व्यापार

Blog single photo

कैट ने प्रधानमंत्री मोदी से व्यापारियों को आर्थिक पैकेज देने हेतु हस्तक्षेप का किया आग्रह

20/05/2020

प्रजेश शंकर

नई दिल्‍ली,  20 मई (हि.स.)। कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश में व्‍यापारी समुदाय के वित्तीय संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए एक पत्र में आर्थिक पैकेज देने हेतु उनके शीघ्र हस्तक्षेप का आग्रह किया है। कैट ने कहा कि ‘हम अफसोस के साथ बताना चाह रहे हैं कि सबसे बड़े और सबसे प्रतिबद्ध वर्ग में कार्यरत 7 करोड़ व्यापारियों को आर्थिक पैकेज की व्यापक घोषणाओं में शामिल नहीं किया गया है।' 

प्रधानमंत्री को भेजे पत्र के बारे में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि देशभर के व्यापारियों का ये मानना है कि यह एक अनजानी चूक है और जानबूझकर की गई उपेक्षा नहीं है। क्योंकि पूरे देश में व्यापारियों को पता है कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार घरेलू व्यापार की महत्वतता को सदैव रेखांकित करते रहे हैं। प्रधानमंत्री का ‘लोकल पर वोकल’ उसी अवधारणा को प्रतिबिंबित करता है। 

कैट ने प्रधानमंत्री को स्मरण कराया कि देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने में देश के व्यापारियों ने जी जान से प्रयास किया है जिन्होंने अक्सर अपने स्वयं के जीवन को खतरे में डालते हुए लॉकडाउन अवधि के दौरान सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति को जारी रखा और प्रधानमंत्री ने स्वयं व्यापारियों की इस भूमिका के बारे में 15 दिन पूर्व अपने तीन ट्वीट के जरिए प्रशंसा भी की है। उन्होंने आगे कहा कि कैट और भारत के व्यापारी सरकार की हर प्रगतिशील नीति जिसमें जीएसटी कार्यान्वयन, डिजिटल भुगतान, प्लास्टिक और नोटबंदी पर प्रतिबंध आदि पर सदैव क्रियाशील रहे हैं। 

खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के एक ऑफिस मेमोरेंडम ‘परिपत्र के द्वारा एनआईसी कोड 46, 47 से व्यापारियों को एमएसएमई से बाहर कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने एमएसएमई की परिभाषा के तहत सेवा क्षेत्र को शामिल करना व्यापारियों को ऐसे पैकेज देने के लिए सरकार की मंशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कैट महामंत्री ने कहा कि चूंकि, सरकार व्यापारियों को सेवा क्षेत्र का हिस्सा तो मानती है,  लेकिन किसी भी स्पष्टीकरण के अभाव में इसका कोई लाभ व्यापारियों को नहीं मिलेगा।

खंडेलवाल ने आर्थिक पैकेज में व्यापारियों को न शामिल किये जाने पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा की देश के लगभग 45 फीसदी व्यापारी ग्रामीण और अर्ध ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं और उन्हें 'सीमांत व्यापारी' कहा जा सकता है, जबकि 55 फीसदी अन्य व्यापारी शहरी क्षेत्रों में अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं जो बहुत ही विषम वित्तीय परिस्थियों से ग्रस्त हैं।

कैट महामंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राहत पैकेज में व्यापारियों के एक विशिष्ट पैकेज देने का आग्रह करते हुए कहा कि लॉकडाउन की अवधि में व्यापारियों को कर्मचारियों को वेतन के भुगतान जैसे विभिन्न वित्तीय दायित्वों को पूरा करना होगा, जीएसटी का भुगतान, आयकर और अन्य सरकारी भुगतान, ईएमआई , व्यापारियों द्वारा लिए गए कर्ज और अन्य आकस्मिक खर्चों पर बैंक ब्याज सहित अन्य अनेक वित्तीय दायित्व पूरे करने बोझ भी है। वहीँ, दूसरी ओर  व्यापारिक लेन-देन में व्यापारियों द्वारा दिए गए उधार माल की राशि बाजारों के खुलने के दिन से 45-60 दिनों के अंदर वापस करने की शुरुआत होने की सम्भावना है।  

हिन्‍दुस्‍थान समाचार


 
Top