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कैट ने सरकार से मांगा जवाब, क्‍या करेंसी नोट से फैलता है कोरोना वायरस

08/09/2020

प्रजेश शंकर

नई दिल्‍ली, 08 सितम्‍बर (हि.स.)। देश और दुनिया में कोविड-19 की महामारी से करोड़ों लोग प्रभावित हैं। कोरोना वायरस का संक्रमण सभी सावधानियों के बावजूद एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक तेजी से फैल रहा है। ऐेसे में कारोबारियों के संगठन कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को मंगलवार को एक पत्र भेजकर जानना चाहा है कि क्‍या करेंसी नोट कोविड-19 संक्रमण के वाहक हैं। 

कैट का कहना है कि करेंसी नोट जो एक हाथ से दूसरे हाथ तक जाता है, उससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। कोरोना काल में डिजिटल लेनदेन की प्रवृत्ति बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग लेनदेन नकदी नोट में करते है। खासकर इससे सबसे ज्यादा खतरा व्यापारियों को है। इसको देखते हुए कारोबारियों के संगठन कैट ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से इसके बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। क्या वाकई करेंसी नोट संक्रमण फैलता है। 

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने खंडेलवाल ने साल 2015 में किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय, लखनऊ की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि नोटों और सिक्कों के जरिये वायरस, फंगस और बैक्टीरिया फैलता है। वहीं, साल 2016 में तमिलनाडु में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 86.4 फीसदी करेंसी नोट कई बीमारियों को फैला रहे है। इन नोटों को डॉक्टरों, बैंकों, बाज़ारों, कसाईखानों, छात्रों और गृहणियों से कलेक्ट किया गया था। इसके अलावा साल 2016 में एक अन्य अध्ययन जिसे  कर्नाटक में किया गया, जिसमें पाया गया कि 100,50,20 और 10 रुपये के 100 नोटो में से 58 नोट संक्रमित थे। 

खंडेलवाल ने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की रिपोर्ट्स ये बता रही है कि पेपर नोट से संक्रमण फैलता है। उन्‍होंने कहा कि संक्रामक रोगों को फैलाने में सक्षम करेंसी नोटों का मुद्दा कुछ वर्षों से देशभर के व्यापारियों के लिए बेहद चिंता का कारण बना हुआ है। वर्तमान कोविड महामारी में देशभर के व्यापारियों में इस विषय को लेकर बेहद चिंता है,   क्योंकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय रिपोर्टों में इस बात की पुष्टि की गई है की करेंसी नोट संक्रामक रोगों के वाहक है। उन्होंने कहा कि  कोरोना वायरस बूंदों के माध्यम से फैलता है और सूखी सतह वाले किसी भी सामान के जरिए मनुष्यों तक जा सकता है। इसलिए सूखी सतह वाले करेंसी नोटों के जरिए कोविड-19 का वायरस के फैलने की संभावनाओं को लेकर देशभर के व्यापारी चिंतित हैं। क्योंकि करेंसी नोटों का लेन-देन देशभर में व्यापारियों के बीच अधिक होता है और व्यापारी अथवा ग्राहक दोनों पर वायरस का असर हो सकता है। 

कैट महामंत्री ने डॉ. हर्षवर्धन से आग्रह किया है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को तुरंत प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और सरकार ये सपष्ट करे की करेंसी नोटों के माध्यम से कोविड-19 सहित अन्य वायरस और बैक्टीरिया फैलते हैं अथवा नहीं। ताकि  लोग नोटों के जरिए फैलने वाले वायरस से अपना बचाव कर सकें। गौरतलब है कि आरबीआई के आंकड़ो के मुताबिक मार्च 2019 तक 21,10,892 लाख करोड़ रुपये बैंक नोट सर्कुलेशन में था, जो मार्च 2020 तक बढ़कर 24,20,975 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंचा है। एक साल में करीब 15 फीसदी का उछाल है, जबकि मार्च 2018 तक 18,03,709 लाख करोड़ रुपये की करेंसी नोट सर्कुलेशन में था। 

हिन्‍दुस्‍थान समाचार 


 
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