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व्यापारिक रिश्ते और घने हुए

22/10/2019

व्यापारिक रिश्ते और घने हुए

मधुरेन्द्र

प्रधानमंत्री मोदी जब भी विदेश का दौरा करते हैं, वे उस देश के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करके आते हैं। अमेरिका तो इस मामले में उनका पसंदीदा देश है,जहां हर बार कंपनियों के सीईओ वगैरह से मिलते हैं। इस बार उनका दौरा तो संयुक्त राष्ट्र संघ की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए हुआ था लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह से व्यापारिक दौरा बना दिया। टेक्सस की राजधानी ह्यूस्टन में तो उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी 16 ऊर्जा कंपनियों के सीईओ से बैठक करके उनसे दूरगामी रिश्ते बनाए तो न्यूयॉर्क में वह 36 सबसे बड़ी कंपनियों के सीईओ से मिलकर भारत की तरक्की में हिस्सेदार बनने के लिए आमंत्रण दे आए। इन दोनों बैठकों से भारत को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि अगर भारत को 5 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो इन बड़ी कंपनियों के सीईओ को देश की आर्थिक प्रगति के बारे में आश्वस्त करना ही होगा।

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र संघ की वार्षिक बैठक और ‘हाउडी मोदी’कार्यक्रम के लिए चर्चा में अधिक है। उनकी यात्रा के दौरान अमेरिकी कंपनियों के साथ हुए समझौतों पर नजर डालें तो उनके आर्थिक निहितार्थ भी सामने आते हैं।

जब प्रधानमंत्री मोदी टेक्सस से अपने अमेरिकी दौरे की शुरुआत कर रहे थे, तो आम धारणा यही थी कि वह वहां ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे हैं। लेकिन उन्होंने इस अवसर का भरपूर फायदा उठाया और वहां 17 बड़ी तेल-गैस कंपनियों के प्रमुखों से मिलने का कार्यक्रम बनाया। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण थी कि इन कंपनियों का सालाना कुल कारोबार एक खरब डॉलर का है और ये 150 देशों में काम कर रही हैं। भारत की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उसे ऊर्जा की बहुत जरूरत है। इसके लिए उसे इन कंपनियों से कारोबारी रिश्ते बढ़ाने होंगे। प्रधानमंत्री मोदी की उनके साथ बैठकें महत्वपूर्ण थीं और इनका सकारात्मक परिणाम भी निकला। इनमें से कुछ ने भारत में निवेश का इरादा जताया तो कुछ ने हिस्सेदारी देने का आॅफर किया। भारतीय कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने अमेरिका की कंपनी टेलुरियन इंक से जो समझौता किया है।

समझौते के तहत उसे अगले 40 साल तक 50 लाख टन एलएनजी हर साल मिलती रहेगी। पेट्रोनेट इस कंपनी में आने वाले समय में कुल 2.5 अरब डॉलर का निवेश करेगी। गैस की हमारी जरूरतों को इससे सहारा मिलेगा। ऊर्जा के क्षेत्र में भारत में इसके पहले कभी भी इतनी बड़ी पहल नहीं हुई है। हम ज्यादातर ईरान-इराक और सऊदी अरब पर निर्भर रहते रहे हैं। जब भी मध्य पूर्व में जंग जैसे हालात पैदा होते हैं, तो हमारे लिए चिंता पैदा हो जाती है क्योंकि इनका सीधा असर सीधे तेल-गैस की कीमतों तथा उनकी आपूर्ति पर पड़ता है। ईरान पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत के लिए वहां से तेल लेना नामुमकिन हो गया है और इस वजÞह से सऊदी अरब तथा ओपेक देशों की चांदी हो गई है। भारत को इनके जाल से निकलना ही होगा और प्रधान मंत्री ने सही वक्त पर पहल की है। यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि दुनिया में सबसे ज्यादा तेल का सुरक्षित भंडार अमेरिका के पास ही है। उसके पास सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल का सुरक्षित भंडार है, जो 70 साल तक चल सकता है। इसी तरह प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी के मामले में भी वह बहुत समृद्ध है। भारत वहां निवेश करके अपना रास्ता सुरक्षित रख सकता है।

सही समय पर उठाया गया कदम

प्रधानमंत्री की यह अमेरिका यात्रा ऐक्शन से भरपूर रही लेकिन साथ-साथ भारत के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए हुई। उन्होंने भारत की दीर्घकालीन ऊर्जा नीति को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया तो दूसरी ओर तीन दर्जन ग्लोबल कंपनियों को भारत में और निवेश के लिए लुभाया। उन्होंने एक के बाद एक महत्वपूर्ण बैठकें कीं। उन कंपनियों के सीईओ को उन्होंने भारत में निवेश के लिए आश्वस्त भी किया। यह सही समय पर उठाया कदम है क्योंकि चीन की आर्थिक स्थिति खस्ता होने लगी है और वहां भी मंदी के लक्षण दिखने लगे हैं। उसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार युद्ध छेड़ दिया है। ऐसे में अमेरिका की धनी कंपनियों को भारत लाने की पीएम मोदी की यह मुहिम वाकई रंग ला सकती है। ऐसा हुआ तो कोई कारण नहीं है कि यहां विदेशी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश करेंगी। भारत को इस समय विदेशी निवेश की दरकार है,ताकि आर्थिक तेजी आए और जीडीपी की वृद्धि दर फिर से 7 प्रतिशत पर चली जाए। अगर भारत को 5 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो विदेशी निवेश बहुत जरूरी है। प्रधान मंत्री मोदी ने इस दिशा में बड़ी पहल की है।

अमेरिका में निवेश करके वह गैस की अबाध आपूर्ति कर सकता है। ऊर्जा की उसकी जरूरतों को अमेरिका पूरा करने में मदद कर सकता है। इतना ही नहीं,अमेरिकी तेल-गैस कंपनियों के पास आधुनिकतम टेक्नोलॉजी है और वे भारत को टेक्नोलॉजी दे सकते हैं। इससे गैस निकालने की लागत कम हो जाएगी और जनता पर भार कम हो जाएगा। दरअसल, प्रधानमंत्री कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना चाहते हैं। वह गैस तथा सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाना चाहते हैं। इस दिशा में टेक्सस में ऊर्जा कंपनियों के साथ गंभीर बातचीत करके और उनमें निवेश करने का प्रस्ताव देकर भारत ने आगे का मार्ग प्रशस्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को अच्छी तरह समझ लिया है कि भारत को एक दूरगामी ऊर्जा नीति के तहत न केवल अपने दरवाजे खोलने पड़ेंगे, बल्कि अमेरिका जैसे देशों में भी निवेश करना होगा ताकि ऊर्जा की अबाध आपूर्ति होती रहे। जिन लोगों ने टेक्सस में प्रधानमंत्री का जन स्वागत कार्यक्रम देखा होगा,उन्हें याद होगा कि किस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय कंपनी पेट्रोनेट के अमेरिकी गैस कंपनी टेलुरियन इंक में 50 करोड़ डॉलर के निवेश पर खुशी जÞाहिर की।

अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश उसके यहां निवेश करें ताकि रोजगार के अवसर वहां बढ़ें। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां पर सही कदम उठाया है। न्यूयॉर्क में 36 कंपनियों के सीईओ को प्रधानमंत्री मोदी ने आश्वस्त किया कि भारत में अब बिजÞनेस आसान हो गया है। न केवल ईज आॅफ डूइंग बिजनेस में भारत ने अच्छी छलांग लगाई है, बल्कि यहां अब कारोबार के लायक माहौल बन गया है। प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया पर ध्यान देने से विदेशी कंपनियों के लिए अब रास्ता सुगम हो गया है। कारखाने लगाने की अनुमति से लेकर तमाम तरह के परमिशन अब आॅनलाइन होते जा रहे हैं और उनमें नौकरशाही का हस्तक्षेप कम होता जा रहा है। इससे कारोबार करना आसान हो गया है। प्रधानमंत्री ने इन कंपनियों को हाल ही में टैक्स घटाए जाने के बारे में भी बताया कि कैसे देश में कॉर्पोरेट टैक्सों में काफी कमी की गई है,जिससे उद्यमियों को राहत मिली है। टैक्स में यह महत्वपूर्ण कटौती विदेशी कंपनियों पर भी लागू होगी। इससे उनकी लागत घटेगी और आय बढ़ेगी। इसके अलावा जिस तरह से देश तरक्की कर रहा है,उससे उनके भी आगे बढ़ने की संभावना बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री ने इन कंपनियों के सीईओ को उत्साहित किया कि वे भारत में अधिक से अधिक निवेश करें और यहां पैसा लगाएं। पहले तो ये भारत की जीडीपी में आई गिरावट से चिंतित थे लेकिन जिस तरह से नरेन्द्र मोदी ने उन्हें आश्वस्त किया, वह काबिले तारीफ है। एक सीईओ ने बाद में कहा कि मोदी ने जोरदार तर्कों और अपनी बात से उन सभी सीईओ का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बताया कि भारत में मध्य वर्ग की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है,जिसकी क्रय शक्ति भी बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री ने सभी सीईओ की बातों को ध्यान से सुना, उनके सुझावों को अमल में लाने का आश्वासन दिया और उनके लिए उठाए गए कई कदमों का जिक्र किया। इन सीईओ का कहना था कि भारत जल्द से जल्द अमेरिका से अपने व्यापारिक रिश्ते सुधार ले ताकि वे भारत में अपना निवेश बढ़ा सकें। भारत जल्द ही अमेरिका से एक व्यापार संधि कर सकता है, जिससे देश में निवेश का माहौल बनेगा। जिस तरह से प्रधानमंत्री दो घंटे तक इन कंपनियों के सीईओ की बातें सुनते रहे,उससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत लौटकर वह कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकते हैं।


 
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