राम जन्मभूमि

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मिट्टी की जांच समेत अन्य रिपोर्ट आने के बाद शुरू होगा राम मन्दिर निर्माण

03/09/2020

लखनऊ, 03 सितम्बर (हि.स.)। अयोध्या विकास प्राधिकरण बोर्ड से स्वीकृत राम मन्दिर का मानचित्र गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को सौंपे जाने के बाद अब निर्माण कार्य जल्द गति पकड़ेगा। 

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सचिव चम्पत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण का एक-एक कार्य कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है। नक्शा पास हो जाने के बाद अब प्राथमिक स्तर के काम पूरे हो गए हैं। उन्होंने बताया कि जिस निर्धारित स्थान पर मन्दिर बनना है, वहां की 60 मीटर की गहराई तक के सैम्पल लिए गए हैं। सैम्पलिंग का काम आईआईटी चेन्नई कर रहा है। दूसरा कार्य भूकम्परोधी भवन का है। इसके लिए भी सैम्पल सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की कर रहा है। इन दोनों संस्थाओं को अभी रिपोर्ट देनी बाकी है। जितने हिस्से में मन्दिर बनेगा, वहां कौन सी गिट्टी, मोरंग व सीमेंट का प्रयोग होना है, इसका निर्धारण भी आईआईटी चेन्नई को करना है। गिट्टी के लिए राबर्ट्सगंज और बुन्देलखण्ड की 800 किलोग्राम गिट्टी भेजी जानी है। इसके साथ ही बेतवा व केन नदी का मोरंग 10 कुंतल भेजा जाएगा। 

इसके साथ ही आईआईटी चेन्नई रिसर्च कर रहा है कि सीमेंट में कौन सी वस्तु मिलाई जाए कि उसकी क्षमता एक हजार वर्ष तक टिकाऊ हो जाएं। वैज्ञानिक ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि मंदिर की मियाद एक हजार वर्ष तक हो। सभी रिपोर्ट आने के बाद निर्माण शुरू होगा। 

प्रस्तावित मन्दिर की नींव में 1200 स्तम्भ संयोजित होने हैं पर इनके निर्माण से पूर्व जांच के तौर पर कुछ स्तम्भों का निर्माण होगा, ताकि यह परखा जा सके कि नींव के जिन स्तम्भों के निर्माण की तैयारी है वह अत्यंत भार वाले शिलाखंडों को बर्दाश्त करने में सक्षम हैं। प्रस्तावित मंदिर 360 फीट लम्बा 235 फीट चौड़ा एवं 161 फीट ऊंचा है। रामजन्म भूमि पर प्रस्तावित मंदिर अपनी भव्यता और सौंदर्य की दृष्टि से दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में शुमार होगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के मुताबिक इन सारे प्रयासों में दस दिन का समय लग सकता है। इसके बाद मंदिर निर्माण कार्यों में गति देखने को मिलेगी। 

हिन्दुस्थान समाचार/संजय


 
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