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दक्षिण और पूर्वोत्तर की कला संस्कृति का संगम बना ब्रह्मपुत्र पुष्कर महोत्सव

08/11/2019

आलोक

गुवाहाटी, 08 नवम्बर (हि.स.)। ब्रह्मपुत्र नद के किनारे राजधानी के सोनाराम खेल मैदान में आयोजित ब्रह्मपुत्र पुष्कर और सांस्कृतिक महोत्सव में धर्म और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। इसमें दक्षिण भारत समेत समूचे पूर्वोत्तर की कला और संस्कृति की झलक समाहित है।

गत पांच नवम्बर से आरंभ पुष्कर महोत्सव का समापन 16 नवम्बर को होगा। महोत्सव में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हैं। श्रद्धालु महोत्सव का आनंद लेने के साथ ब्रह्मपुत्र नद में स्नान कर पूर्वजों के नाम पर पिंडदान और पूजा अर्चना कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इस महोत्सव का आयोजन पूर्व तिरुपति श्री बालाजी कमेटी और महालक्ष्मी चैरिटेबल ट्रस्ट, चेन्नई के सहयोग से हुआ है। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने पांच नवम्बर को किया था। इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव समेत बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथियों ने हिस्सा लिया था। 

प्रतिदिन सुबह 0बजे से 11 बजे तक महोत्सव स्थल के पास ब्रह्मपुत्र नद के किनारे बनाए गए विशाल पूजा मंडप में होम और यज्ञ आदि अनुष्ठान सम्पन्न हो रहे हैं। बताया गया है कि महोत्सव के 12 दिनों में 12 यज्ञ आयोजित होंगे। महोत्सव में दक्षिण भारत के लोग अपनी-अपनी वेशभूषा, भाषा, संस्कृति और पूजा पद्धति के जरिए भगवान की आराधना कर रहे हैं।

साथ ही असम समेत पूर्वोत्तर की विभिन्न जाति-जनगोष्ठियों के लोग भी अपनी-अपनी वेशभूषा में महोत्सव में उपस्थित होकर अपनी पूजा पद्धति के अनुसार भगवान की वंदना कर रहे हैं। महोत्सव परिसर में प्रतिदिन शाम के समय धार्मिक परिचर्चा सत्र का आयोजन होता है। इसके अलावा असम समेत पूर्वोत्तर के विभिन्न लोक स्थानीय कला-संस्कृति से परिपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन भी हो रहा है।

प्रतिदिन शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत की संस्कृतियों का समागम हो रहा है। महोत्सव में हिस्सा लेने वाले लोगों के लिए बेहद अनुशासित तरीके से सामूहिक भोज की भी व्यवस्था जारी है।

उल्लेखनीय है कि पुष्कर महोत्सव के नियमों के अनुसार बृहस्पति ग्रह 12 राशियों में भ्रमण करता है। प्रत्येक वर्ष एक राशि में ठहरते हैं। इस बार बृहस्पति ग्रह धनु राशि में मौजूद है, जिसके कारण ब्रह्मपुत्र नद के किनारे महोत्सव का आयोजन हुआ है। इसके पहले राजस्थान, कर्नाटक आदि राज्यों में बहने वाली नदियों के किनारे पुष्कर महोत्सव आयोजित हो चुका है।

महोत्सव के आयोजकों ने बताया कि 12 वर्ष पहले असम के शिवसागर जिले में ब्रह्मपुत्र नद के किनारे पुष्कर महोत्सव का आयोजन हुआ था। हालांकि, इसका प्रसार इतने बड़े पैमाने पर नहीं हुआ था। इसके पश्चात एक बार फिर ब्रह्मपुत्र नद के किनारे पुष्कर महोत्सव के आयोजन का संयोग बना है।

ज्ञातव्य है कि गुरुवार को पुष्कर महोत्सव के मुख्य सभाकक्ष में पूर्वोत्तर के मिसिंग, राभा, बोडो, चाय बागान समेत विभिन्न जाति और जनजातियों के धर्मगुरु और सत्रों (मठ) सत्राधिकारों ने शाम को आयोजित धर्मसभा में हिस्सा लिया। केके हैंड्रिक संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य उमाकांत देव शर्मा धर्म सभा में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे।

महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर असम राज्य परिवहन निगम और पर्यटन विभाग में कई तरह के प्रबंध किए हैं। मुख्य रूप से श्रद्धालुओं के लिए गुवाहाटी समेत असम और पूर्वोत्तर के विभिन्न धर्मस्थल, मठ, मंदिर, पर्यटन स्थलों का दर्शन कराने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। परिवहन विभाग में गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर, नवग्रह मंदिर, उमानंद मंदिर, बालाजी मंदिर, डॉ भूपेन हजारिका समाधि स्थल, शंकरदेव कला क्षेत्र समेत विभिन्न मंदिर और पर्यटन स्थलों तक श्रद्धालुओं के लिए विशेष बसों का इंतजाम हुआ है।

श्रद्धालु 251 रुपये का टिकट खरीदकर गुवाहाटी के सभी प्रमुख पर्यटन स्थल और मंदिरों का दर्शन कर पाएंगे। इसके अलावा पर्यटन विभाग ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, पोबितरा अभायरण्य समेत अन्य पर्यटन स्थलों को देखने के लिए भी कई तरह की सुविधाएं की है। राज्य के पर्यटन विभाग में इसे अपने लिए बेहद स्वर्णिम अवसर बताया है। पर्यटन विभाग का मानना है कि ऐसे आयोजनों से असम के पर्यटन क्षेत्र को खासा लाभ मिलेगा।

 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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