योगिता पाठक
नई दिल्ली, 30 अप्रैल (हि.स.)। कोरोना संक्रमण के लगातार बेकाबू होने की वजह से नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शेड्यूल्ड अंतराष्ट्रीय उड़ानों पर जारी प्रतिबंध को 31 मई के लिए आगे बढ़ा दिया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानों और डीजीसीए से पहले से अनुमति प्राप्त उड़ानों पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होगा। 

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की ओर से जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि शेड्यूल्ड उड़ानों पर ये रोक जरूर लगाई गई है, लेकिन कार्गो सेवा पहले की तरह ही जारी रहेगी। इसके अलावा वंदे भारत मिशन और ट्रैवल बबल वाली सभी शेड्यूल्ड फ्लाइट पहले की तरह उड़ान भरती रहेंगी। इस नोटिफिकेशन में ये भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर सरकारी एजेंसियों की मंजूरी के बाद कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों को अनुमति दी जा सकती है। 

उल्लेखनीय है कि कोरोना के संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले साल 23 मार्च को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था। 25 मई से घरेलू उड़ानें फिर से शुरू हो गई थीं लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अभी तक पूरी तरह से नहीं खोला गया है। इस दौरान विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए वंदे भारत मिशन के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बायो बबल के तहत भी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू उड़ानों में 31 मई तक किराया बढ़ाने पर भी रोक लगा दी है। कोरोना की वजह से पिछले साल से ही हवाई किराए की सीमा पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इससे पहले फरवरी में भी मंत्रालय ने इसी आशय का आदेश जारी किया था। 

कोरोना के संक्रमण पर काबू पाने के लिए पहली बार लगाए गए लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च, 2020 से ही सभी उड़ानों पर रोक लगा दी गई थी। बाद में 25 मई से घरेलू उड़ानों को कुछ शर्तों के साथ धीरे-धीरे खोलना शुरू किया गया। 

रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक इस साल अप्रैल में एयर पैसेंजर ट्रैफिक की ग्रोथ में 15 से 17 फीसदी की गिरावट आ सकती है। मई 2020 के बाद से घरेलू पैसेंजर का ट्रैफिक फरवरी में 64 फीसदी पर पहुंच गया था। मार्च 2021 में रोजाना औसतन 2.49 लाख यात्रियों ने उड़ान सेवा का इस्तेमाल किया है। हालांकि 6 से 11 अप्रैल के दौरान मार्च की तुलना में इसमें 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। माना जा रहा है कि अप्रैल के पूरे महीने मुसाफिरों की संख्या में इसी तरह की गिरावट बनी रही है। 

हिन्दुस्थान समाचार
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