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पुण्यतिथि: दिलों में जिंदा हैं संजीव कुमार

06/11/2019

सुरभि सिन्हा
दिवंगत फिल्म अभिनेता संजीव कुमार बेशक हमारे बीच नहीं है,लेकिन उन्होंने अपने सशक्त अभिनय की बदौलत फिल्म जगत में खास पहचान बनाई। 9 जुलाई 1938 को जन्मे संजीव कुमार का असल नाम हरीभाई जरीवाला था। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था। अपने इसी शौक को पूरा करने वह मुंबई पहुंच गए। संजीव कुमार ने फिल्मी कैरियर की शुरुआत 1960 में 'हम हिन्दुस्तानी' फिल्म में छोटी सी भूमिका से की मगर अपने दमदार अभिनय की वजह से सबका ध्यान आकर्षित किया। 

मुख्य अभिनेता के रूप में संजीव कुमार को वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म निशान में अभिनय करने का मौका मिला। फिल्म हम हिन्दुस्तानी के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली वह उसे स्वीकार करते चले गए। इस बीच उन्होंने स्मगलर, पति-पत्नी, हुस्न और इश्क, बादल, नौनिहाल और गुनहगार जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। साल 1968 में फिल्म शिकार में वह पुलिस ऑफिसर की भूमिका में दिखाई दिए। इस फिल्म में वह अपने अभिनय की छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला।

साल 1970 में  फिल्म खिलौना से संजीव कुमार को जबरदस्त कामयाबी मिली। इस फिल्म ने उन्हें स्टार बना दिया। इसी साल फिल्म दस्तक में संजीव कुमार को उनके अभिनय के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ। दो साल बाद फिल्म 'कोशिश' में दर्शकों को उनके अभिनय का नया आयाम देखने को मिला। इस फिल्म में संजीव कुमार ने गूंगे चरित्र का बेहतरीन निर्वहन किया। यह भूमिका किसी भी अभिनेता के लिए चुनौतीपूर्ण थी। फिल्म शोले (1975) में उनका ठाकुर का किरदार आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। संजीव कुमार की प्रमुख फिल्मों में सीता और गीता, पति पत्नी और वो, सिलसिला, श्रीमान श्रीमती, राही, प्रोफेसर की पड़ोसन आदि शामिल है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि बॉलीवुड का चमकता सितारा संजीव कुमार अपनी आखिरी फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' के रिलीज होने से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह गया। महज 47 साल की उम्र में 6 नवम्बर 1985 को हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। संजीव कुमार अभिनय प्रतिभा के ऐसे उदाहरण हैं जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाए।
हिन्दुस्थान समाचार


 
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