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दुर्लभ संसाधन जैसी ही है निश्चयात्मक बुद्धि

22/10/2019

दुर्लभ संसाधन जैसी ही है निश्चयात्मक बुद्धि

शिवादित्य पुरोहित

किसी गांव में रमेश नामक आदमी बहुत उत्साह के साथ कुआं खोदने के लिए निकलता है ताकि वह पानी का एक बड़ा और अविरत कुआं बना सके । वह एक जगह खुदाई करना शुरू करता है। बीस फीट जमीन खोद देता है पर पानी नहीं मिलता। यह देख एक दूसरा गांव वाला उससे कहता है कि, ‘मै एक और जगह जानता हूं जहां पानी की बहुत संभावना है तुम वहां कोशिश करो। रमेश ठीक वैसा ही करता है। वहां भी बीस फीट खुदाई कर देता है पर सफलता हाथ नहीं लगी। अगली बार गांव के डाकिये के तो उससे अगली बार मुखिया के सुझाव पर वह अलग-अलग स्थानों पर प्रयासरत है। पानी तो नहीं पर रमेश पसीने से जरूर भीग जाता है। यह देख गांव के एक संत उसे सुझाव देतें हैं की अलग- अलग जगहों पर बीस फीट की बजाए एक ही स्थान पर अब तक वह सौ फीट खुदाई करता तो पथरीली जमीन के नीचे से भी पानी निकाल लाता। रमेश बात समझ गया, उसने ऐसा ही किया और सफल हुआ। इस कहानी का सरल सार जो हम समझते हैं, वह यह है कि सफलता के लिए निरंतरता चाहिए। ठीक बात है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि उस निरंतरता का आधार क्या होता है? वह है निश्चयात्मिक बुद्धि यौगिक पथ का एक मूल सूत्र है, ‘जहां चित्त, वहीं प्राण’। अर्थात जहां मन जाता है, आपकी उर्जा फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, उसी तरफ या विषय में बहने लगती है जो आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों निर्धारित करती है।

ये एकदम सरल और सटीक सिद्धांत है। अब आप सोच में पड़ जाएंगे कि मन का बुद्धि के निश्चय से क्या लेना देना? तो इसे यूं समझिये की अनियंत्रित मन बुद्धि हर लेता है वहीं से व्यक्ति का पतन भी शुरू होता है, पर दूसरी ओर स्थिर मानस आपको पथ पर बने रहने की क्षमता देता है और शक्ति प्रदान कर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सक्षम बनता है। इसे सीधे तौर पर समझें तो निश्चयात्मिक बुद्धि होने के लिए भरपूर मानसिक शक्ति और संतुलन होना आवश्यक है। मन की पारे की प्रकृति से भी तुलना की जाती है, यह इतना तरल है, इतना चल्येमान है कि जरा सी गति की भी प्रतिक्रिया करता है। और उसे ठोस बनाना लगभग असम्भव सी बात है। आज कल सभी मन की असीम शक्तियों की चर्चा करते हैं। उसे साधना सिखाते हैं पर एक महत्वपूर्ण अंग पर ध्यान नहीं जाता जो है मन को निश्चय में स्थापित करना। पर वर्त्तमान समय ऐसा है की एकाग्रता और निश्चय दुर्लभ होते दिख रहे हैं चलिए समझते हैं की हमारी आतंरिक ये सम्पदानष्ट हो रही है :

1. उपभोग की अति जो सोशल मीडिया, टीवी औरदुनिया भर के चैनल्स सेपे हो रही है।

2. ऊटपटांग खाने की शैली से जोपेट और मन दोनों विचलित करती हैं।

3. अत्यधिक बोलने तथा तुलनात्मक होड़ में लगे रहना।

4. शराब, सिगरेट एवं नशीली पदार्थों के सेवन से।

5. मन में बैठे संशय और भय। कुसंग से भी आपका निश्चय बिगाड़ेगा। ऐसे व्यक्ति जो आपकी उर्ध्वगति और तरक्की नहीं चाहते और उसके प्रतिरूप चलने को प्रेरित करते हैं, उन्हें आप अपने से कुछ दूर रखें तो ही बेह्तर है। ऐसी बुद्धि के लिए कोई भी कार्य संपूर्ण करना कठिन है। क्योंकि उस स्थिति में आपकी उर्जा सभी स्तरों पर बिखरी हुई प्रतीत होगी। इस लिहाज से अगर आप आंके तो सीमित दिखने वाली मानस शक्ति एवं निश्चयात्मिक बुद्धि दुर्लभ संसाधन हैं। क्योंकि इनके भटकाव की परिस्थितियां बाहर आसानी से उपलब्ध हैं।

तो आइये जानें कुछ उपाय जो बुद्धि के निश्चय को दृढ़ करने हेतु :

1. अपने लक्ष्य के बारे में पूर्ण रूप से स्पष्ट होना पहला कदम है।

2. अच्छे संगती में ज्यादा से ज्यादा समय बिताना।

3. प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास कर अपने को अनंत से जोडेंÞ।

4. दिन भर सचेत न होकर कार्यों को करना तथा अपने को प्रेरित रखना।

5. अच्छे स्वास्थ्य की और जीवन शैली को बढ़ाना। जब बुद्धि का निश्चय सम्पूर्ण और अटल हो जाएंगे, ध्येय स्पष्ट रूप में दिखाई देने लगेगा, तब ये दुर्लभ संसाधन अनंत का रूप धारण कर किसी भी कार्य को संभव बना सकेगा। आप सिर्फ निश्चय तक पहुंच जाइये।


 
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