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मशहूर शायर कैफी आजमी की 101वीं जयंती पर गूगल ने बनाया खास डूडल

14/01/2020

सुरभि सिन्हा 
मशहूर शायर, गीतकार और सामाजिक कार्यकर्त्ता  कैफी आजमी की 101वीं  जयंती के मौके पर गूगल ने आज डूडल के जरिये उन्हें याद किया है। प्रेम की कविताओं से लेकर बॉलीवुड गीतों और पटकथाएं लिखने में माहिर कैफी आजमी 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। कैफी की 101वीं जयंती पर गूगल ने अपने होम पेज पर डूडल के रूप में उनकी तस्वीर बनाई है। इस चित्र में कैफी सफेद रंग की लिबास में माइक के सामने नजर आ रहे हैं और उनके पीछे खूबसूरत अंदाज में गूगल लिखा हुआ हैं।

कैफी का जन्म 14 जनवरी, 1919 को आजमगढ़ में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। कैफी को बचपन से ही कवितायें लिखने एवं पढ़ने का शौक था। महज 11 साल की उम्र में कैफी ने अपनी पहली गजल लिखी थीं। इसके बाद वह कई मुशायरा कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। इसके लिए कैफी को परिवार से पूरा योगदान भी मिला। साल 1942 में कैफी आजमी अपने पिता के कहने पर उर्दू और फारसी की उच्च शिक्षा के लिये लखनउ गए। वहां  कैफी ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सदस्यता ग्रहण करके पार्टी कार्यकर्ता के रूप मे कार्य करना शुरू कर दिया और फिर महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उनके साथ भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हो गये।
साल 1947 में कैफी ने आर्थिक रूप से संपन्न एवं साहित्यिक संस्कारों वाली शौकत से शादी कर ली। शौकत एक थियेटर आर्टिस्ट थी और कैफी के लेखन से वह काफी प्रभावित भी थी। उनके दो बच्चे हुए शबाना आजमी और बाबा आजमी। शबाना आजमी फिल्म जगत की मशहूर अदाकारा हैं। पिता कैफी आजमी की 101वीं जयंती पर उन्होंने गूगल द्वारा बनाये गए डूडल की प्रशंसा की हैं।

कैफी आजमी को आज देश-विदेश में उनके तमाम चाहनेवाले सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें याद कर रहे हैं। उनके द्वारा लिखे फिल्मी गीतों में देशभक्ति गीत 'कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियों', 'मिलो न तुम तो हम घबराए', 'ये दुनिया ये महफिल' आदि आज भी दर्शकों की जुबान पर हैं। कैफी ने लेखन के साथ-साथ अपने पैतृक गांव में स्कूल, अस्पताल, पोस्ट ऑफिस और सड़क बनवाने में मदद भी की। कैफी के अभूतपूर्ण योगदान के लिए 1974 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। 10 मई, 2002 को 83 साल के उम्र में उनका निधन हो गया था। 
हिन्दुस्थान समाचार


 
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