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इसरो से प्रधानमंत्री का संबोधन

19/09/2019

इसरो से प्रधानमंत्री का संबोधन


सरो का लैंडर विक्रम से चांद पर उतरने के ठीक पहले संपर्क टूट गया। इससे वैज्ञानिक परेशान हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस रात खुद इसरो मुख्यालय में मौजूद थे। उन्होंने निराश वैज्ञानिकों को देखा। निराश वैज्ञानिकों का प्रधानमंत्री ने हौसला बढ़ाया। वहीं से उन्होंने देश को संबोधित भी किया।

  •  प्रधानमंत्री ने कहा कि हम निश्चित रूप से सफल होंगे। इस मिशन के अगले प्रयास में भी और इसके बाद के हर प्रयास में भी कामयाबी हमारे साथ होगी।
  •  हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है। कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है। इसी से आगे की सफलता तय होती हैं। ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है। विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं।
  •  मैं सभी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के परिवार को भी सलाम करता हूं। उनका मौन लेकिन बहुत महत्वपूर्ण समर्थन आपके साथ रहा। हमारे जोश और ऊर्जा में कमी नहीं आएगी। हम फिर पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेंगे।
  •  आपने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर भारत का झंडा फहराया था। हमारे चंद्रयान ने दुनिया को चांद पर पानी होने की अहम जानकारी दी। इससे पहले दुनिया में ऐसी उपलब्धि किसी के नाम नहीं थी।
  •  विज्ञान में हर प्रयोग हमें अपने असीम साहस की याद दिलाता है। चंद्रयान-2 के अंतिम पड़ाव का परिणाम हमारी आशा के अनुसार नहीं रहा, लेकिन पूरी यात्रा शानदार रही। जानदार रही है।
  •  पूरा भारत आपके साथ है। आप सब महान प्रोफेशनल हैं, जिन्होंने देश की प्रगति के लिए संपूर्ण जीवन दिया और देश को मुस्कुराने और गर्व करने के कई मौके दिए। आप लोग मक्खन पर लकीर करने वाले नहीं हैं, पत्थर पर लकीर करने वाले लोग हैं।
  •  मैं कल रात को आपकी मनस्थिति को समझता था। आपकी आंखें बहुत कुछ कहती थीं। आपके चेहरे की उदासी मैं पढ़ पाता था। ज्यादा देर मैं आपके बीच नहीं रुका। कई रातों से आप सोए नहीं हैं। फिर भी मेरा मन करता था कि एक बार सुबह आपको फिर से बुलाऊं। आपसे बातें करूं। हम बड़ी सफलता के साथ आगे बढ़ते गए। अचानक सब कुछ नजर आना बंद हो गया है। मैंने भी उस पल को आपके साथ जिया है।
  •  आज चंद्रमा को छूने की हमारी इच्छाशक्ति और दृढ़ हुई है, संकल्प और प्रबल हुआ है।
  •  अगर अपनी शुरूआती चुनौतियों, दिक्कतों से हम हार जाते तो आज इसरो दुनिया की सफल स्पेस एजेंसियों में से एक भी स्थान नहीं ले पाता।
  •  खुद इसरो भी कभी हार न मानने वाली संस्कृति का जीता-जागता उदाहरण है।
  •  पूरे मिशन के दौरान देश अनेक बार आनंदित हुआ है, गर्व से भरा है। इस वक्त भी हमारा आॅर्बिटर पूरी शान से चंद्रमा के चक्कर लगा रहा है।
  •  आप मिशन में आई रुकावटों के कारण अपना दिल छोटा नहीं करें, क्योंकि नई सुबह जरूर होगी।
  •  हम अमृतत्व की संतान हैं। हमें सबक लेना है, सीखना है, आगे ही बढ़ते जाना है। आप सभी को आने वाले हर मिशन के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।
  •  विज्ञान परिणामों से कभी संतुष्ट नहीं होता है। विज्ञान की इनहेरेंट क्वॉलिटी है प्रयास, प्रयास और प्रयास। वो परिणाम में से नए प्रयास के अवसर ढूंढ़ता है।
  •  परिणामों से निराश हुए बिना निरंतर लक्ष्य की तरफ बढ़ने की हमारी परंपरा भी रही और हमारे संस्कार भी रहे हैं।


 
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