व्यापार

सबके अजीम प्रेमजी

08/06/2019

गोविन्द
नई दिल्ली, 08 जून (हि.स.)। देश के सबसे अजीम दानवीर प्रेमजी 31 जुलाई 2019 को विप्रो की कमान छोड़ रहे हैं। 24 जुलाई 1945 अजीम प्रेमजी का जन्म बॉम्बे में हुआ था।भारत के निजारी इस्माइलिया शिया मुस्लिम परिवार में उनका जन्म हुआ था। उनके पिता एक प्रसिद्ध व्यापारी थे और उन्हें बर्मा के चावल राजा के रूप में जाना जाता था। विभाजन के बाद, जब जिन्ना ने उनके पिता मोहम्मद हशम प्रेमजी को पाकिस्तान आने के लिए आमंत्रित किया, तो उन्होंने उनका अनुरोध ठुकराकर  भारत में रहने का फैसला किया।
53 वर्षों तक विप्रो की कमान संभालने वाले अजीम प्रेमजी की कहानी किसी बॉलिवुड नायक से कम नहीं है।अजीम प्रेमजी ने विप्रो के कारोबार को 21 साल की उम्र में  संभाला। 1966 में वे कुकिंग ऑयल कारोबार में आए । 1983 में उन्होंने सूचना प्रोद्योगिकी (आईटी) कारोबार की शुरुआत की फिर 1985 में कंप्यूटर हार्डवेयर में कदम रखा। विप्रो 2000 में न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुई। अजीम प्रेमजी ने 2019 में चैरिटी में 34 फीसदी संपत्ति दान कर दी। अजीम प्रेमजी अब तक 1.47 लाख करोड़ रुपये दान कर चुके हैं।
विप्रो के कारोबारी सफर की बात करें तो 1999 कंपनी के 150 ग्राहक और 8000 कर्मचारी थे। वहीं, कंपनी की आय 24 करोड़ डॉलर थी। जबकि आज कंपनी के 1513 ग्राहक और 1.71 लाख कर्मचारी हैं। कंपनी की आय 812 करोड़ डॉलर है।
निवशकों के नजरिए से देखें तो ये शेयर जैकपॉट साबित हुआ है। 1983 में इस शेयर में लगाए गए 10000 रुपये आज 600 करोड़ रुपये हो चुके हैं। 1983 के 100 शेयर 2019 में 2.56 करोड़ शेयर हो चुके हैं। कंपनी ने 50 साल में 13 बार बोनस शेयर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि अजीम प्रेम जी ने विप्रो के कार्यकारी अध्यक्ष  पद से सेवानिवृत होने का एलान कर दिया है।  वो 30 जुलाई से इस पद से रिटायर हो रहे हैं। हालांकि अजीम प्रेमजी पांच साल के लिए कंपनी में नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बने रहेंगे। इसके अलावा वो फाउंडर चेयरमैन बने रहेंगे। अब कंपनी की कमान अजीम प्रेमजी के बेटे रिशाद प्रेमजी संभालेंगे। उन्हें पांच साल के लिए एग्जिक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा जेड नीमचवाला को एमडी बनाया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार