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उनका स्टार्ट अप मेरा शट अप

13/11/2019

उनका स्टार्ट अप मेरा शट अप

राकेश कायस्थ

संदेसे आते हैं, हमें तड़पाते हैं… पूछे जाते हैं… लिखो कब आओगे। पूरा भारत आजकल उद्यमी हो गया है। बहुत अच्छी बात है। उद्यम बिना विज्ञापनों के संभव नहीं है। इसलिए सुबह से लेकर शाम तक मोबाइल पर संदेसे आते रहते हैं। इंश्योरेंस वाले पूछते हैं, कब आओगे… पैथ लैब वाले मैसेज भेजते हैं- सेहतमंद रहना है तो हमें याद रखिये। अस्पताल वालों का संदेश आता है- चिंता मत कीजिये, हम है ना। मुझे आजकल सबसे ज्यादा परेशान पड़ोस में खुले पैथ लैब वालों ने कर रखा है। हमारे डॉक्टर साहब उस लैब के ब्रांड अंबेसेडर हैं। एक बार सर्दी-जुकाम होने पर उनकी क्लीनिक में गया तो मेरा हाल पूछने से पहले उन्होंने लैब की तारीफ शुरू कर दी। फिर थोड़ा रुककर बोले-वैसे तो आपको जुकाम के साथ मामूली बुखार है। लेकिन यह पता करना जरूरी है कि कहीं कोई और इंफेक्शन तो नहीं है। सीवीसी सस्ती जांच है, मैने लिख दी है। जब सीवीसी करवा ही रहे हैं,तो लगे हाथों विटामिन बी और डी का लेबल भी जंचवा लीजियेगा। एक ही बार सैंपल लेंगे और सारा काम हो जाएगा। सैंपल यहां से निकलते वक्त दे जाइयेगा। रिपोर्ट वे मुझे ई-मेल कर देंगे। आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। जांच हो गई और रिपोर्ट आ गई। सबकुछ ठीक-ठाक था।

कॉरपोरेटाइजेशन के दौर में यह भी मुमकिन है कि कोई मैसेज भेजकर याद दिलाये कि आपके पिताजी के लिए हमने इतनी सूखी लकड़ियां दी थीं कि दो घंटे में ही निपट गये थे। अब आपका ही इंतजार है।

डॉक्टर साहब ने मुबारकबाद दी। उसके बाद से अब लैब वाले हर महीने कम से कम चार बार मैसेज भेजकर हाल-चाल पूछते हैं। वे पूछते हैं-कहीं आप डायबिटीज के शिकार तो नहीं हैं? अगर एचआईवी इनफेक्शन या हेपिटाइटिस हो, तब भी उससे अवगत होना चाहिए और सही जानकारी प्राप्त करने का एकमात्र तरीका पैथोलॉजिकल टेस्ट है। ऐसा लगता है कि कोई हसरत भरी निगाहों से मेरे बीमार होने का इंतजार कर रहा है। मैने अपना गुस्सा डॉक्टर साहब पर उतारा और तय कर लिया कि अब उनके यहां जाउंगा ही नहीं। लेकिन डॉक्टर और वकील एक बार गले पड़ जायें तो आसानी से पीछा नहीं छोड़ते। छह महीने बाद मैं फिर से बीमार पड़ा। इस बार मैने तय किया कि किसी दूसरे डॉक्टर के पास जाऊंगा। वे घर से कुछ दूर अपनी क्लीनिक चलाते थे। उन्होंने बहुत तसल्ली से मेरी जांच की और फिर पूछा- आखिरी बार आपका कंप्लीट पैथोलॉजिकल टेस्ट कब हुआ था? मैने जवाब दिया-सीवीसी और विटामिन बी और डी छह महीने पहले हुए थे। एकदम ठीक-ठाक थे। वे गंभीर हो गये, छह महीना तो लंबा समय होता है। आजकल शहरों में धूप भी नहीं मिलती। हो सकता है विटामिन डी कम हो गया हो। आपकी उम्र में तो किडनी और लिवर फंग्शन के साथ लिपिड प्रोफाइल भी होना चाहिए। हार्ट की समस्या भी आजकल बहुत आम है। इससे पहले मैं कोई जवाब दे पाता, अचानक उनका एक कपाउंडर सीरिंज लेकर पहुंच गया।

मालूम हुआ कि जिस पैथलैब के डर से मैं उनके पास आया था, वे अपनी क्लीनिक के साथ उसी का सैंपल कलेक्शन सेंटर खोल चुके हैं। रक्तदान और चार हजार के नगद नारायण का दान करके मैं बहुत भारी मन से घर लौटा। दो दिन बाद उनका भी खुशबरी वाला मैसेज आ गया- एवरी थिंग इज रुल्ड आउट। यानी सब एकदम चंगा है, चिंता की कोई बात नहीं। चिंता मुक्त करने वाले चप्पे-चप्पे पर हैं। इंश्योरेंस कंपनियां आजकल इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मैं कब मरूंगा। मेरी गलती सिर्फ इतनी है कि मैने किसी वेबसाइट पर जाकर लाइफ इंश्योरेंस की टर्म पॉलिसी के बारे में थोड़ी तहकीकात कर ली। उसका नतीजा यह है कि मेरी नींद ही किसी ऐसे फोन कॉल या एसएमएस से खुलती है, जिसमें यह बताया जाता है कि मौत के बाद अपने परिवार को किस तरह आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता हूं। मैने तमाम नंबर ब्लॉक कर दिये हैं। फिर भी ना जाने किन-किन नये नंबरों से फोन आते रहते हैं। गनीमत मार्केटिंग का ये ट्रेंड श्मशान तक नहीं पहुंचा है। कॉरपोरेटाइजेशन के दौर में यह भी मुमकिन है कि कोई मैसेज भेजकर याद दिलाये कि आपके पिताजी के लिए हमने इतनी सूखी लकड़ियां दी थीं कि दो घंटे में ही निपट गये थे। अब आपका ही इंतजार है। हर चमत्कार को नमस्कार करता हूं और हर स्टार्ट अप को दूर से प्रणाम करता हूं। नये धंधे शुरू कीजिये, खूब चलाइये लेकिन कृपया मेरे पास स्कीम लेकर मत आइये।


 
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