यथावत

Blog single photo

‘चिकित्सा क्षेत्र में होंगे क्रांतिकारी सुधार’

18/09/2019

‘चिकित्सा क्षेत्र में होंगे क्रांतिकारी सुधार’

सौरभ राय

मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया यानी एमसीआई में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का गठन किया जायेगा। विगत दिवस संसद के दोनों सदनों से पास कर इसे एक्ट का रूप दिया गया। इस एक्ट की रूपरेखा तय करने से लेकर अंजाम तक पहुंचाने वाले नीति आयोग के सलाहकार, भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आलोक कुमार से यथावत के उत्तर प्रदेश प्रतिनिधि सौरभ राय की बातचीत के प्रमुख अंश।

 एनएमसी किन मायनों में एमसीआई से भिन्न है?

एनएमसी, एमसीआई यानी मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया से 4 तरीके से भिन्न है। पहले एमसीआई सिंगल विन्डो सिस्टम के तहत काम करती थी। अब इसे 4 भागों में बांटा गया है- 1. बोर्ड आॅफ यूजी एजूकेशन, 2. बोर्ड आॅफ पीजी एजूकेशन, 3.मेडिकल एसेस्मेन्ट एण्ड रेटिंग बोर्ड, 4. एथिक्स एण्ड रजिस्ट्रेशन बोर्ड। इसमें सदस्यों की नियुक्ति सेलेक्शन व सिर्फ इलेक्शन पद्धति पर हो रही है। सभी सदस्यों का चयन पारदर्शी तरीके से होगा। यदि कोई चिकित्सा विश्वविद्यालय मानक का उल्लंघन करेगा तो बोर्ड उसपर कार्यवाही करने में सक्षम होगा।

 एनएमसी बिल लाने के क्या कारण हैं?

एमसीआई एक ऐसी संस्था थी, जिसके खिलाफ लोकतंत्र के चारों स्तम्भों न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और प्रेस ने लिखा। एमसीआई की कार्यप्रणाली पर सबने सवाल उठाया। इस संस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक रूप से उंगली उठती रही। मनचाही पोस्टिंग से लेकर गलत फैसले किए जाते थे। इसलिए इसमें व्यापक बदलाव की आवश्यकता थी। एमसीआई एक्ट 1956 में बना था। इसलिए समाप्त करने के लिए 2019 में नया कानून बनाना पड़ा।

 इस महत्वपूर्ण बिल में चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए क्या उपाय किये गये?

बिल की व्यवस्था के मुताबिक, सारे पदों के विज्ञापन निकाले जाएंगे। कमेटी कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में कार्य करेगी। एनएमसी में नियुक्त होने वाले लोगों का कार्यकाल केवल एक टर्म यानी 4 वर्ष का होगा।

 चिकित्सा संस्थानों में दाखिलों को लेकर उठते सवालों पर एनएमसी कैसे रोक लगायेगा?

पूर्व में एमसीआई के रेग्यूलेशन में खामियां बहुत थीं। योग्य, अयोग्य छात्र/चिकित्सकों की पहचान करना कठिन था। इसमें डिग्री पर कोई रोक नहीं थी। नए बदलाव के तहत नीट (चिकित्सा संस्थानों के स्रातक पाठ्यक्रम में प्रवेश पानी वाले अर्हक परीक्षा) की तरह नेस्ट (नेशनल एक्जिट टेस्ट) को उत्तीर्ण करना होगा। नेस्ट स्रातक अन्तिम वर्ष में उत्तीर्ण करनी होगी। यह लिखित और मौखिक दोनों प्रकार की होगी। विदेशों में भी पहले से ऐसे नियम है। कॉमन रजिस्ट्रेशन से कोई भी चिकित्सक कहीं भी प्रैक्टिस कर सकेगा। इलेक्ट्रानिक रजिस्टर से चिकित्सकों का सत्यापन आसानी से किया जा सकेगा।

 विदेशों से शिक्षा प्राप्त चिकित्सों की पंजीकरण प्रक्रिया में कुछ बदलाव तो नहीं हुआ है?

भारतीय चिकित्सा संस्थान के विद्यार्थियों की तरह विदेशों से चिकित्सा स्रातक छात्रों को भी नेस्ट उत्तीर्ण करनी होगी। अनुत्तीर्ण लोगों के पास एमबीबीएस की डिग्री तो होगी, लेकिन उन्हें मेडिकल प्रेक्टिस का अधिकार नहीं होगा।

 देश में रोगियों की अपेक्षा चिकित्सकों की संख्या काफी कम है? इसके लिए इस बिल में कोई उपाय है?

आपूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता है। बिल के आने से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। इसमें सुदूर गांव की कठिनाइयों को ध्यान में रखकर मिड लेवल प्रोवाइडर नाम का एक नया कॉडर बनाने का प्रावधान किया गया है। इसमें पैरामेडिकल स्टाफ (नर्स, फार्मासिस्ट आदि) को प्रशिक्षित कर टेस्ट लेगें। उत्तीर्ण लोग प्रमाण पत्र लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सों की कमी को पूरा कर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करायेंगे। पूर्व में कुछ चिकित्सकों के विरोध की वजह से यह रुक गया था। उच्चतम न्यायालय ने भी कानूनी आधार पर इसे लागू करने की अनुमति दी। अब कानून बनने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जायेगा। प्रयोग के तौर पर देश के कुछ राज्यों में यह व्यवस्था सफल रही है। −


 
Top