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कांग्रेस का ईवीएम खेल

02/01/2020

कांग्रेस का ईवीएम खेल


कांग्रेस ने ईवीएम को लेकर खूब शोर मचाया। कपिल सिब्बल उस पूरे खेल के कप्तान थे। उन्होंने ईवीएम को लेकर दुष्प्रचार किया। इसमें उनका साथ विपक्ष ने भी दिया है। लेकिन जिसके बिना यह दुष्प्रचार अधूरा रह जाता, वह है ट्राई कलर न्यूज नेटवर्क। इसके जरिए ही झूठ फैलाया गया था। इन दिनों यह नेटवर्क मसाज पार्लर चलाता है। मगर आम चुनाव के दौरान और उससे पहले यह कांग्रेसी अभियान चलाता था। कपिल सिब्बल इसकी खबरों को उठाते थे और माहौल बनाते थे। ईवीएम का वितंडा हो या फिर हवाला कारोबार की सनसनी, सब यहीं से प्रसारित हो रहा था। उसमें सच्चाई कुछ थी नहीं। बस दुष्प्रचार था। यह बात साफ हो चुकी है। वह इसलिए क्योंकि अगर वाकई में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है तो कपिल सिब्बल कोर्ट जाते। लेकिन गए नहीं। सदन में भी कुछ नहीं कहा। तीन जुलाई 2019 को विशेष चर्चा भी बुलाई गई थी। पूरे दिन चुनाव सुधार पर बहस हुई। वे मौजूद भी थे। बोले भी। लेकिन ईवीएम को लेकर चुनाव के दौरान उन्होंने जो खुलासा किया था, उस पर चुप रहे। माना जा रहा था कि वे राज्यसभा में उसका हवाला देंगे। उन्हें देना भी चाहिए था। उनको मोदी सरकार का इतना बड़ा रहस्य जो पता चलाथा। उस रहस्योद्घाटन में कपिल सिब्बल मौजूद थे।

अगर वाकई ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है तो कपिल सिब्बल कोर्ट जाते। लेकिन गए नहीं। सदन में भी कुछ नहीं कहा। तीन जुलाई को विशेष चर्चा भी बुलाई गई थी। पूरे दिन चुनाव सुधार पर बहस हुई। वे मौजूद भी थे। बोले भी। लेकिन ईवीएम को लेकर चुनाव के दौरान उन्होंने जो खुलासा किया था, उस पर चुप रहे।

वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन(ईवीएम) के हैकिंग का मामला था जो सीधे तौर पर चुनाव सुधार से जुड़ा हुआ है।उन्हें राज्यसभा में हैंकिंग के दस्तावेज रखने थे। उनके पास होंगे भी। उन्होंने तो दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस भी की थी। वह आम चुनाव का समय था। एक वीडियो दिखाते हुए, कपिल सिब्बल ने सरकार पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। जो वीडियो उन्होंने दिखाया था, उसमें दावा किया गया था कि भाजपा सरकार ने 200 संसदीय क्षेत्र की ईवीएम मशीनों को बदल दिया है। यह बहुत संगीन आरोप था और है। इसे कपिल सिब्बल को सदन के सामने रखना चाहिए थे। वे वकील होने के नाते इसे कोर्ट भी ले जा सकते हैं। पर शायद उन्हें संसदीय मर्यादा का ख्याल आया हो, इसलिए न गए हों। लेकिन सदन में तो उन्हें इस हैकिंग कांड का पर्दाफाश करना चाहिए था। मगर उन्होंने किया कुछ नहीं। शायरी सुनाकर निकल गए। तब से महीनों गुजर गए हैं। मानसून सत्र खत्म हो गया है। शीतकालीन सत्र चल रहा है। लेकिन सिब्बल साहब ने न तो लंदन वाली प्रेस कांफ्रेंस की चर्चा की और न ही अपनी प्रेस कांफ्रेंस की। कायदे से उन्हें करना चाहिए था। इसमें शर्म जैसी कोई बात भी नहीं है। वह इसलिए कि दुनिया को तो बता ही आए है कि ईवीएम के कारण हम हार रहे हैं। तो यह सच सदन और जनता को भी बता देना चाहिए। पर कपिल सिब्बल इससे बच रहे हैं।

सवाल यह है कि वेक्यों बच रहे हैं? इसकी वजह यह हैकि वकील साहब का भांडा फूट गया है और सच सामने आ गया है। हालांकि आवाम उससे वाकिफ नहीं है। पर जानने का हक तो उसको भी। यह बात सोनिया गांधी भी मानती हैं। इसलिए कपिल सिब्बल को सच बताना चाहिए। लेकिन वे नहीं बता रहे हैं। शायद छुपाना ही उनका पेशा हो। मगर मीडिया ने कुछ नहीं छुपाया है। उसने लदंन कांफ्रेस की हर बात बता दी है। यह कांफ्रेंस 21 जनवरी को हुई थी। आयोजकों में आशीष चंद रे थे। रे वे व्यक्ति हैं, जो राहुल गांधी के लिए इग्लैंड में कार्यक्रम कराते रहे हैं। उनकी ही सिरपरस्ती में ईवीएम को लेकर प्रेस कांफ्रेस हुई थी। इरादा, भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार करना था। कांग्रेस ने उसके लिए ही सारा तानाबाना बुना था। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए खुद कपिल सिब्बल मौजूद थे। उनकी उपस्थिति में ‘ईवीएम हैकाथन’ की प्रेस कांफ्रेंस हुई। संबोधित सैयद शुजा ने किया। दावा किया गया कि वे ईवीएम के विशेषज्ञ हैं। अमेरिका में रह रहे हैं। स्काइप के जरिए वे लंदन में हो रही है प्रेस कांफ्रेस से जुड़े। उनका जुड़ना जरूरी भी था। वही तो हीरे थे। हैकिंग के मास्टर थे। उन्हें ही बताना था कि भाजपा ईवीएम को हैक करके चुनाव जीत रही है।

ट्राइ कलर न्यूज नेटवर्क का किस्सा

  • 11 नवंबर 2018 TricolourTv.com का डोमेन पंजीकृत हुआ।
  • 29 नवंबर 2018 को ट्राइकलर न्यूज नेटवर्क कंपनी का ब्रिटेन में पंजीकरण हुआ। कराया रोमानिया की डिआना इरिना ने।
  • 31 जनवरी 2019 को TNN.World का पंजीकरण हुआ।
  • 16 जनवरी 2019 को इस न्यूज नेटवर्क ने पहला समाचार प्रसारित किया। उसमें दावा किया गया कि गुरुदास आंतक हमला भाजपा सरकार ने बिहार का चुनाव जीतने के लिए करवाया था।
  • 21 जनवरी 2019 को इसी न्यूज नेटवर्क ने बताया कि चुनाव जीतने के लिए ईवीएम मशीनों में हेरफेर की जा रही है।
  • 26 मार्च, 9 अप्रैल और 17 अप्रैल को इसी न्यूज नेटवर्क की खबरों का हवाला देते हुए, कांग्रेस ने भाजपा को हवाला और में विमुद्रीकरण के घेरा।
  • 29 अप्रैल 2019 को ट्राई कलर न्यूज नेटवर्क की निदेशक डिआना इरिना ने लंदन में एक बाडी मसाज पार्लर खोल लिया। जून 2019 को TNN.World और TricolourTv.com की वेबसाइट बंद हो गई।

उन्होंने यह बाताया भी। वे बोले…. 2014 का आम चुनाव भाजपा ने हैकिंग की वजह से जीता है। इसमें पार्टी की मदद रिलायंस जियो ने की। उसने दावा किया कि हैकिंग का सच गोपीनाथ मुंडे जानते थे, इसलिए उनकी हत्या कर दी गई। गौरी लंकेश भी हैकिंग का किस्सा जानती थी। इस वजह से उन्हें भी जान गवानी पड़ी।… शुजा यहीं नहीं रूके। उन्होंने दावा किया कि हैकिंग के लिए कई दल उनसे संपर्क कर चुके हैं। सपा, कांग्रेस और आप जैसे दलों का नाम लिया। उसका कहना था कि गुजरात चुनाव में भी ईवीएम हैकिंग की भूमिका रही है। बस मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में हैकिंग नहीं हुई। सैयद शुजा ने इन्हीं चुनावों को निष्पक्ष माना। उसका यह भी दावा है कि वह 2009 और 2014 में ईवीएम डिजाइन करने वाली टीम का हिस्सा था। उसने दावा किया था कि इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन आफ इंडिया में वह 2009-2014 तक काम कर चुका है। इसलिए उसे पता है कि ईवीएम हैक किया जाता रहा है और उसी के बल पर भाजपा चुनाव जीतती है। शुजा के दावे को कंपनी ने सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि इस नाम का कोई भी आदमी हमारे संस्थान में कभी भी किसी भी रूप में नहीं जुड़ा रहा। उसके तमाम दावों को चुनाव आयोग ने भी खारिज कर दिया था। रिलायंस जियो वाले मसले पर तो वह झूठा साबित हो गया है।

जियो तो 2016 में लांच हुआ। तो 2014 में हैकिंग कहां से हुई। इसका जवाब शुजा ने दिया। सवाल यह भी है कि बस वही चुनाव निष्पक्ष कैसे रहे जिसमें कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसी वजह से संदेह जाहिर किया जा रहा है कि कार्यक्रम कांग्रेस का था। वह ईवीएम के जरिए माहौल बनाना चाहती थी। कपिल सिब्बल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वही इस काबिल भी है। तहलका प्रकरण में वे अपनी काबिलियत साबित भी कर चुकी है। उनके ही बुने जाल में वाजपेयी सरकार फंस गई थी। बाद में उसे सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। कांग्रेस इससे परिचित ही थी। इसलिए झूठ को सच बनाने का काम कपिल सिब्बल को दिया गया। तो उन्होंने पहला मजमा लंदन में लगाया। वहां से बताने की कोशिश हुई कि ईवीएम के खेल ने मोदी सरकार बनाई है। लेकिन मामला ठीक से बन नहीं पाया। उसे किसी ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया। विदेशों में तो चर्चा हुई। लेकिन देश में ईवीएम के खिलाफ माहौल नहीं बना। अल्बत्ता बात यह होने लगी कि कांग्रेस दुष्प्रचार कर रही है। लिहाजा उसे बचाव की मुद्रा में आना पड़ा। पार्टी को बयान देना पड़ा कि लंदन हैकाथन से उसका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इसके बाद भी दुष्प्रचार रूका नहीं। कपिल सिब्बल अपने स्वभाव के हिसाब से काम करते रहे। मार्च में फिर एक कोशिश हुई। इसबार हवाला कारोबार और विमुद्रीकरण को हथियार बनाया गया। इसमें उनकी मदद ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क ने की। यह वही नेटवर्क है जिसने 21 जनवरी को ईवीएम पर लंदन में प्रेस कांफ्रेस हुई जो उसे प्रसारित किया था। उसने एक बार फिर कुछ नए खुलासे किए थे।

इसबार हवाला कारोबार और विमुद्रीकरण को हथियार बनाया गया। इसमें उनकी मदद ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क ने की। यह वही नेटवर्क है जिसने 21 जनवरी को ईवीएम को लेकर लंदन में जो प्रेस कांफ्रेस हुई थी, उसे प्रसारित किया था। उसने एक बार फिर कुछ नए खुलासे किए थे। हालांकि उसके लिए कोई प्रमाण न तो उस नेटवर्क के पास था और नही कांग्रेस और विपक्ष के पास। लेकिन दुष्प्रचार में प्रमाण कहां मायने रखता है। वहां तो जाल बुना जाता है ताकि भ्रम फैलाया जा सके।

हालांकि उसके लिए कोई प्रमाण न तो उस नेटवर्क के पास था और न ही कांग्रेस और विपक्ष के पास। लेकिन दुष्प्रचार में प्रमाण कहां मायने रखता है। वहां तो जाल बुना जाता है ताकि भ्रम फैलाया जा सके। उसी इरादे से 26 मार्च को कपिल सिब्बल ने कांस्टियूशन क्लब में एक प्रेसवार्ता की। गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल शरद यादव, हेमंत शोरेन और मनोज झा उनके साथ थे। वहां पर सनसनीखेज दावे किए गए। ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क की खबर उन दावों का आधार था। उसी का हवाला देते हुए भाजपा पर हवाला कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इसी तरह का एक और आरोप 9 अप्रैल को दोबारा लगाया। लेकिन किसी पत्रकार को उनके कहे पर भरोसा नहीं हो रहा था। उनका दावा इतना बड़ा था कि उसकी विश्वसनियता जांचना जरूरी हो गया था। इस वजह से पत्रकारों ने अपने स्तर पर छानबीन शुरू की। पहले तो बेवसाइट से संपर्क करने की कोशिश हुई। इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि तमाम प्रयास के बाद भी बेवसाइट पर चल रही खबर की पुष्टि नहीं हो सकी। बेवसाइट पर जो नबंर था, उस पर संपर्क नहीं हो पाया। टाइम्स आफ इंडिया ने तो इस बेवसाइट पर बड़ी खबर की थी। उसके मुताबिक ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क वर्ल्ड लंदन में पंजीकृत है। पंजीकरण 29 नवंबर 2018 में हुआ। कंपनी की निदेशक रोमानिया की महिला थी। वह एक और कंपनी की निदेशक हैं।

वह कंपनी मसाज पार्लर चलाती है। इन दिनों रोमानिया की महिला का मुख्य धंधा मसाज पार्लर ही है। ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क वर्ल्ड की बेवसाइट तो चल नहीं रही हैं। वह तो बंद पड़ी है। सवाल यह है कि जिसकी विश्वसनीयता की पुष्टि कोई भी अखबार नहीं कर पाया, उसकी पुष्टि कपिल सिब्बल ने कैसे की? वे तो वकील है। जिरह करना उनका पेशा भी है। इस वजह से उन्हें पता है कि सबूत की परिभाषा क्या है? उस लिहाज से ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क वर्ल्ड की खबरों को वे प्रमाणिक कैसे मान रहे थे, यह आश्चर्य का विषय है। यही वजह रही कि जब वे वेबसाइट की खबरों का हवाला देकर पत्रकारों को समझाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन जब वे उसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाने लगे तो कपिल सिब्बल नाराज हो गए। पर उससे पत्रकार पर कहां फर्क पड़ने वाला था। लोग सवाल तो कर ही रहे थे। वह इसलिए भी क्योंकि ट्राईकलर न्यूज नेटवर्क की पोल खुलने लगी थी। इसी दरमियान उसने एक और खबर की। दावा किया कि भाजपा सरकार चुनाव जीतने के लिए ईवीएम से छेड़छाड़ कर रही है। 200 संसदीय क्षेत्र में ऐसा हुआ है। हालांकि वह भी कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं थी। फिर भी वह चली ताकि माहौल बनाया जा सके। यह सब कांग्रेस तब कर रही थी जब चुनाव आयोग हैंकिंग को पूरी तरह से खारिज कर चुका था। बीबीसी के मुताबिक भारत के चुनाव में 16 लाख ईवीएम मशीनें इस्तेमाल की जाती हैं और ऐसी हर एक मशीन में अधिकतम 2000 मत डाले जाते हैं।

किसी भी मतदान केंद्र पर पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 1500 और उम्मीदवारों की संख्या भी 64 से ज्Þयादा नहीं होती है। भारत में बनीं ये मशीनें बैटरी से चलती हैं। ये मशीनें उन इलाक में भी चल सकती हैं जहां बिजली उपलब्ध नहीं होती है। इन मशीनों के सॉटवेयर को एक सरकारी कंपनी से जुड़े डिजयनरों ने बनाया था। चुनाव आयोग के मुताबिकÞ, ये मशीनें और इनमें दर्ज रिकॉडर््स को किसी भी बाहरी समूह के साथ साझा नहीं किया जाता है। मतदाताओं को वोट करने के लिए एक बटन दबाना होता है। मतदान अधिकारी भी एक बटन दबाकर मशीन बंद कर सकता है ताकि मतदान केंद्र पर हमला होने की स्थिति में जबरन डाले जाने वाले फर्जी मतों को रोका जा सके। मतदान से जुड़े रिकॉडर््स रखने वाली मशीन पर मोम की परत चढ़ी होती है। इसके साथ ही इसमें चुनाव आयोग की तरफ से आने वाली एक चिप और सीरियल नंबर होता है।

कपिल सिब्बल उस पूरे खेल के कप्तान थे। उन्होंने ईवीएम को लेकर दुष्प्रचार किया। इसमें उनका साथ विपक्ष ने दिया है। लेकिन जिसके बिना यह दुष्प्रचार अधूरा रह जाता, वह है ट्राई कलर न्यूज नेटवर्क। इसके जरिए ही झूठ फैलाया गया था। इन दिनों यह नेटवर्क मसाज पार्लर चलाता है। मगर आम चुनाव के दौरान और उससे पहले यह कांग्रेसी अभियान चलाता था। कपिल सिब्बल इसकी खबरों को उठाते थे और माहौल बनाते थे। ईवीएम का वितंडा हो या फिर हवाला कारोबार की सनसनी, सब यही से प्रसारित हो रहा था। उसमें सच्चाई तो कुछ थी नहीं।

एक लोकसभा सीट के लिए डाले गए मतों को महज तीन से पांच घंटों में गिना जा सकता है जबकि बैलट पेपर के दौर में इसी काम को करने में 40 घंटों का समय लगता था। इसके साथ ही मशीन फर्जी मतों को अलग कर देती है जिससे ऐसे वोटों को गिनने में लगने वाले समय और खर्च में खासी कमी आई है। इस विषय पर हुए शोध में सामने आया है कि वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल से चुनावी घोटालों और मानवीय गÞलतियों में कमी आई है, जिससे लोकतंत्र को फायदा हुआ है। बीबीसी ने एक शोध पत्र का हवाला देते हुए लिखा है कि वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल से चुनावी गड़बड़ी में कमी आई है, जिससे गरीबों को खुलकर मतदान करने में मदद मिली है और चुनाव ज्Þयादा प्रतिस्पर्धी हुए हैं। इस लिहाज से तो ईवीएम की सराहना होनी चाहिए। लेकिन भारत में राजनीतिक अलग धारा में बह रहे हैं। वे अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए ईवीएम को बहाना बना रहे हैं। इस बात से जनता भी वाकिफ है तभी वह उनके छलावे में नहीं आई।


 
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