विशेष के लोगों को संबोधित करते हैं। मौलाना ने जोड़ा कि मैंने सुना है कि कई मुस्लिम कहते हैं कि यह पार्टी हमारे हितों की रक्षा करेगी। आपने देखा है कि क्या हुआ है। खुद के भीतर झांकिए और अल्लाह में विश्वास कीजिए। विश्लेषक कहते हैं कि रहमान का इशारा ममता बनर्जी की ही तरफ था।

बात ईद की है तो उसी दिन दूसरी बार केंद्र की सत्ता में आने वाली सरकार की बात करें। मोदी सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अगले पांच साल में 5 करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति' देने का एलान किया। इनमें 50 फीसद छात्राएं शामिल होंगी। नकवी कहते हैं कि '3 ई' यानी एजुकेशन, एम्‍प्‍लॉयमेंट और एम्पावरमेंट हमारा लक्ष्‍य है। सरकार अगले पांच साल में अल्पसंख्यक समाज के 25 लाख नौजवानों को रोजगारपरक कौशल भी उपलब्‍ध कराएगी। नकवी ने इसके साथ ही 'सीखो और कमाओ' 'नई मंजिल' 'गरीब नवाज कौशल विकास' और 'उस्‍ताद' जैसे रोजगारपरक कौशल विकास कार्यक्रमों को भी मजबूती देने की बात कही।

ममता बनर्जी जैसी नेताओं को काम करने के केंद्र सरकार के तरीके से सीखना होगा। वह तो आयुष्मान जैसी जरूरी केंद्रीय स्वास्थ्य योजना को भी यह कहकर नकारना चाहती हैं कि पश्चिम बंगाल में इससे बेहतर सुविधा है। नागरिक आपूर्ति मामलों में भी इस राज्य की खस्ता हालत है। असल में दीदी लोकसभा चुनाव परिणाम से बौखलाई हुई हैं। वह किसी भी हाल में विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी सरकार गंवाना नहीं चाहतीं। वह अनुभवी नेता हैं, इसमें दो राय नहीं। फिर भी यह समझना होगा कि समुदाय विशेष को निर्भीक रहने का संदेश देकर भी वे उस समुदाय को डरा रही हैं। जिन्हें वह डरा रही हैं, इधर मोदी सरकार उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति जैसी ईदी दे रही है।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार की पाक्षिक पत्रिका 'यथावत' के समन्वय संपादक हैं)


 
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