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दिल्ली विधानसभा की चर्चित सीटें

07/03/2020

दिल्ली विधानसभा की चर्चित सीटें

शकूर बस्ती
शकूर बस्ती इस बार दिल्ली की हॉट सीट था। यहां से केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन चुनाव मैदान में थे। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार वे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज किए हैं। इस जीत के साथ वे यहां से लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। भाजपा ने यहां से दो बार विधायक रह चुके डॉक्टर एससी वत्स को मैदान में उतारा था। कांग्रेस से देवराज अरोड़ा ताल ठोक रहे थे। कांग्रेस यहां से 3 बार, भाजपा और आप 2-2 बार चुनाव जीत चुकी हैं। वहीं, जनता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ने एक एक बार यह सीट अपने नाम की है। यह क्षेत्र दीपाली, सरस्वती विहार से पश्चिम विहार तक फैला हुआ है। शकूर बस्ती विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के उत्तरी पश्चिमी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 1972 में इसे विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया था। तब यहां से कम्युनिस्ट पार्टी के श्रीचंद ने भारतीय जनसंघ के नेता बनारसी दास को हराया और विधायक बने थे।

बल्लीमारन
शीला सरकार में मंत्री रहे हारुन यूसुफ बल्लीमारन से इस बार भी चुनाव मैदान में थे। लेकिन इस बार भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। आप उम्मीदवार इमरान हुसैन को यहां से 65644 वोट मिले हैं। वहीं भाजपा की लता सोढ़ी को 29472 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहीं। जबकि हारुन यूसुफ को मात्र 4802 मतों से संतोष करना पड़ा। यह विधानसभा क्षेत्र चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र के अंतगर्त आता है। यह सीट 1993 में बनाया गया था। तब से कांग्रेस के दिग्गज नेता हारून युसुफ यहां से जीत दर्ज करते रहे हैं। वे 2013 तक यहां विधायक रहे। इस क्षेत्र से उर्दू शायर मिर्जा गालिब की यादें भी जुड़ी हैं। उनके नाम की गालिब हवेली आज भी यहां मौजूद है। इसके अलावा हिंदी फिल्मों के मशहूर अभिनेता प्राण भी इसी इलाके के रहने वाले थे। इस क्षेत्र में दिल्ली के अमरपुरी, बस्ती हरफूल सिंह, बाजार बल्लीमारान, बाजार चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, ईदगाह रोड़, जोगीवारा, एमएम रोड़, प्रेम नगर, कुतुब रोड के इलाके आते हैं।

गांधीनगर
गांधीनगर सीट से भाजपा के अनिल कुमार बाजपेई को जीत हासिल हुई। उन्हें 48824 वोट मिले हैं। यह कांग्रेस के दिग्गज नेता अमरिंदर सिंह लवली का गढ़ रहा है। आम आदमी पार्टी के उदय के बाद यह सीट उनके हाथ से निकल गई। इस बार यहां आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहा। लवली ने यहां का मुकाबला त्रिकोणीय जरूर बनाया। लेकिन वे चुनाव जीत नहीं सके। वे तीसरे नंबर पर रहे। त्रिकोणीय मुकाबले का फायदा भाजपा के प्रत्याशी अनिल बाजपेई को मिला। उन्होंने करीब 6,079 मतों से जीत दर्ज की है। यह यमुनापार की हाई प्रोफाइल सीट रही है। यह सीट पूर्वी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आता है। यह क्षेत्र 1972 में विधानसभा सीट घोषित किया गया था। तब यहां से कांग्रेस के इंदर सिंह आजाद विधायक बने थे।

कृष्णानगर
कृष्णा नगर विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के एसके बग्गा ने 72111 मत हासिल करते हुए जीत हासिल की। वहीं भारतीय जनता पार्टी के अनिल गोयल से इनका सीधा मुकाबला था। डॉ अनिल गोयल कुल 68116 मत हासिल करते हुए दूसरे स्थान पर रहे। आठ फरवरी को हुए मतदान में इस सीट पर कुल 146314 वोट पड़े। वहीं, वोटिंग फीसद 67.31 रहा। यह सीट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन का गढ़ रहा है। वे यहां से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं। एक तरह से कहा जाए तो वे यहां अजेय थे। 2015 में भाजपा के इस गढ़ पर आम आदमी पार्टी का कब्जा हो गया। इस बार यह बरकरार रहा। कांग्रेस ने यहां से दिल्ली के पूर्व मंत्री एवं चार बार लगातार विधायक रहे डॉ एके वालिया को मैदान में उतारा था। डॉ वालिया तीन बार गीता कॉलोनी और एक बार लक्ष्मी नगर से विधायक रहे हैं। वेशीला सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं। यह क्षेत्र 1977 में विधानसभा सीट घोषित हुआ। यहां से जनता पार्टी के नेता योग ध्यान आहुजा विधायक चुने गए। तब उन्होंने कांग्रेस के जगदीश चंदर मोंगिया को हराया था।2015 में यहां से आम आदमी पार्टी के नेता एसके बग्गा ने जीत दर्ज की थी। विश्वासनगर, गांधीनगर, प्रीत विहार इस इलाके से जुड़े हुए हैं। दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन का स्टेशन होने से यहां से दिल्ली के किसी भी कोने में आसानी से पहुंचा जा सकता है।

बाबरपुर
बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय और बीजेपी की ओर से नरेश गौड़ में चुनावी टक्कर थी । गोपाल राय ने नरेश अग्रवाल को 33,062 के बड़े अंतर से हराया है। 60 प्रतिशत से ज्यादा मत पाकर गोपाल राय ने जीत का नया आयाम प्रस्तुत किया है। भाजपा के नरेश गौड़ 36 प्रतिशत अंक पाकर आधे तक पहुंच सके। वहीं कांग्रेस की ओर से अन्वीक्षा जैन मात्र तीन प्रतिशत मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। यह विधानसभा सीट दिल्ली की 70 सीटों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस क्षेत्र को 1993 में विधानसभा सीट घोषित किया गया था। तब के चुनाव में यहां से भाजपा के नरेश गौड़ विधायक चुने गए थे। नरेश ने कांग्रेस के भोपाल सिंह को करारी शिकस्ती दी थी। भाजपा के दिग्गज नेता नरेश गौड़ इस सीट से कुल 4 बार विधायक चुने गए। कांग्रेस को सिर्फ एक बार इस सीट पर जीत नसीब हुई। वर्तमान में आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय यहां से विधायक हैं। गोपाल राय ने यहां से भाजपा के दिग्गज नेता नरेश गौड़ को हराया। अशोक नगर से कुछ ही दूरी पर बसा यह इलाका उत्तर में यमुना विहार से, पश्चिम में मौजपुर से, दक्षिण में सीलमपुर और पूर्व में छज्जूपुर से जुड़ा हुआ है। साल 2015 में हुए चुनाव में यहां आम आदमी पार्टी का पलड़ा भारी रहा था। गोपाल राय ने जीत हासिल की थी। इसके बाद गोपाल राय दिल्ली सरकार में मंत्री भी बने थे। पिछले चुनाव में गोपाल राय ने 35 हजार से ज्यादा वोटों से नरेश गौड़ को शिकस्त दी थी। यह इस सीट पर सबसे बड़ी जीत भी थी। वहीं नरेश गौड़ भी इस सीट से कई बार जीत हासिल कर चुके हैं।

ओखला
आम आदमी पार्टी के ओखला विधानसभा से उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान ने जबरदस्त जीत दर्ज की है। अमानतुल्लाह खान ने 66.03 प्रतिशत के आधार पर 130367 मत हासिल किये हैं। भाजपा के ब्रह्म सिंह को सिर्फ 58540 वोट मिले हैं। कांग्रेस से परवेज हाशमी चुनाव लड़ रहे थे। जिनको 2.59 प्रतिशत के आधार पर 5123 मत मिले। इस सीट पर कुल 197431 वोट पड़े थे। कहा जाता है कि ये सीट पुराने समय से कांग्रेस पार्टी की गढ़ हुआ करती थी। यहां से परवेज हाशमी ने मुश्किल से मुश्किल दौर में चुनाव में जीत दर्ज की है। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की आंधी में सभी समीकरण पलट गये। कांग्रेस ने भी इस चुनाव में कोई खासा उत्साह नहीं दिखाया जिसका फायदा आप को होता दिखा। हालांकि वर्ष 2015 में अमानतुल्लाह खान ने आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ा था। जीत भी हासिल की थी। बता दें कि दिल्ली का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र ओखला पूर्वी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। 1977 में इस क्षेत्र को विधानसभा सीट घोषित किया गया था। वर्तमान में यहां से आम आदमी पार्टी के अमानतुल्लाह खान विधायक हैं।

पटपड़गंज
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया तीसरी बार इस सीट से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इस क्षेत्र में पहाड़ी मतदाताओं की तादात अच्छी खासी है। इसी को देखते हुए भाजपा ने रवि नेगी को मैदान में उतारा था और कांग्रेस ने भी इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए दो बार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे लक्ष्मण रावत पर दांव लगाया। नेगी और रावत दोनों का यह पहला चुनाव था। 2015 विधानसभा चुनाव में मनीष सिसोदिया ने 28 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से बीजेपी के विनोद कुमार बिन्नी को हराया था। बिन्नी 2013 से 2014 तक आम आदमी पार्टी के सदस्य थे। बाद में वो भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं कांग्रेस ने अनिल कुमार को उम्मीदवार बनाया था। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को इस बार चुनाव जीतने के लिए काफी मेहनत करना पड़ा। कुल 15 राउंड के हुए मतगणना में 11 राउंड तक वे पीछे चल रहे थे। लेकिन अंतत: उन्हें जीत मिली। केजरीवाल मंत्रिमंडल के सबसे कम मतों से जीतने वाले मनीष सिसोदिया हैं।

नई दिल्ली
यह सीट मुख्यमंत्री सीट का हो गया है। यहां से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं। इनके पहले शीला दीक्षित यहां से चुनाव जीतती थी। वर्ष 2013 में इसी सीट से केजरीवाल ने कांग्रेस की दिग्गज नेता एवं दिल्ली की लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को चुनाव हरा कर अपने राजनीतिक सफर का आगाज किया था। उसके बाद वर्ष 2015 के चुनाव में केजरीवाल भाजपा नेता नुपुर शर्मा को हराकर विधायक बने थे। इस चुनाव में भी केजरीवाल ने भाजपा उम्मीदवार सुनील यादव को हराया है। वहीं काग्रेस उम्मीदवार रोमेश सभरवाल तीसरे स्थान पर रहे। इस बार यह सीट इसलिए भी चर्चा में रही कि यहां से सबसे ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। कुल 63 उम्मीदवार यहां केजरीवाल को चुनौती दे रहे थे। इसके बावजूद केजरीवाल ने 64 फीसदी वोट पाकर जीत दर्ज की।

रोहिणी
भाजपा के कद्दावर नेता और रोहिणी विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक विजेंद्र गुप्ता पुन: इसी सीट से चुनाव जीते हैं। उन्होंने आप के उम्मीदवार राजेश नाम बंसीवाला को लगभग 19 हजार वोटों से हराया है। वर्ष 2015 के चुनाव में गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के सीएल गुप्ता को 5,367 मतों के अंतर से हराया था। विजेंदर गुप्ता ने 59,866 मत हासिल किया तो सीएल गुप्ता के पक्ष में 54,499 वोट आए। जबकि कांग्रेस के सुखबीर शर्मा को महज 3,399 वोट मिले। विजेंद्र गुप्ता विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।

द्वारका
द्वारका विधानसभा से आप उम्मीदवार विनय मिश्रा ने चुनाव जीता है। विनय कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं पूर्व सांसद महाबल मिश्रा के पुत्र हैं। यह सीट इसलिए भी चर्चा में रही कि विनय कांग्रेस से आप में शामिल हुए और उसके अगले दिन ही उन्हें पार्टी ने टिकट दे दिया। वह भी लाल बहादूर शास्त्री के पोते एवं अपने सीटिंग विधायक आदर्श शास्त्री का टिकट काटकर। इस कारण वे नाराज हुए और पार्टी से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें यहां से उम्मीदवार भी बनाया। आदर्श शास्त्री को कांग्रेस ने शायद इसी लिए टिकट दिया था कि उनकी एक सीट तो पक्की रहेगी। क्योंकि वर्ष 2015 में आदर्श शास्त्री इस सीट से विधायक चुने गए थे। कयास तो यही लगाया जा रहा था कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री पुन: चुनाव जीतने में सफल होंगे। इस सीट पर भाजपा ने प्रद्युम्न राजपूत को उम्मीदवार बनाया था।

मॉडल टाउन
इस सीट से आप उम्मीदवार अखिलेश पति त्रिपाठी ने भारी अंतर से भाजपा के उम्मीदवार कपिल मिश्रा को हराकर चुनाव जीता है। कांग्रेस उम्मीदवार आकांक्षा ओला यहां तीसरे स्थान पर रहीं। वर्ष 2015 में आप ने अखिलेश पति त्रिपाठी, भाजपा ने विवेक गर्ग एवं कांग्रेस ने कंवर करण सिंह को उम्मीदवार बनाया था। यह सीट कपिल मिश्रा के कारण चर्चा में रहा। कपिल मिश्रा केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे हैं। वे लंबे समय से केजरीवाल के भ्रष्टाचार को लेकर मुखर थे।



 
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