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केदारनाथ पैदल मार्ग पर 20 फीट ऊंचे ग्लेशियर, दो माह में व्यवस्था दुरुस्त करने की चुनौती

17/02/2020

- करीब ढाई दर्जन विद्युत पोल बर्फबारी से ध्वस्त

रोहित डिमरी
रुद्रप्रयाग, 17 फरवरी (हि.स.)। केदारनाथ धाम को जोड़ने वाला गौरीकुण्ड-केदारनाथ पैदल मार्ग बर्फ से ढका हुआ है। पैदल मार्ग पर अभी भी पांच फीट से अधिक तक बर्फ है जबकि ग्लेशियर प्वाइंट पर 20 फीट तक के ग्लेशियर बने हुए हैं। इसके अलावा पैदल मार्ग पर तकरीबन ढाई दर्जन विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। केदारनाथ धाम में तीन माह से विद्युत व्यवस्था ठप है। यात्रा सीजन के दौरान यह ग्लेशियर मुसीबतें पैदा कर सकते हैं। हालांकि प्रशासन की टीम 20 फरवरी से पैदल मार्ग को दुरुस्त करने का काम शुरू करेगी।

नवम्बर, दिसम्बर और जनवरी माह में केदारनाथ धाम में आठ से दस फीट तक बर्फबारी हुई थी। बर्फबारी से सबसे अधिक नुकसान पैदल मार्ग को हुआ है। बर्फबारी के कारण कई स्थानों पर पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। पैदल मार्ग पर पांच से छह स्थानों पर बीस फीट तक के ग्लेशियर बन गए हैं। केदारनाथ धाम में तीन माह से संचार, विद्युत और पेयजल की व्यवस्था ठप है। रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पर स्थित पैदल पुल एक छोर पर टूट चुका है। 

केदारनाथ पैदल मार्ग अभी भी बर्फ से ढका है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे पहले पैदल मार्ग से बर्फ साफ करने की चुनौती होगी। आगामी 21 फरवरी को केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित होगी। इसके बाद यात्रा तैयारियां भी शुरू होंगी। प्रशासन को दो माह के भीतर केदारनाथ धाम में पैदल मार्ग पर आवाजाही, संचार, पेयजल और विद्युत व्यवस्था सुचारू करना चुनौती होगी। 

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि पैदल मार्ग पर पांच फीट से अधिक बर्फ अभी भी है, जबकि ग्लेशियर प्वाइंट पर बीस फीट तक बर्फ जमी हुई है। 20 फरवरी से पैदल मार्ग से बर्फ हटाने का कार्य शुरू होगा और फिर अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में शौचालय, मेडिकल प्वाइंट एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के हट को नुकसान नहीं पहुंचा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पहले पैदल मार्ग सही हो जाए और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही सुचारू हो जाए, जिससे सामग्री सही समय पर केदारनाथ पहुंचे और यात्रा तैयारियां शुरू हो सकें। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में बर्फ कम है। हालांकि अभी भी बर्फ पड़ने की उम्मीद है। पेयजल लाइनें बर्फ से ढकी हुई हैं। ऐसे में पानी के लिए नया स्रोत ढूंढ़ना होगा, जिसमें बर्फ न जमी हो। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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