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भारतीय वायुसेना को ताकतवर बनाएगा 'अपाचे'

01/08/2019

योगेश कुमार गोयल
दुनिया की चंद ताकतवर वायुसेनाओं में शुमार भारतीय वायुसेना की ताकत उस समय और बढ़ गई, जब 27 जुलाई को उसे अमेरिकी एयरोस्पेस कम्पनी 'बोइंग' द्वारा चार एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टरों की पहली खेप मिल गई। साथ ही चार और अपाचे हेलीकॉप्टर जल्द ही मिलने की संभावना है। कुछ ही माह पहले बोइंग कम्पनी द्वारा एक अपाचे हेलीकॉप्टर पहले ही भारत को सौंपा जा चुका है। इस तरह भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल 9 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर हो जाएंगे। आने वाले समय में कई और अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति भारतीय वायुसेना को होनी है। ये हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण इसलिए माने जा रहे हैं क्योंकि इन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक हेलीकॉप्टरों के रूप में जाना जाता है। यही वजह है कि इन हेलीकॉप्टरों के भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने से हमारी वायुसेना की ताकत बढ़ गई है। बोइंग कम्पनी अब तक विश्वभर में 2200 से भी अधिक अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति कर चुकी है। भारत दुनिया का 14वां ऐसा देश है, जिसने अपनी सेनाओं के लिए इस हेलीकॉप्टर का चयन किया है। फिलहाल अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, मिस्र इत्यादि देशों की वायुसेनाएं इसका इस्तेमाल कर रही हैं। बोइंग एएच-64 ई अपाचे को दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक हेलीकॉप्टर माना जाता है। यह 'लादेन किलर' के नाम से भी विख्यात है। यह अमेरिकी सेना तथा कई अन्य अंतरराष्ट्रीय रक्षा सेनाओं का सबसे एडवांस मल्टी रोल कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है, जो एक साथ कई कार्यों को अंजाम दे सकता है। अमेरिका, इजरायल, मिस्र तथा नीदरलैंड के अलावा कुछ अन्य देशों की सेनाएं भी इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही हैं। इसलिए इन हेलीकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल करना वायुसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 
भारतीय वायुसेना का मानना है कि अपाचे बेड़े के जुड़ने से बल की लड़ाकू क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी क्योंकि इन हेलीकॉप्टरों में भविष्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर बदलाव किए गए हैं। दरअसल भारतीय वायुसेना की जरूरत के मुताबिक ही अपाचे हेलीकॉप्टर में अपेक्षित बदलाव किए गए हैं। वायुसेना का कहना है कि भविष्य में थलसेना के साथ किसी भी तरह के साझा ऑपरेशन में अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर बड़ा फर्क पैदा करेंगे। ढाई अरब डॉलर अर्थात् करीब साढ़े सत्रह हजार करोड़ रुपये का यह हेलीकॉप्टर सौदा करीब चार साल पहले हुआ था, जब सितम्बर 2015 में भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए सौदा किया था। रक्षा मंत्रालय द्वारा 2017 में भी 4168 करोड़ रुपये की लागत से बोइंग से हथियार प्रणालियों सहित छह और अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी गई थी। अपाचे एक ऐसा अग्रणी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है। अमेरिका का अपाचे हेलीकॉप्टर पहली बार वर्ष 1975 में आकाश में उड़ान भरता नजर आया था। वर्ष 1986 में इसे पहली बार अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था। अमेरिका ने इसी अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर का पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ दुश्मनों को धूल चटाने के लिए इस्तेमाल किया था। इसके अलावा इजरायल भी लेबनान तथा गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों के लिए अपाचे का इस्तेमाल करता रहा है।
अपाचे की ढेरों विशेषताएं ही इसे भारतीय वायुसेना को नई ताकत प्रदान करने के लिए पर्याप्त हैं। इसमें सटीक मार करने और जमीन से उत्पन्न खतरों के बीच प्रतिकूल हवाईक्षेत्र में परिचालित होने की अद्भुत क्षमता है। अपाचे आसानी से दुश्मन की किलेबंदी को भेदकर उसके इलाके में घुसकर बहुत सटीक हमले करने में सक्षम है। इससे पीओके में आतंकी ठिकानों को तबाह करने में भारतीय सेना को मदद मिलेगी। 365 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर तेज गति के कारण बड़ी आसानी से दुश्मनों के टैंकरों के परखच्चे उड़ा सकता है। इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। यह बगैर पहचान में आए चलते-फिरते या रूके हुए लक्ष्यों को आसानी से भांप सकता है। इतना ही नहीं, सिर्फ एक मिनट के भीतर यह 128 लक्ष्यों से होने वाले खतरों को भांपकर उन्हें प्राथमिकता के साथ बता देता है। इसे इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है। यह किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है। यह नाइट विजन सिस्टम की मदद से रात में भी दुश्मनों की टोह लेने, हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट दागने और मिसाइल आदि ढोने में सक्षम है। टारगेट को लोकेट, ट्रैक और अटैक करने के लिए इसमें लेजर, इंफ्रारेड, सिर्फ टारगेट को ही देखने, पायलट के लिए नाइट विजन सेंसर सहित कई आधुनिक तकनीकें समाहित की गई हैं। यह एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है। इसकी फ्लाइंग रेंज करीब 550 किलोमीटर है। इसमें अत्याधुनिक रडार तथा निशाना साधने वाला सिस्टम लगा है।
दो जनरल इलैक्ट्रिक टी-700 हाई परफॉरमेंस टर्बोशाफ्ट इंजनों से लैस इस हेलीकॉप्टर में आगे की तरफ एक सेंसर फिट है, जिसके चलते यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसका सबसे खतरनाक हथियार है 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता। इसमें हेलिफायर, स्ट्रिंगर मिसाइलें, 70 एमएम रॉकेट्स लगे हैं। मिसाइलों के पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है। इसके वैकल्पिक स्टिंगर या साइडवाइंडर मिसाइल इसे हवा से हवा में हमला करने में सक्षम बनाते हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर के नीचे दोनों तरफ 30 एमएम की दो ऑटोमैटिक राइफलें भी लगी हैं, जिनमें एक बार में शक्तिशाली विस्फोटकों वाली 30 एमएम की 1200 गोलियां भरी जा सकती हैं। इसका सबसे क्रांतिकारी फीचर है इसका हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटीग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम, जिनकी मदद से पायलट हेलिकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक एम-230 चेन गन से अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है। 17.73 मीटर लंबे, 4.64 मीटर ऊंचे तथा करीब 5165 किलोग्राम वजनी इस हेलीकॉप्टर में दो पायलटों के बैठने की व्यवस्था है। इसका अधिकतम भार 10400 किलोग्राम हो सकता है। डेटा नेटवर्किंग के जरिये युद्धक्षेत्र की तस्वीरें प्राप्त करने और भेजने की इसकी क्षमता इसकी खूबियों को और भी घातक बना देती है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)


 
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