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बिग बी को बिग सम्मान

22/10/2019

बिग बी को बिग सम्मान


भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादा साहब फाल्के के नाम पर दिया जाने वाला सम्मान सदी के महानायक को मिलने का जैसे लोग इंतजार कर रहे थे। इस बात को स्वयं सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के ट्वीट से समझा जा सकता है- ‘‘दो पीढ़ियों का मनोरंजन तथा उन्हें प्रेरित करने वाले कलाकार अमिताभ बच्चन को सर्वसम्मति से दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है, पूरा देश एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रसन्न है, उन्हें मेरी ओर से हार्दिक बधाई।’’ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के ‘फिल्म महोत्सव निदेशालय’ द्वारा यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा और उसके विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को वर्ष 1969 से नियमित प्रदान किया जा रहा है। 10 लाख रुपये नकद, स्वर्ण कमल पदक एवं अंग वस्त्र के साथ पहले यह प्रतिष्ठित सम्मान विनोद खन्ना, मनोज कुमार, पृथ्वीराज कपूर, बी आर चोपड़ा, श्याम बेनेगल, देवानंद, शशि कपूर, लता मंगेशकर, मन्ना डे, गुलजार और प्राण सहित कई नामी कलाकारों को भी दिया जा चुका है।

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अनिल कपूर ने मेगास्टर अमिताभ बच्चन के बारे में सही कहा है कि इस लेजेंड के बिना भारतीय सिनेमा का उल्लेख नहीं हो सकता क्योंकि उन्होंने अपनी हर भूमिका के साथ सिनेमा को परिभाषित किया है।

चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित, अमिताभ बच्चन ऐसी शख्सियत हैं, जिनके न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में करोड़ों चाहने वाले हैं। 1970 के दशक से शुरू हुआ अमिताभ का स्टारडम भारतीय सिनेमा में अभी तक जारी है। सिनेमा में 50 वर्ष पूरे कर चुके 77 वर्षीय अमिताभ ऐसे दमदार अभिनेता हैं, जिनकी फिल्मों का दर्शकों को आज भी बेसब्री से इंतजार रहता है। यह भी दिलचस्प है कि जिस दादा साहब फाल्के पुरस्कार के स्थापना वर्ष 1969 में ही उन्होंने ‘सात हिन्दुस्तानी’ फिल्म के जरिये बॉलीवुड में कदम रखा था। ‘जंजीर’ फिल्म से उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला, जिसके बाद उन्होंने बॉलीवुड को कई दर्जन सुपरहिट फिल्में दी हैं। 1970 के दशक में जंजीर, दीवार, शोले जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने युवा पीढ़ी के गुस्से को ऐसी अभिव्यक्ति दी कि उन्हें हिन्दी सिनेमा का ‘एंग्री यंग मैन’कहा जाने लगा। यह ‘एंग्री यंग मैन’ आज पांच दशक के सिने कैरियर में फिल्मों के अलावा छोटे पर्दे पर भी सक्रिय हैं। इन दिनों उनका रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’लोगों का बेहद पसंदीदा बन गया है।

भारतीय सिनेमा के जनक

दादा साहब फाल्के एक फिल्म निर्देशक ही नहीं, जाने-माने निर्माता और स्क्रीन राइटर भी थे। 30 अप्रैल 1870 को नासिक के एक संस्कृत विद्वान के घर जन्मे धुन्धी राज गोविन्द फाल्के की पहली फिल्म थी ‘राजा हरिश्चन्द्र’ जिसे पहली फुल लेंथ भारतीय फीचर फिल्म होने का दर्जा हासिल है। 3 मई 1913 को रिलीज हुई वह फिल्म काफी लोकप्रिय हुई। दादा साहब की इस फिल्म का बजट 15 हजार रुपये था। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने एक के बाद एक दो दशक में ही 100 से भी ज्यादा फिल्मों का निर्माण किया। इनमें 95 फीचर फिल्में और 27 लघु फिल्में शामिल थीं। ‘द लाइफ आॅफ क्रिस्ट’ को उनके कैरियर का टर्निंग प्वाइंट माना जाता है। दादा साहब फाल्के कहा करते थे कि फिल्में मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्द्धन के लिए भी बेहतरीन माध्यम हैं। फिल्मों की पटकथा, लेखन, चित्रांकन, कला निर्देशन, सम्पादन, प्रोसेसिंग, डवलपिंग, ंिप्रटिंग इत्यादि सभी काम वे स्वयं देखते थे। उन्होंने अपनी कुछ फिल्मों में महिलाओं को भी कार्य करने का अवसर दिया। उनकी एक फिल्म ‘भस्मासुर मोहिनी’ में दुर्गा और कमला नामक दो अभिनेत्रियों ने कार्य किया था। दादा साहब की आखिरी फिल्म ‘सेतुबंधन’ थी। 16 फरवरी 1944 को यह महान शख्सियत दुनिया को अलविदा कहते हुए अनंत शून्य में विलीन हो गई। भारत सरकार ने उनके जन्म शताब्दी वर्ष 1969 में ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ की स्थापना की।

उनकी आने वाली फिल्मों में गुलाबो सिताबो, झुंड, चेहरे, ब्रह्मास्त्र, बटरμलाई, तेरा यार हूं मैं इत्यादि शामिल हैं। उनकी दक्षिण भारतीय फिल्म ‘साय रा नरसिम्हा रेड्डी’ गांधी जयंती पर रिलीज हो रही है, जिसमें वे एक ऋषि का किरदार निभाते नजर आएंगे। 1969 में जब दादा साहब फाल्के पुरस्कार की स्थापना हुई थी, तब उस जमाने की विख्यात अभिनेत्री व फिल्म निर्मात्री देविका रानी को यह पुरस्कार पाने का गौरव हासिल हुआ था। भारतीय फिल्मोद्योग में दिया जाने वाला यह सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वोच्च पुरस्कार है, जो प्रतिवर्ष इंडस्ट्री के तमाम फिल्मकारों, निर्देशकों और कलाकारों की आजीवन उपलब्धियों का समग्र मूल्यांकन करने के पश्चात भारतीय सिनेमा के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले को प्रदान किया जाता है।




 
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