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1865 में से 1332 तालाबों में नहीं पशुओं के पीने लायक पानी

10/06/2019

विजेंद्र 
जींद, 10 जून (हि.स.)। लगातार खत्म होते जा रहे तालाबों के अस्तित्व से पशुपालकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। झुलसा देने वाली गर्मी में जहां लोगों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है, पशुओं की जान भी हलक में आ गई है। जींद जिले में इस समय हालत यह है कि 1865 में से 1332 तालाबों में पानी पशुओं के पीने लायक नहीं है। मजबूरी में पशुओं द्वारा यह पानी पीने से पशु बीमार हो रहे हैं। 
जींद जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 90 प्रतिशत से पशुपालक रहते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में किसानों और मजदूरों का जीवन पशुओं पर ही निर्भर रहता है। ज्यादातर ग्रामीण लोग पशुओं का दूध बेचने से लेकर इनकी खरीद-बेच कर अपना गुजारा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आय का जरिया पशुओं के लिए पीने का पानी तक नहीं मिलेगा तो इसका प्रभाव उनकी आय पर पडऩा स्वाभाविक है। गंदा पानी पीने से पशु हो जाते हैं। तालाबों में पशुओं के पीने योग्य पानी नहीं होने के कारण ज्यादातर किसान पशुओं को घरेलू हैंडपंपों से पानी पिलाने और नहलाने का काम कर रहे हैं। इससे एक तो ज्यादा पानी व्यर्थ बहता है और दूसरे यह सुविधा सभी लोगों के पास नहीं है।  
जिले में 1865 में से केवल 533 तालाबों में ही पीने योग्य पानी
जींद जिले में इस समय हालत यह है कि 1865 में से 1332 तालाबों में पानी पशुओं के पीने लायक नहीं है। केवल 533 तालाबों में ही पशुओं के पीने लायक पानी है। गांव के तालाबों में पीने लायक पानी नहीं होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि गांवों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी तालाबों में ही की जा रही है। । 
गंदा पानी पीने से पशुओं में हो जाता है इन्फेंक्शन : डाॅ. हुड्डा 
जींद में पशुपालन विभाग के उप-निदेशक डॉ. आरके हुड्डा ने कहा कि पशुओं को तालाबों में गंदा हो चुका पानी नहीं पिलाना चाहिए। इससे पशुओं के शरीर में कई तरह के इन्फेंक्शन हो जाते हैं। गंदा पानी पीने से पशुओं में पेट के कीड़े हो जाते हैं। पेट के कीड़े पशुओं में बीमारी की शुरूआत मानी जाती है। 
बीडीपीओ को दिए तालाबों में साफ पानी भरवाने के आदेश : खौथ
सोमवार को जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश खौथ ने बताया कि विभाग की ओर से सभी बीडीपीओ को मवेशियों के लिए तालाबों में साफ पानी भरवाने के आदेश दे दिए हैं। जिन गांवों के तालाबों में नहरी पानी पहुंच सकता है, उन तालाबों में नहरी पानी भरवाया जाएगा और बाकी में ट्यूबवेल आदि से तालाबों में पानी भरवाया जाएगा।  
हिन्दुस्थान समाचार


 
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