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अवैध खनन की जांच में अब अखिलेश यादव सीबीआई की रडार पर

12/06/2019

-अवैध खनन से जुड़े मौरंग कारोबारियों के यहां कई घंटे चली सीबीआई की रेड
-लखपति से धनकुबेर बने कई मौरंग कारोबारियों के यहां भी टीम की छापेमारी

-पंकज मिश्रा
हमीरपुर, 12 जून (हि.स.)। लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में सपा के एमएलसी रमेश मिश्रा समेत सीबीआई की जद में आये ग्यारह आरोपितों के यहां बुधवार को सीबीआई की छापेमारी से मौरंग कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। अवैध खनन को लेकर सीबीआई ने हमीरपुर की तत्कालीन जिलाधिकारी बी.चन्द्रकला, संध्या तिवारी व भवनाथ आईएएस के लखनऊ स्थित आवास में भी छापेमारी की है। अखिलेश यादव की सरकार में यहां 10 हजार करोड़ का अवैध खनन होने के इस बड़े मामले के साक्ष्य जुटाने के लिये ही सीबीआई ने बुधवार को एक साथ करीब बाइस ठिकानों पर कार्रवाई की है। 
 
हमीरपुर में बतौर जिलाधिकारी तैनात आईएएस बी.चन्द्रकला के कार्यकाल में धुआंधार मौरंग खनन का खेल यहां सरकार के इशारे पर किया गया था। सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं ने नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित मशीनों से मौरंग खनन किया था। पूरे जिले में बेतवा और अन्य नदियों की जलधारा रोकर अवैध खनन कर माफियाओं ने अटूट सम्पत्ति एकत्र की। इन माफियाओं को अखिलेश यादव की सरकार में खनन मंत्री गायत्री प्रजापति का आशीर्वाद भी मिला था। वर्ष 2008 बैच की आईएएस बी.चन्द्रकला हमीरपुर जिले में 15 अप्रैल 2012 से लेकर 18 जून 2014 तक जिलाधिकारी के पद पर रही हैं। हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अवैध खनन की सीबीआई जांच कराने की मांग करने वाले हमीरपुर के अधिवक्ता विजय द्विवेदी ने बुधवार की शाम बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी बी.चन्द्रकला ने बिना ई-टेडरिंग के ही पहले 49 मौरंग के पट्टे जारी किये थे। इसके बाद 10 और पट्टे नियमों को ताक पर रखकर जारी किये गये थे। 

हमीरपुर के मौदहा क्षेत्र के इमिलिया गांव के मूल निवासी रमेश मिश्रा उन दिनों कबीना मंत्री गायत्री प्रजापति के बेहद करीबी थे। इनका ज्यादातर मौरंग खदानों में कब्जा था। उनके साथ कई पार्टनर भी शामिल थे। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं बसपा नेता संजय दीक्षित की मां माया देवी व उनके चाचा राकेश दीक्षित तथा अम्बरीश दीक्षित के अलावा हमीरपुर लोक निर्माण विभाग के लिपिक रामऔतार का भी मौरंग खदानों में एक छत्र राज था। यहां से रिटायर होने के बाद वह उरई (जालौन) में रहने लगे और वहीं से हमीरपुर जिले में मौरंग के पट्टे चला रहे हैं। इससे पहले भी सीबीआई टीम अवैध खनन को लेकर चार बार छापेमारी कर चुकी है। अखिलेश यादव की सरकार में रहे विधि सलाहकार महोबा निवासी मनोज त्रिवेदी से भी पूर्व में सीबीआई की टीम तीन बार पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा दर्जनों लोगों को भी कैम्प आफिस तलब कर अवैध खनन को लेकर पूछताछ हो चुकी है। 

कई घंटे तक चली सीबीआई की छापेमारी
सीबीआई की कई टीमों ने आज हमीरपुर आकर सबसे पहले एमएलसी रमेश मिश्रा के रानी लक्ष्मीबाई स्थित आफिस पर छापेमारी की इसके बाद मौरंग के बड़े कारोबारी जावेद हबीब के हमीरपुर नगर के आकिल तिराहे के पास आफिस पर छापामारी की गयी लेकिन कोई नहीं  मिला। टीम एमएलसी के पैतृक गांव इमिलिया पहुंची और आवास की घेराबंदी कर छापेमारी शुरू कर दी। घर की महिलाओं से पूछताछ की गयी। अलमारी तोड़ी गयी। सोफे चेक किये गये। पूरे घर को खंगालने के बाद सीबीआई टीम राठ स्थित सिकन्दरपुरा मुहाल पहुंची। टीम ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित के रिश्तेदार राकेश दीक्षित के मकान में कई घंटे तक छापेमारी की। अवैध खनन के साक्ष्य जुटाने के लिये सीबीआई ने घर का कोना-कोना खंगाला। राठ कस्बे के चरखारी रोज पर मदन राजपूत व जुगयाना मुहाल निवासी जगदीश राजपूत के आवासों पर भी छापेमारी की गयी। छापेमारी की भनक लगते ही मौरंग माफिया पहले से खिसक गये थे। 

लोकसभा चुनाव में अखिलेश ने मोदी के खिलाफ किया था गठबंधन
लोकसभा चुनाव से पूर्व भी अवैध खनन को लेकर सीबीआई ने हमीरपुर में कैम्प कर कई दिनों तक जांच की थी। तत्कालीन खनिज अधिकारी, अन्य आरोपितों के अलावा दर्जनों मौरंग कारोबारियों को कैम्प आफिस तलब कर सीबीआई ने अवैध खनन के मामले में पूछताछ की थी। बाद में टीम दिल्ली चली गयी थी। सीबीआई जांच से भड़के अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मायावती से गठबंधन कर एक अभियान चलाया लेकिन गठबंधन की गांठें हवा में उड़ गईं। अब लोकसभा चुनाव निपटते ही अवैध खनन की सीबीआई जांच और छापेमारी फिर शुरू कर दी गयी है। अबकी मर्तबा यह कार्रवाई फाइनल होगी जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकारी और खुद अखिलेश यादव जांच की जद में आ गये हैं। 

एक ही दिन में अखिलेश ने किये थे 13 पट्टे 
याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी अधिवक्ता ने बताया कि अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते एक ही दिन में हमीरपुर में मौैरंग के 13 पट्टे नियमों के विपरीत जारी किये थे। इसके बाद तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रजापति ने भी कई मौरंग कारोबारियों को पट्टे किये थे। सीबीआई टीम  अखिलेश यादव सरकार में रहे विधि सलाहकार मनोज त्रिवेदी से इन पट्टों को लेकर कई बार पूछताछ कर चुकी है। उन्होंने बताया कि सीबीआई टीम अब अवैध खनन की फाइनल जांच कर साक्ष्य जुटा रही है जिससे अखिलेश यादव को इस पूरे खेल में गिरफ्त में लिया जा सके। 

प्रदेश में 50 लाख करोड़ का हुआ खनन घोटाला
उन्होंने बुधवार की शाम बताया कि अखिलेश यादव की सरकार में हमीरपुर, उरई समेत पूरे प्रदेश में 50 लाख करोड़ का खनन घोटाला हुआ है। पूर्व में सीबीआई की जांच में 10 हजार करोड़ का घोटाला सामने आया था लेकिन सिंडीकेट के नेटवर्क के जरिये कई लाख करोड़ का खेल हुआ है। सीबीआई अब अवैध खनन के घोटाले के साक्ष्य जुटाने के लिये फिर से छापेमारी कर रही है। उन्होंने बताया कि हमीरपुर में बी.चन्द्रकला, संध्या तिवारी व भवनाथ जिलाधिकारी के रूप में रह चुके हैं, इसलिए इनके यहां भी लखनऊ में छापेमारी जारी है।

जांच की आंच से दो मौरंग कारोबारियों की हो चुकी है मौत
हाईकोर्ट से अवैध खनन की जांच के आदेश होने के कुछ महीने बाद हमीरपुर में ज्वाला बाबू की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी थी। इनकी पत्नी के नाम मौरंग की खदानें चलती थी। सीबीआई टीम जब शुरू में यहां आयी थी, तब मौरंग के पट्टा धारकों को तलब किया गया था। इसी के कारण ज्वाला बाबू की मौत हो गयी थी। इसके अलावा संजय दीक्षित के यहां मौरंग के सिंडीकेट का काम करने वाला विनीत पालीवाल ने भी सीबीआई की जांच से घबराकर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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