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बंटवारे की ओर कांग्रेस

31/08/2019

बद्रीनाथ वर्मा
आंखों पर अंधविरोध का चश्मा चढ़ाये कांग्रेस नेतृत्व का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बैर इतना है कि कब यह नापसंदगी देश विरोध की सीमाएं लांघ जाता है, उसे पता भी नहीं होता। एक तरफ देश पीएम मोदी के निर्णयों या कामों का स्वागत करता होता है तो दूसरी तरफ कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगाकर उन्हें खलनायक दिखाने का प्रयत्न करती प्रतीत होती है। इसे देखकर साफ पता चलता है कि मुद्दा विहीन कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा मोदी विरोध रह गया है। यह हाल तब है जब कांग्रेस का यह एकतरफा प्रलाप लोगों को कतई पसंद नहीं आ रहा। चुनाव परिणाम इसकी गवाही देते हैं। हद तो यह कि अगर पार्टी का कोई नेता सही सलाह भी देने की कोशिश करता है तो कांग्रेस नेतृत्व व पार्टी को लगातार गर्त की तरफ ले जा रहे उसके सलाहकार मानने को तैयार नहीं होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर काम की नाहक आलोचना को लेकर कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी के बाद शशि थरूर के बयानों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने पार्टी की अंधविरोध वाली नीतियों पर सवालिया निशान लगाते हुए कांग्रेस नेतृत्व को आईना दिखाया है। पार्टी की दुर्गति से व्यथित ये नेता चाहते हैं कि कांग्रेस अपनी नीतियों में परिवर्तन कर अंध मोदी विरोध से दूरी बनाये। हालांकि पार्टी अभी भी इन नेताओं की सलाह मानने के मूड में नहीं है। ऐसे में साफ है कि कांग्रेस ने जो रास्ता अख्तियार किया है, अंततः वह ऐसे गहरे गड्ढे की तरफ जाता है जहां से निकलना उसके लिए असंभव-सा होगा।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बयान भले ही नेताओं ने दिये हैं लेकिन यह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पनप रहे आक्रोश की अभिव्यक्ति है। अपनी गलत नीतियों की वजह से लगातार गर्त में जा रही कांग्रेस को लेकर उनका चिंतित और आक्रोशित होना जायज ही है। उनके भीतर की यह छटपटाहट और बेचैनी अगर आगे भी बनी रहती है तो कांग्रेस के एक और बंटवारे से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके पीछे की वजहों को रेखांकित करते हुए देश के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि आगामी कुछ महीनों में कांग्रेस के पूर्णकालिक अध्यक्ष का चुनाव होना है। अगर गांधी परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति के हाथ में कमान आती है तो उस परिस्थिति में कांग्रेस बच भी सकती है और विभाजित भी हो सकती है। कारण, कांग्रेस के लिए गांधी परिवार फेविकोल की तरह है।
कश्मीर पर मोदी सरकार के फैसले के बाद कांग्रेस के भीतर की यह छटपटाहट खुलकर सामने आई। इस मुद्दे पर कांग्रेस दो धड़े में बंटी हुई साफ दिखाई पड़ रही है। पार्टी का एक वर्ग छाती पीटते हुए हाय-तौबा मचा रहा है जबकि कई वरिष्ठ नेताओं ने 370 पर सरकार के निर्णय का खुलकर समर्थन किया है। इसमें राहुल गांधी के नजदीकी ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर दीपेंद्र हुड्डा तक दर्जनों नाम हैं। बाद के दिनों में भी सरकार को इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के सदरे रियासत रहे कर्ण सिंह से लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत तमाम अन्य कांग्रेसी नेताओं का साथ मिला। हालांकि गुलाम नबी आजाद के प्रभाव में कांग्रेस नेतृत्व जमीनी सच्चाई से आंखें मूंदे हुए है। नतीजा, अनाप-शनाप बयानों का दौर अभीतक जारी है।
बहरहाल, मोदी के अंध विरोध पर कांग्रेस के भीतर का विरोधाभास एकबार फिर सामने आया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंधविरोध को गलत ठहराया है। जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानने वाली कांग्रेस के लिए यह हजम होने वाली बात नहीं थी। बावजूद इसके जयराम रमेश की हां में हां मिलाते हुए एक और वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कांग्रेस के इस जले पर थोड़ा और नमक छिड़क दिया। रही सही कसर शशि थरूर ने पूरी कर दी। उन्होंने भी प्रधानमंत्री मोदी के अंधविरोध को गलत ठहराया है। अब कांग्रेस नेतृत्व माने या न माने लेकिन एक के बाद एक आये तीनों वरिष्ठ नेताओं के बयानों से साफ है कि मोदी इफेक्ट आज की हकीकत है। संभवतः इसी चक्षुज्ञान खुलने का कमाल है कि इन नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हर बात या मसले पर 'खलनायक' की तरह पेश करने को गलत बताया है। इनके बयानों को देखकर लगता है कि वाकई इन्हें इस सत्य का भान हो गया है कि अनर्गल आरोप और केवल विरोध के लिए विरोध अंततः नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में ही इजाफा करता है।
इसकी शुरुआत जयराम रमेश ने यह कहते हुए की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम करने का मॉडल हर प्रकार से कोई नकारात्मक कथा नहीं है। इसलिए हर वक्त उनके काम को गलत ठहराना सही नहीं है। जयराम रमेश की हां में हां मिलाते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने भी माना कि मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है। काम हमेशा अच्छा, बुरा या मामूली होता है। काम का मूल्यांकन व्यक्ति नहीं बल्कि मुद्दों के आधार पर होना चाहिए। जैसे उज्ज्वला योजना कुछ अच्छे कामों में एक है। कांग्रेस अभी इन झटकों से उबरी भी नहीं थी कि शशि थरूर ने एक और चोट कर दी। थरूर ने कहा कि मैं छह साल पहले से ही यह कहता आ रहा हूं कि जब नरेंद्र मोदी अच्‍छा कहें या अच्‍छा करें तो उनकी प्रशंसा होनी चाहिए। इससे जब पीएम मोदी गलती करेंगे तो हमारी आलोचना को विश्‍वसनीयता मिलेगी। जाहिर है यह कांग्रेस को तिलमिलाने के लिए काफी है। यही कारण है कि वीरप्पा मोइली ने कहा है कि जो भी नेता कांग्रेस की नीतियों से अलग हटकर इस तरह के बयान दे रहे हैं उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी।
(लेखक हिन्दुस्थान समाचार की पत्रिका `युगवार्ता' से संबद्ध हैं।)


 
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