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इलेक्ट्रिक वाहनों में कहां से आएगा करंट?

09/07/2019

योगेश कुमार सोनी

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देगी। भारत में ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल हो, इसके लिए सरकार सस्ते ई-वाहन मुहैया कराएगी। इसके अलावा सरकार परिवहन क्षेत्र में तेज विकास पर जोर देगी। हर बार की तरह कुछ लोग नाराज हैं तो कुछ खुश। जैसा कि हरेक को मध्यनजर रखते हुए बजट बनाने की घोषणा होती लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाता कि देश की सवा सौ करोड़ जनसंख्या एकसाथ खुश हो लेकिन कुछ चीजें बजट में अच्छी हैं, जिसमें सबसे पहले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है लेकिन इसमें चुनौतियां सबसे ज्यादा है।

दरअसल, बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए विगत दिनों नीति आयोग ने निर्माता कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अपना रोड प्लान साझा करने को कहा था, जिस पर इस बजट में इन वाहनों को बढ़ाने पर जोर दिया है। यह कदम तो अच्छा है लेकिन इसको संचालित करना बेहद मुश्किल काम है। मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में भी इसपर बहुत जोर दिया था लेकिन उतनी कामयाबी नहीं मिली, जितनी अपेक्षा थी। दरअसल, मामला यह है कि इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने की व्यवस्था जबतक दुरुस्त नहीं होगी तबतक इसको मार्केट में उतारने का कोई फायदा नहीं होगा। जैसे पेट्रोल-डीजल या सीएनजी पंप थोड़ी-थोड़ी दूरी पर हैं, वैसे ही इन वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन का होना अनिवार्य है। इसके अलावा इनके अधिक चलने की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि कार अधिकतम 170 किलोमीटर तक ही चलती है और स्कूटर 50 किलोमीटर। इसके बाद उसको अन्य ईधन से भी नहीं चला सकते। जैसे सीएनजी या एलपीजी खत्म होने पर उसको पेट्रोल पर चला सकते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक कार चार्ज होने में 2-3 घंटे लेती है। यदि किसी चार्जिंग स्टेशन पर पांच कारें लग गईं तो आखिरी वाले का अगले ही दिन नंबर आएगा। यही कारण रहा कि पिछले पांच सालों में जितने इलेक्ट्रिक वाहन निकले वो कामयाब नहीं हो सके। इलेक्ट्रिक वाहनों में पावर की कमी भी देखने को मिलती है। साथ ही इनकी टॉप स्पीड भी अभी बहुत कम है। इन वाहनों की सबसे बड़ी कमी उनकी री-सेल वैल्यू बहुत कम आंकी जाती है। इतना ही नहीं, इनमें लगी मोटर की लाइफ भी करीब 6-7 वर्ष ही होती है, इसके अलावा ओवरचार्ज्ड होने पर इनकी बैटरी लाइफ कम होती है। मौजूदा ई-टू व्हीलर की रफ्तार 25 किलोमीटर/घंटा है जबकि बहुत ही कम ऐसे मॉडल हैं, जिनकी स्पीड 40 किलोमीटर/घंटा से ज्यादा है।

वहीं इसके विपरित तमाम फायदे भी हैं। जैसे कि इनके इस्तेमाल से पॉल्यूशन नहीं होता और वातावरण साफ-सुथरा रहता है। एयर पॉल्यूशन से भी निजात मिलती है। आजकल सड़कों पर हमें ट्रैफिक की समस्या से हर रोज दो-चार होना पड़ता है। जाम के अलावा ट्रैफिक के कारण बढ़ता शोर भी हमारी सेहत पर नकारात्मक असर डालता है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन हमें इस शोर से भी आजादी दिला सकते हैं। चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में बैट्ररी लगी होती है इसलिए पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ये ज्यादा शोर नहीं करते। ऐसे में इन्हें चलाने के समय आप रिलैक्स महसूस करते हैं। जैसे कि लोकल में जाने के लिए इससे बेहतर विकल्प नहीं होगा, जिससे रिहायशी क्षेत्रों में प्रदूषण बेहद कम हो सकता है। महिलाओं व युवाओं के लिए तो यह बेहतर विकल्प है। हाल ही में इलेक्ट्रिक कारें सरकारी अधिकारियों को दी जा रही हैं व कार्यलयों में इसके चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। लेकिन ऐसे वाहनों के लिए अभी भी जबरदस्त तैयारी की जरूरत है। यह किसी भी कंपनी या सरकार की पॉलिसी होनी चाहिए कि किसी भी प्रोडक्ट को लांच करने से पहले उसकी तैयारी अच्छे से कर ली जाए, जिससे उपभोक्ताओं को कोई समस्या न हो। हालांकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसपर बेहतर प्रयास भी करते हुए इसकी प्रक्रिया को मजबूत करने की बात कही है। कोलकाता स्थित केएसएल की क्लीनटेक लिमिटेड की योजना भारतीय बाजार में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए 200 करोड़ खर्च करेगी और आनेवाले एक वर्ष में ही 10 तरह के इलेक्ट्रॉनिक में उतारेगी। इसके अलावा तमाम कंपनिया हैं जो इस ओर आकर्षित होकर आ रही हैं।

जैसा कि हम भली-भांति जानते हैं कि आज देश में इस कदम की बहुत जरूरत है क्योंकि हमारे आनेवाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देना अनिवार्य है, अन्यथा महानगरों में मनुष्य की आयु मात्र 55 से 60 वर्ष तक ही रह गई। कोई भी प्राइवेट कंपनी या सरकार निवेशक के रूप में तभी आकर्षित करेगी जब उसके उपभोक्ताओं की संख्या अधिक होगी और उपभोक्ता जबतक उन्हें दी जानेवाली सुविधा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता तबतक वो वह प्रोडेक्ट नहीं लेगा। कई नजरिए के साथ यदि इसपर काम किया जाए तो इससे आर्थिक फायदा भी है। बढ़ती जनसंख्या व प्रदूषण को नजर में रखते हुए इसकी शुरुआत बेहतर कदम है। कभी-कभी लगता है कि कुछ ऐसे काम हैं, जिस पर गंभीरता से काम किया जाए तो हम एक नए व बेहतर राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं, इलेक्ट्रिक वाहन जैसे कदम उनमें से ही एक है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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