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Sheila's last letter

22/08/2019

शीला का आखिरी खत


दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के दो दिन बाद ही उनका एक खत सामने आया है। यह उनका आखिरी खत बताया जा रहा है। उन्होंने यह खत 8 जुलाई को लिखा है। खत यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी के नाम है। इस खत में दिल्ली की राजनीति का जिक्र है। इसके साथ उन्होंने दिल्ली कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की संदिग्ध भूमिकाओं का भी उल्लेख किया है। स्वर्गीय शीला दीक्षित ने अपने पत्र में सोनिया गांधी से उन नेताओं की भूमिकाओं की जांच का आग्रह भी किया था। शीला दीक्षित के इस आखिरी खत पर सोनिया गांधी ने क्या जवाब दिया, यह अभी पता नहीं चला है। मगर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की माने तो शीला दीक्षित की इस आखिरी मांग को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। यानी खत मिलने के 20 दिन बाद भी सोनिया गांधी ने संदिग्ध भूमिकाओं में शामिल नेताओं की जांच शुरू नहीं करवाई है।

शीला समर्थक नेताओं में इसको लेकर नाराजगी है। वे खुलकर तो नहीं लेकिन आपस में यह चर्चा जरूर कर रहे हैं कि शीला दीक्षित के निधन के बाद एक तरह से यह उनकी आखिरी इच्छा थी। जिसे पूरा होना ही चाहिए। लेकिन यहां समस्या यही है कि आखिर सोनिया गांधी या गांधी परिवार के सामने मुंह कौन खोले। पत्र के बारे में पार्टी सूत्रों का कहना है कि स्वर्गीय शीला दीक्षित ने निधन से कुछ दिन पहले सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। उस पत्र में दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन और दिल्ली प्रभारी पीसी चाको की मिलीभगत का आरोप लगाया है। मिलीभगत का आरोप लगाते उन्होंने कहा था, ‘माकन के इशारे पर चाको बेवजह मेरे कामों में अड़ंगा लगा रहे हैं। पार्टी हित में लिये मेरे फैसले को पलट रहे हैं। इससे कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।’

सूत्र ने यह बताया कि स्वर्गीय दीक्षित ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि चाको और माकन दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन चाहते थे, लेकिन मैं ही उसके खिलाफ खड़ी रही। यह आप भी जानती हैं। नतीजा आपके सामने है। कांग्रेस बिना गठजोड़ के दिल्ली में अच्छा प्रदर्शन की। पार्टी दूसरे नंबर पर आई। उन्होंने पत्र के अंत में लिखा है, ‘दिल्ली कांग्रेस के हालिया विवाद में आप मेरी, अजय माकन और पिसी चाको तीनों की भूमिका की जांच करा लें। मेरे आरोप सही साबित होंगे।’ लोकसभा चुनाव के दौरान कई बार दिल्ली कांग्रेस की गुटबाजी सामने आई। लेकिन हर बार पार्टी नेता गुटबाजी की खबर को गलत बताते रहे। स्वर्गीय शीला दीक्षित के इस पत्र ने उन सभी खबरों की पुष्टि कर दी है।दिल्ली में कांग्रेस सरकार के दौरान से ही शीला दीक्षित और अजय माकन में मतभेद रहे हैं। इसलिए शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी तो अजय माकन को केंद में मंत्री बनाकर पार्टी ने दोनों को साध रखा था। लेकिन दिल्ली और केंद्र से सत्ता जाने के बाद दोनों के मतभेद फिर सामने आने लगे थे।

हालांकि दिल्ली में हारने के बाद शीला दीक्षित दिल्ली की राजनीति से दूर हो गई थी। पर जैसे ही लोकसभा चुनाव के कुछ पहले शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो दोनों नेताओं की लड़ाई फिर सामने आने लगी। लोकसभा चुनावों के दौरान भी शीला दीक्षित और पीसी चाको और माकन के बीच मतभेद थे। आम आदमी पार्टी से गठबंधन को लेकर दिल्ली कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई थी। शीला गठबंधन के खिलाफ थीं वहीं चाको और माकन गठबंधन हर हाल में चाहते थे। तब पार्टी आलाकमान ने शीला दीक्षित की सुनी और आप से गठबंधन नहीं किया। शीला ने अपनी लोकप्रियता और मेहनत से पार्टी को दूसरे नंबर पर ले आयी। पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने वाली थी, जिसमें माकन चाको से मिलकर अड़ंगा लगा रहे थे। कुछ दिनों पहले शीला दीक्षित ने कई जिलों में पदाधिकारी नियुक्त किये, इसमें भी चाको ने अड़ंगा लगाया।

शीला दीक्षित के स्वास्थ्य पर भी वे सवाल उठाते रहे। लेकिन अब शीला दीक्षित चाको और माकन पर सवाल उठाते हुए दुनिया से रुख्सत हो गर्इं। दिसंबर 1998 से दिसंबर 2013 तक शीला दीक्षित दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी थीं। 20 जुलाई को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।


 
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