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कैंसर के लक्षणों के प्रति जागरूकता जरूरी

06/11/2019

(राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस, 7 नवम्बर पर विशेष)

श्वेता गोयल
कैंसर ऐसा शब्द है, जिसे अपने किसी परिजन के लिए डॉक्टर के मुंह से सुनते ही परिवार के तमाम सदस्यों के पैरों तले की जमीन खिसक जाती है। परिजनों को अपने परिवार के उस सदस्य को हमेशा के लिए खो देने का डर सताने लगता है। बढ़ते प्रदूषण तथा पोषक खानपान के अभाव में यह बीमारी एक महामारी के रूप में तेजी से फैल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि हमारे देश में पिछले बीस वर्षों के दौरान कैंसर के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। प्रतिवर्ष कैंसर से पीड़ित लाखों मरीज मौत के मुंह में समा जाते हैं। माना जा रहा है कि वर्ष 2020 तक कैंसर के मरीजों की संख्या एक करोड़ को भी पार कर जाएगी। कुछ वर्ष पहले तक कैंसर को लाइलाज रोग के रूप में जाना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के उपचार की दिशा में क्रांतिकारी खोजें हुई हैं। अब अगर समय रहते कैंसर की पहचान कर ली जाए तो उसका उपचार किया जाना काफी हद तक संभव हो जाता है।
कैंसर के संबंध में यह समझ लेना बेहद जरूरी है कि यह बीमारी किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन अगर इसका सही समय पर पता लगा लिया जाए तो उपचार संभव है। यही वजह है कि देश में कैंसर के मामलों को कम करने के लिए कैंसर तथा उसके कारणों के प्रति लोगों को जागरूक किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि लोग इस बीमारी, इसके लक्षणों और इसके भयावह खतरे के प्रति जागरूक रहें। इसी उद्देश्य से 19 सितम्बर 2014 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 7 नवम्बर को 'राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस' मनाए जाने की घोषणा की गई। तभी से प्रतिवर्ष 7 नवम्बर को 'राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस' मनाया जाता है। 
कैंसर से लड़ने का सबसे बेहतर और मजबूत तरीका यही है कि लोगों में इसके बारे में जागरूकता हो। जिसके चलते जल्द से जल्द इस बीमारी की पहचान हो सके और शुरूआती चरण में ही इस बीमारी का इलाज संभव हो। यदि कैंसर का पता शीघ्र ही लगा लिया जाए तो उसके उपचार पर होने वाला खर्च बहुत कम हो जाता है। लेकिन इसकी पहचान अगर विकसित दशा में होती है तो उपचार की लागत कई गुना बढ़ जाती है और मरीज का इलाज मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों के लंबा जीवन जीने की उम्मीदें भी कम हो जाती हैं। देश में कैंसर के इलाज की तमाम सुविधाओं के बावजूद अगर हम इस बीमारी पर लगाम लगाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं तो इसके पीछे इस बीमारी का इलाज महंगा होना बड़ी समस्या है। देश में जांच सुविधाओं का अभाव भी कैंसर के इलाज में एक बड़ी बाधा है।
आधुनिक जीवनशैली, नियमित व्यायाम न करना, भोजन की शुद्धता पर ध्यान न देना, प्रदूषित वातावरण इत्यादि कई ऐसे अहम कारण हैं, जो शरीर में कैंसर विकसित होने के प्रमुख कारक हो सकते हैं। कैंसर के संबंध में यह जान लेना बेहद जरूरी है कि आखिर यह है क्या? हमारे शरीर की कोशिकाएं जब अनियंत्रित होकर अपने आप तेजी से बढ़ने लगती हैं तो कोशिकाओं के समूह की उस अनियंत्रित वृद्धि को ही कैंसर कहते हैं। जब ये कोशिकाएं टिश्यू को प्रभावित करती हैं तो कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। ऐसी स्थिति में कैंसर काफी घातक हो जाता है। वैसे तो कैंसर के सौ से भी ज्यादा प्रकार हैं। लेकिन ब्रेन कैंसर के अलावा पुरूषों में मुख्यतः मुंह व जबड़ों का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, पित्त की थैली का कैंसर, पेट का कैंसर, लीवर कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर होता है जबकि महिलाओं में होने वाले कैंसर में स्तन तथा ओवेरियन कैंसर प्रमुख हैं। दुनियाभर में कैंसर से लड़ने और इस पर विजय पाने के चिकित्सीय उपाय हो रहे हैं और चिकित्सा के क्षेत्र में शोधकर्ताओं के प्रयासों के चलते कैंसर का प्रारम्भिक स्टेज में इलाज अब संभव है। यही कारण है कि 1990 के बाद से कैंसर से मरने वालों की संख्या में करीब 15 फीसदी की कमी आई है।
इस बीमारी के कुछ ऐसे मुख्य कारक होते हैं, जिनकी वजह से किसी को भी कैंसर का खतरा हो सकता है। वजन बढ़ना या मोटापा, शारीरिक सक्रियता का अभाव, अधिक मात्रा में अल्कोहल तथा नशीले पदार्थों का सेवन करना, तम्बाकू या गुटखा चबाना, पौष्टिक आहार न लेना, नियमित व्यायाम न करना इत्यादि प्रमुख कारण माने जाते हैं। कैंसर एक ऐसी खामोश बीमारी है, जिसके कभी-कभार कोई लक्षण सामने नहीं आते किन्तु कैंसर के अक्सर जो लक्षण सामने आते हैं, उनकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। ऐसे ही लक्षणों में लगातार वजन घटते जाना, शरीर में रक्त की कमी होते जाना, तेज बुखार आना और बुखार का ठीक न होना, निरन्तर थकान व कमजोरी महसूस करना, चक्कर आना, उल्टी होना, भूलना, दौरे पड़ना शुरू होना, आवाज में बदलाव आना, सांस लेने में दिक्कत होना, पेशाब और शौच के समय खून आना, खांसी के दौरान खून आना, लंबे समय तक कफ रहना और कफ के साथ म्यूकस आना, कुछ भी निगलने में दिक्कत होना, गले में किसी भी प्रकार की गांठ होना, शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या सूजन होना, स्तन में गांठ, माहवारी के दौरान अधिक स्राव होना इत्यादि शामिल हैं।
कीमोथैरेपी, रेडिएशन थैरेपी, बायोलॉजिकल थैरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट इत्यादि के जरिये कैंसर का इलाज होता है। यह इलाज प्रायः इतना महंगा होता है कि एक गरीब व्यक्ति इतना खर्च उठाने में सक्षम नहीं होता। इसलिए जरूरत इस बात की है कि ऐसे मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में हो या निजी अस्पतालों में, सरकार ऐसे मरीजों के इलाज में यथासंभव सहयोग करे। दिल्ली स्थित एम्स में कैंसर के इलाज की सारी सुविधाएं हैं हरियाणा में झज्जर के बादली क्षेत्र में बाढ़सा स्थित एम्स में भी कैंसर के इलाज की सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में कैंसर का बढ़िया इलाज किया जाता है किन्तु, देशभर में कैंसर के मरीजों की संख्या जिस गति से बढ़ रही है, उसके दृष्टिगत केवल सरकारी अस्पतालों के भरोसे कैंसर मरीजों के इलाज की कल्पना बेमानी होगी।
(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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