युगवार्ता

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ब्रू शरणार्थियों की वापसी पर संकट

28/10/2019

ब्रू शरणार्थियों की वापसी पर संकट

अरविंद कुमार राय

पहले भी शरणार्थियों की वापसी को लेकर कई बार कोशिशें हुई। लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से यह कोशिश विफल होती रही है।

केंद्र सरकार की पहल पर 20 वर्ष से अधिक समय से मिजोरम से पलायन कर शरणार्थी के रूप में त्रिपुरा में रहने वाले ब्रू (रियांग) शरणार्थियों के मिजोरम वापसी का सिलसिला शुरू हुआ ही था कि अचानक ब्रू नेताओं ने मिजोरम सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए त्रिपुरा से मिजोरम लौटने से इंकार कर दिया है। त्रिपुरा सरकार शरणार्थियों का बोझ लंबे समय से उठा रही है। उल्लेखनीय है कि 1998 में एक फॉरेस्ट अधिकारी की नृशंस हत्या के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर ब्रू जनजाति पर हमले हुए।
जान बचाने के लिए ब्रू जनजाति के लोग पड़ोसी राज्य त्रिपुरा में शरण लेने को मजबूर हुए। वर्तमान में त्रिपुरा के उत्तर त्रिपुरा जिले के कंचनपुर सबडिवीजन में 3 (नाइसिंगपड़ा, आशापाड़ा और हेजाछोड़ा) तथा पानीसागर सबडिवीजन में 3 (कासमाऊ, खाकचांग और हमलापाड़ा) शरणार्थी शिविरों में मिजोरम के ब्रू शरणार्थियों के कुल 6099 परिवारों के 36660 लोग शरण लिए हुए हैं। उत्तर त्रिपुरा जिले के जिलाधिकारी रेवेल हेमेंद्र कुमार ने बताया है कि मिजोरम सरकार के अधिकारियों ने छह शरणार्थी शिविरों की पैमाइश कर 4707 परिवारों के 28317 लोगों को अपने राज्य के नागरिक के रूप में चिह्नित कर लिया है।
जबकि 1392 परिवारों के 8343 लोगों की अभी भी शिनाख्त की प्रक्रिया अधर में है। उन्होंने बताया है कि मिजोरम सरकार की अपील पर शिनाख्त हुए मिजोरम के ब्रू शरणार्थियों को आधार कार्ड और बैंक अकाउंट हमने खुलाने की प्रक्रिया शुरू की है। लगभग 95 फीसद ब्रू शरणार्थियों को आधार कार्ड जारी करने के साथ ही उनका बैंक अकाउंट खोला गया है। जिलाधिकारी ने बताया है कि कंचनपुर के तीन शरणार्थी शिविरों के 4854 परिवारों के 28901 और पानीसागर के तीनों शिविरों के 988 परिवारों के 6207 शरणार्थियों की शिनाख्त हो चुकी है। इस तरह छह शिविरों के 26092 लोगों को आधार कार्ड जारी किया गया है। जबकि अभी भी 1082 लोगों को आधार कार्ड जारी करना शेष है। वहीं कंचनपुर सबडिविजन के 4854 परिवारों के 2355 लोगों का बैंक अकाउंट खोला गया है।
जबकि पानीसागर सबडिविजन के 1203 परिवारों के 729 लोगों का बैंक अकाउंट खोला गया है। इस तरह कुल 3084 लोगों का बैंक अकाउंट खोला गया है। लंबे समय तक केंद्र में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी हो या फिर त्रिपुरा की तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार शरणार्थियों की समस्याओं को लेकर कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार नहीं दिखीं। हालांकि, केंद्र सरकार की पहल पर शरणार्थी शिविरों में राशन की व्यवस्था जरूर की गई। 20 वर्षों से अधिक समय में शरणार्थी शिविरों में रहने के कारण ब्रू जनजाति की 2 पीढ़ियां न केवल सामाजिक अधिकारों से वंचित रहीं बल्कि उन्हें शिक्षा और चिकित्सा जैसे मूलभूत अधिकार भी नहीं मिले। सवाल उठता है कि इससे इस जनजाति को किसने और क्यों वंचित किया। मिजोरम ईसाई बहुल राज्य है।
यहां पर चर्च की राजनीति से लेकर सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप है। यही कारण है कि चर्च नहीं चाहता की ब्रू जनजातियों को राजनीतिक अधिकार मिले। क्योंकि उन्हें राजनीतिक अधिकार मिल गए तो चर्च की सत्ता को चुनौती मिलने लगेगी। ज्ञात हो कि नरेंद्र मोदी सरकार ने ब्रू शरणार्थियों को मिजोरम में बसाने, उनको उनका अधिकार देने के लिए काफी समय से काम कर रही थी। केंद्र के प्रयास से त्रिपुरा व मिजोरम सरकार और ब्रू नेताओं के बीच शरणार्थियों की वापसी के समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान त्रिपुरा सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि 30 सितम्बर, 2019 के बाद शरणार्थी शिविरों में सरकार राशन मुहैया नहीं कराएगी। समझौते के तहत गत 3 अक्टूबर को 46 परिवारों के कुल 233 लोग त्रिपुरा से मिजोरम के लूंगलेई जिले में सरकार द्वारा मुहैया कराए गए घरों में लौट गए। जबकि शरणार्थियों का दूसरा जत्था 5 अक्टूबर को लौटने वाला था।
लेकिन, 3 अक्टूबर को मिजोरम लौटे शरणार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं का हवाला देते हुए शरणार्थी नेता मिजोरम लौटने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मिजोरम सरकार ने समझौते के तहत जो वायदे किए थे, उससे वह पीछे हट रही है। इसलिए वे त्रिपुरा स्थित शरणार्थी शिविरों से वापस नहीं जाएंगे। शरणार्थियों की मिजोरम वापसी को लेकर हुए समझौते के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक परिवार को एकमुश्त 5 लाख रपये व 2 वर्ष तक नि:शुल्क राशन मुहैया कराने का प्रावधान है। ब्रू नेताओं के इस बयान से केंद्र सरकार की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि ब्रू शरणार्थियों के कुछ नेता त्रिपुरा से जानबूझकर वासस मिजोरम लौटना नहीं चाहते, कारण उन्हें यहां काफी मात्रा में नि:शुल्क सुविधाएं मिल रही हैं। इसकी लालच में वे वापस नहीं लौटना चाहते।



 
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