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अखाड़े की शूरवीर विनेश फोगाट

01/10/2019

अखाड़े की शूरवीर विनेश फोगाट

मोहम्मद शहजाद

विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में विनेश फोगाट ने कांस्य पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक, 2020 के लिए क्वालीफाई कर लिया है। विनेश के अब तक के कॅरियर को देखते हुए उनसे ओलंपिक में पदक की आस बन रही है।

खेल में हार-जीत तो लगी रहती है, लेकिन हारी हुई बाजी जीतने वाला ही असल बाजीगर कहलाता है। इस मामले में विनेश फोगाट का जवाब नहीं है। उन्होंने कजाखिस्तान के नूर-सुल्तान में आयोजित विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में न केवल कांस्य पदक जीता, बल्कि अगले बरस होने वाले टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह भी पक्की कर ली। विनेश फोगाट ने इस रेसलिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप में अपने अभियान का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया। उन्होंने 53 किलोग्राम भारवर्ग के क्वालिफिकेशन राउंड में रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता स्वीडन की सोफिया मैटसन जैसी भारी-भरकम खिलाड़ी को 13-0 के बड़े अंतर से शिकस्त दी। इसके बावजूद वह प्री-क्वार्टरफाइनल में जापान की मायु मुकाइदा से 0-7 के फर्क से हारकर इस टूर्नामेंट से लगभग बाहर हो गई थीं।
अलबत्ता जापानी पहलवान से हार के बावजूद मुकाइदा के फाइनल में पहुंचने से उन्हें रेपचेज राउंड के जरिए पदक जीतने का मौका नसीब हो गया। गौरतलब है कि कुश्ती के मुकाबलों में रेपचेज एक ऐसा फॉर्मेट है, जो शुरुआती दौर में हारने वाली पहलवानों को फिर से वापसी करने और अपना दम-खम दिखाने का मौका देता है। इसके तहत फाइनल में पहुंचने वाले दो पहलवानों ने अपने जिन प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को नॉक आउट दौर में हराया हो, उन्हें रेपचेज द्वारा कांस्य पदक जीतने का एक और अवसर दिया जाता है। किस्मत से मिले इस अवसर को वह भुनाने में सफल रहीं और भारत की झोली में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप का कांस्य पदक डाल दिया। वह इसमें सोने का तमगा भले ही हासिल नहीं कर सकीं लेकिन उनके कांस्य पदक जीतने की उपलब्धि की चमक कतई फीकी नहीं है।
इसकी वजह यह है कि उन्होंने पहले रियो ओलंपिक की ब्रांज मेडलिस्ट मैटसन को बड़े फर्क से हराया। फिर प्री-क्वार्टरफाइनल राउंड में वह मुकाइदा से भले ही मात खा गईं, लेकिन इसके लिए जापानी पहलवान को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उसके बाद रेपचेज राउंड में तो वह हर खिलाड़ी पर भारी पड़ीं। इसके पहले राउंड में उन्होंने यूक्रेन की यूलिया के. ब्लाहिन्या को 5-0 से चित किया। फिर दूसरे राउंड में उन्होंने वर्ल्ड चैम्पियनशिप की रजत पदक विजेता अमेरिकी खिलाड़ी सारा एन. हिल्डेब्रांट को 8-2 से हराया। इस दौरान सारा ने भारतीय पहलवान के दाएं पैर को कम से कम पांच बार पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन मुकाबले के ऐन वक्त रिंग में कोच की रणनीति में परिवर्तन कर विनेश ने उन्हें इसका फायदा नहीं उठाने दिया। सारा पर इस जीत के साथ ही विनेश ने टोक्यो ओलंपिक-2020 में अपना कोटा पक्का कर लिया। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय पहलवान बन गई हैं।
यही नहीं लगातार दो बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली वह पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। रेपचेज के तीसरे और निर्णायक मुकाबले में उन्होंने यूनान की खिलाड़ी मारिया प्रेवोलाराकी 4-1 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। ओलंपिक कोटे के बाद यह पदक हासिल करना सोने पर सुहागा जैसा रहा। विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में कोई पदक जीतने वाली वह पांचवी भारतीय महिला पहलवान है। उनके अलावा अलका तोमर, गीता फोगाट, बबीता फोगाट और पूजा ढांडा यह कारनामा अंजाम दे चुकी हैं। बताते चलें कि गिरना, गिरकर संभलना और फिर उठ खड़े होना विनेश फोगाट की फितरत रही है। यही वजह है कि उन्होंने इस साल जितनी भी प्रतिस्धार्ओं में हिस्सा लिया, उनमें कोई न कोई पदक जरूर हासिल किया है।
रियो ओलंपिक-2016 में घुटने की चोट के बाद उनका करियर समाप्त माना जा रहा था लेकिन जिस तरह उन्होंने रिंग में वापसी की, वह अपने आप में एक मिसाल है। उनकी इसी खासियत के चलते उन्हें प्रतिष्ठित लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड के लिए नामांकित किया गया। हालांकि मशहूर गोल्फर टाइगर वुड्स इसमें विजयी रहे, लेकिन इसमें पहली भारतीय एथलीट के तौर पर अपना नाम दर्ज कराकर उन्होंने नई तारीख रची। विनेश ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल-2014, गोल्ड कोस्ट-2018 राष्ट्रमंडल खेल और जकार्ता एशियाई खेल2018 की स्वर्ण पदक विजेता भी रही हैं। फिर उन्होंने जिस तरह एशियन चैम्पियनशिप, स्पेन ग्रांड प्रिक्स और मेदवेद इंटरनेशनल जैसे तीन रैंकिंग वाले टूर्नामेंट में तमगे जीते हैं, उससे ओलंपिक में भी पदक की आस तो बनती ही है।


 
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