लेख

Blog single photo

कोहली सफलता के मामले में और विराट

04/09/2019

मनोज चतुर्वेदी

विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया 67 सालों में पहली बार वेस्टइंडीज दौरे से अजेय लौटी है। भारत ने 1952 में वेस्टइंडीज का पहला दौरा किया था। साल 2019 के इस दौरे पर सिर्फ एक वनडे मैच बारिश में धुलने की वजह से परिणाम नहीं निकला अन्यथा टीम इंडिया ने सभी टी-20, वनडे और टेस्ट मैचों में विजय प्राप्त की। टीम इंडिया के दूसरा टेस्ट जीतते ही विराट कोहली भारत के सफलतम टेस्ट कप्तान बन गए हैं। यह उनके कप्तानी कॅरियर की 28वीं जीत थी। इसके साथ ही उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ दिया। इस सीरीज के शुरू होने से पहले महेंद्र सिंह धोनी 60 मैचों में 27 जीतकर देश के सबसे सफल टेस्ट कप्तान थे। लेकिन विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ इस सीरीज का पहला टेस्ट जीतकर धोनी के रिकॉर्ड की बराबरी की और दूसरा टेस्ट जीतकर सबसे सफल टेस्ट कप्तान का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
टेस्ट क्रिकेट के सफलतम कप्तानों की सूची में पहला नाम दक्षिण अफ्रीका के कप्तान रहे ग्रेम स्मिथ का आता है। उन्होंने अपनी कप्तानी में सबसे ज्यादा 53 जीतें हासिल की हैं। ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग 48 जीतों से दूसरे और वेस्टइंडीज के क्लाइव लॉयड 36 जीतों से तीसरे स्थान पर हैं। विराट कोहली जिस तरह से सफलताएं हासिल कर रहे हैं, उससे तीसरे स्थान पर जल्द आने की उम्मीद की जा सकती है। यदि वह दुनिया के सफलतम टेस्ट कप्तान बनना चाहते हैं तो उन्हें तीन-चार साल तक अपनी कप्तानी को बनाए रखना होगा क्योंकि स्मिथ के 53 जीतों के रिकॉर्ड को पार करने में कम से कम इतना समय लगना लाजिमी लगता है। भारत के सफलतम टेस्ट कप्तान बनने के साथ ही वह विदेश में सबसे ज्यादा जीत पाने वाले भारतीय टेस्ट कप्तान भी बन गए हैं। उन्होंने सौरव गांगुली के विदेश में 11 टेस्ट जीतने के रिकॉर्ड को तोड़कर 13 जीतों का नया रिकॉर्ड बनाया है।
आमतौर पर माना जाता है कि किसी भी कप्तान और कोच की सफलता टीम के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। कई बार टीम इतनी मजबूत बन जाती है कि कप्तान और कोच के कुछ खास किए बगैर सफलताएं उनके नाम दर्ज होती चली जाती हैं। यह सही है कि एक कप्तान अपने साथी खिलाड़ियों का किस तरह इस्तेमाल करता है, इस पर टीम का प्रदर्शन निर्भर करता है। पर कई बार टीम इतनी मजबूत बन जाती है कि कप्तान टीम को लेकर कुछ गलत फैसले कर भी ले, तो भी सफलता से उसका साथ नहीं छूटता है। अब आप ऑस्ट्रेलियाई कोच जान बुकानन को ही लें। उनके समय में रिकी पोंटिंग की अगुआई वाली ऑस्ट्रेलिया इतनी मजबूत टीम थी कि उनके कोच रहते टीम ने लगातार 16 टेस्ट जीतने, विश्व कप में लगातार 23 टेस्ट जीत पाने का रिकॉर्ड बनाया। विश्व कप के साथ आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती। लेकिन, बुकानन को कभी उनके आलोचकों ने इन सफलताओं का श्रेय नहीं दिया और हमेशा कहा कि पोंटिंग की अगुआई वाली टीम का किसी को भी कोच बना दें, सफलताएं इसी तरह मिलती रहेंगी।
टीम इंडिया भी आजकल कुछ इसी तरह के दौर से गुजर रही है। विराट कोहली ने इस टीम के कल्चर को एकदम से बदल दिया है। आजकल टीम के हर खिलाड़ी का फिटनेस पर जोर रहता है। इसकी वजह खुद कप्तान विराट का फिटनेस पर बहुत ज्यादा जोर देना है। यही वजह है कि देश की कोई भी टीम इतनी फिट कभी नहीं रही। इसके अलावा यह अब तक की सबसे संतुलित टीम है। जसप्रीत बुमराह की अगुआई वाला पेस अटैक तो इतना धारदार है कि अब उसे हल्के में लेने की जुर्रत कोई टीम नहीं कर सकती है। एक समय था कि टीम इंडिया के विदेशी दौरे पर जाने पर मेजबान टीमें तेज विकेट बनाकर हमारी टीम का मान-मर्दन कर दिया करती थीं। लेकिन अब कोई भी टीम ऐसा करने से पहले सौ बार सोचती है। क्योंकि, उसे मालूम है कि तेज विकेट बनाने पर उसकी दुर्गति हो सकती है। टीम इंडिया के पेस अटैक का यह खौफ जसप्रीत बुमराह के जुड़ने से बना है। वह आमतौर पर 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं और कई बार 150 किमी की रफ्तार को भी पार कर जाते हैं। यही नहीं वह अपनी गेंदबाजी में कई चीजें लगातार जोड़ते रहते हैं। इसका ही परिणाम है कि वह सीरीज के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 13 विकेट निकाले। टीम इंडिया के बाकी दो पेस गेंदबाजों ईशांत शर्मा ने 11 और मोहम्मद शमी ने 9 विकेट निकाले। इससे एक बात और साफ होती है कि टीम इंडिया अब पूरी तरह से स्पिन की बजाय पेस अटैक पर निर्भर है। विराट ने सीरीज जीतने के बाद कहा कि जसप्रीत बुमराह मौजूदा समय के पेस गेंदबाजों में सबसे मुकम्मल गेंदबाज हैं। वह अपनी गेंदों की रफ्तार, विविधता और कोंणों से सामने वाले बल्लेबाज को छकाने का हरसंभव प्रयास करते हैं।
हनुमा विहारी को इस दौरे की खोज कहा जा सकता है। हनुमा विहारी को जब रोहित शर्मा की जगह पर अंतिम एकादश में चुना गया तो लगा कि शायद कप्तान ने रोहित के साथ अन्याय किया है। लेकिन हनुमा इस सीरीज में एक शतक और दो अर्धशतकों से सबसे ज्यादा 289 रन बनाकर कप्तान की उम्मीदों पर खरे उतरे। विराट ने हनुमा विहारी के बारे में कहा कि वह जब बल्लेबाजी करते हैं, उस समय ड्रेसिंग रूम विश्वास से भरा रहता है। हालांकि हनुमा अपने बेहतर प्रदर्शन के लिए कोच रवि शास्त्री को श्रेय देते हैं। हनुमा बताते हैं कि 'कोच रवि शास्त्री ने मुझे पैरों को थोड़ा-सा मोड़कर खेलने की सलाह दी। इससे मुझे फ्रंट फुट या बैक फुट पर मूव करने में आसानी हुई।' यह सीरीज अकिंज्य रहाणे को मजबूती देने वाली साबित हुई। रहाणे ने एक शतक और दो अर्धशतकों से 271 रन बनाए। रहाणे ने शतक बहुत लंबे अर्से के बाद बनाया। रहाणे का रंगत में आना टीम इंडिया के लिए अच्छा संकेत है, क्योंकि आगे टीम को कुछ मुश्किल सीरीज खेलनी है। उसमें टीम को रहाणे से अच्छी मदद मिलने की उम्मीद की जा सकती है। भारतीय टीम को इस माह ही दक्षिण अफ्रीका से सीरीज खेलनी है। इस सीरीज में बहुत संभव है कि रविचंद्रन अश्विन खेलते दिख जाएं। वैसे कहना गलत नहीं होगा कि विदेशी दौरों पर वह नंबर एक स्पिन गेंदबाज के मामले में रविंद्र जडेजा से पिछड़ गए हैं। 
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं।) 


 
Top