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बर्थडे स्पेशल: बॉलीवुड में रोमांटिक फिल्मों के जादूगर थे यश चोपड़ा, छह बार मिल चुका है राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

27/09/2019

सुरभि सिन्हा 
'रोमांस ऑफ किंग' के नाम से मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा बेशक आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी फिल्में आज भी लोगों के दिलों पर राज करती है। 27 सितम्बर 1932 को जन्में यश चोपड़ा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत आईएस जौहर के साथ बतौर सहायक शुरू की। उसके बाद यश चोपड़ा ने अपने भाई बीआर चोपड़ा के साथ काम किया। बतौर निर्देशक यश की पहली फिल्म 1959 में आई 'धूल का फूल' थी। यह फिल्म हिट रही इसके बाद यश ने कई फिल्मों का निर्देशन किया है। बॉलीवुड में यश चोपड़ा ही वह शख्स थे जिन्होंने अमिताभ बच्चन को फिल्म 'सिलसिला' में एक मैच्योर प्रेमी के रूप में पेश किया तो वहीं शाहरुख खान को राज बनाकर बॉलीवुड में 'किंग ऑफ रोमांस' का सरताज बनाया। उन्होंने फिल्म सिलसिला, चांदनी, लम्हे,  दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, डर आदि फिल्मों में रोमांस को अलग-अलग तरह से परिभाषित किया। 
साल 1973 में यश चोपड़ा ने फिल्मों के निर्देशन के साथ-साथ फिल्मों का निर्माण करना भी शुरू कर दिया जिनमें 'दाग:अ पोएम ऑफ लव', 'कभी-कभी', 'वीर जारा', 'हम-तुम', 'धूम', 'एक था टाइगर', 'जब तक है जान' आदि शामिल है। यश चोपड़ा बॉलीवुड के पहले ऐसे निर्माता है जिन्हें छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार बार सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने उन्हें 2001 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया और 2005 में भारतीय सिनेमा के प्रति उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। रोमांटिक फिल्मेंं बनाने वाले यश चोपड़ा ने 1970 में पॉमेला चोपड़ा अरेंज मैरेज की थी। उनके दो पुत्र आदित्य चोपड़ा (फिल्म निर्देशक) और उदय चोपड़ा (अभिनेता) है। डेंगू के कारण यश चोपड़ा का 21 अक्टूबर, 2012 में निधन हो गया था। यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म 2004 में 'जब तक है जान' थी। 
हिन्दुस्थान समाचार


 
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