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इस देश की ताकत हैं युवा

28/08/2019

इस देश की ताकत हैं युवा

युगवार्ता डेस्क

पिछली मोदी सरकार में गृह राज्यमंत्री रहे किरण रिजिजू का खेलों से पुराना नाता है। इस बार सरकार बनते ही इन्हें खेल एवं युवा मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई। स्कूली दिनों में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे किरण रिजिजू से तमाम मुद्दों पर सुभाष चंद्र ने बात की, पेश है बातचीत के प्रमुख अंश।

 क्या कारण है कि प्रधानमंत्री और आप भी फिटनेस को लेकर खूब बात करते हैं?
यदि किसी को जीवन में कोई काम करना है, तो उसे फिट रहना ही होगा। भारत की छवि योग गुरु की है, इसमें कोई दो राय नहीं है। प्रधानमंत्री जी के निजी तौर पर प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। लोग भारत की तरफ देख रहे हैं।

 क्या योग को खेल में लाया जाएगा?
इसके बारे में हमको विचार करना होगा। योगासन को अभी हम खेल इसलिए नहीं मानते हैं कि आधिकारिक रूप से हमने इसे स्वीकार नहीं किया है। जब खेल मंत्रालय से मान्यता मिल जाएगी, तो इसे खेल माना जाएगा। योगासन को खेल प्रतियोगिताओं में कैसे लाना है, उसकी रूपरेखा हम तैयार कर रहे हैं।

 एडवेंचर्स स्पोर्ट्स को सरकार कितना बढ़ावा दे रही है?
एडवेंचर्स स्पोर्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए सरकार काम करेगी। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि युवाओं में नया जोश भी पैदा होगा। हमारे देश में नदियां, तालाब और समुद्र का लंबा किनारा है। इसको देखते हुए स्कूबा डाइविंग में एक बड़ी संभावना है। आने वाले समय में हम स्कूबा और अन्य एडवेंचर स्पोर्ट्स के जरिए से लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने की कोशिश करेंगे।

 भारत-पाकिस्तान के वर्तमान हालात को देखते हुए डेविस कप को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं?
हमने पहले की कह दिया हुआ है कि भारत ओलंपिक चार्टर को मानता है और उस पर उसके हस्ताक्षर हैं। इसलिए भारत सरकार या राष्ट्रीय महासंघ यह फैसला नहीं कर सकते कि भारत को इसमें भाग लेना चाहिए या नहीं। अगर यह द्विपक्षीय खेल प्रतियोगिता होती तो फिर भारत को पाकिस्तान से खेलना चाहिए या नहीं, यह राजनीतिक फैसला बन जाता। लेकिन डेविस कप द्विपक्षीय प्रतियोगिता नहीं है और इसका आयोजन एक विश्व खेल संस्था करती है।

 हाल ही में आप खिलाड़ियों के आहार बजट में समानता लाए हैं। इससे एक सकारात्मक संदेश गया है।
पटियाला में (राष्ट्रीय खेल संस्थान) मेस में भोजन करते समय मैंने पाया कि सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों तथा साई प्रशिक्षकों का अलग-अलग आहार और प्रत्येक वर्ग के भोजन का बजट भिन्न है। यह मुझे सही नहीं लगा। असल में, किसी भी खिलाड़ी की सफलता में भोजन की भूमिका अहम होती है। मुझे बताया गया कि अब तक साई प्रशिक्षकों, जूनियर खिलाड़ियों और सीनियर खिलाड़ियों के लिए आहार बजट क्रमश: 250 रुपये, 480 रुपये और 690 रुपये था। एक खिलाड़ी का आहार इससे तय नहीं होना चाहिए कि वह किस स्तर पर खेल रहा है। इसलिए मैंने फैसला किया कि साई केंद्रों में अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों के आहार बजट में किसी तरह की भिन्नता नहीं होगी।

 भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन क्यों नहीं कर पाते हैं?
खेल मंत्री होने के नाते हमारा मुख्य ध्यान अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक में अधिक से अधिक भागीदारी और पदक सुनिश्चित करना है। हाल ही में मैंने संसद में भी कहा है कि टोक्यो ओलंपिक के लिए हमारी तैयारियां अच्छी चल रही हैं। हम प्रत्येक महासंघ के साथ समन्वय कर रहे हैं। मैं ओलंपिक में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए टॉप्स में शामिल खिलाड़ियों से भी बात कर रहा हूं।

 पहले केंद्रीय गृहराज्य मंत्री और इस सरकार में खेल एवं युवा मामले को देखना। कितना अंतर है दोनों में?
हमें काम करना है। देश के लिए काम करना है। जब आप बेहतरी के लिए काम करते हैं, तो विभाग महत्वपूर्ण नहीं होता है। जो जिम्मेदारी आपको दी गई है, वह सबसे खास होती है। जहां तक बात खेल मंत्रालय की, तो मैं कह दूं कि खेल एवं युवा मामले भी एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है, जो कि इस देश के युवाओं को प्रेरित कर सकता है। हमारे युवा इस देश की ताकत हैं।


 
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