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पौधों और माली ने सिखाया सुखी जीवन का कौशल

28/11/2019

पौधों और माली ने सिखाया सुखी जीवन का कौशल

शिवादित्य पुरोहित

क मनुष्य होने के नाते हमारे सीखने की क्षमता और सामर्थ्य की कोई सीमा नहीं है और ना ही अभी तक इसे कोई तय कर पाया है । फिर सीखना-सिखाना केवल एक कक्षा में ही हो या कोई अन्य अध्यापक हमें सिखाए, ऐसा कतई अनिवार्य नहीं है। अगर हम और आप मस्तिष्क और हृदय से खुले हुए हैं तो जीवन के सब से गहरे पाठ सब से अनपेक्षित, कभी न कल्पना किए स्रोतों से प्राप्त होते हैं। इस ज्ञान से नया दृष्टिकोण उत्पन्न होता है, फिर चाहे वह जीवन के किसी भी आयाम से जुड़ा हुआ क्यों न हो । । अभी दीपावली से कुछ ही दिनों पहले की बात है, घर पर रखे पौधों में से तीन पौधों का स्वास्थ्य खराब हुआ। वह पीले पड़ने लगे, एक-एक कर उनके पत्ते गिर रहे थे और जड़ें कमजोर हो गई थीं। इन्हें घर लाये हुए केवल तीन से चार महीने ही हुए थे। अंतत: तीनों पौधे मुरझा गए । उन पौधों को मैं इसलिए लेकर आया था, क्यों कि वे घर की अंदरूनी वायु को शुद्ध रखने में सहायक होते हैं। मां ने उन गमलों की और इशारा किया, जिनमें अब सिर्फ मिट्टी थी और कहा, ‘‘जाओ इन गमलों में नए पौधे लगवा के ले आओ।’’ पिछले दो हμतों से उन्हीं पौधों को बीमार पड़ते देख मैं उनकी बीमारी के कारण पर चिंतन कर रहा था। क्या पानी सही मात्रा में नहीं दिया? रोशनी पर्याप्त नहीं थीं?

अभी दीपावली से कुछ ही दिनों पहले की बात है, घर पर रखे पौधों में से तीन पौधों का स्वास्थ्य खराब हुआ। वह पीले पड़ने लगे, एक-एक कर उनके पत्ते गिर रहे थे और जड़ें कमजोर हो गई थीं। इन्हें घर लाये हुए केवल तीन से चार महीने ही हुए थे। उन पौधों को मैं इसलिए लेकर आया था, क्यों कि वे घर की अंदरूनी वायु को शुद्ध रखने में सहायक होते हैं।

नर्सरी पहुंच कर जब माली को गमले दिखाए, तो उस धोतीधारी, पतले-दुबले, बुज़ुर्ग और मुँहफट माली ने खड़कती अवाज में कहा ‘रे साब, जाकी तो खुट्टी न टूटी हुई, तुम्हारा पुराना माली पागल था, पौधे खराब कर दिए सारे तुम्हारे!!’’ मैंने पूछा, ‘‘क्या मतलब?’’ उसने गमलों से मिट्टी निकालते हुए गमले के निचले भाग की ओर इशारा किया, ये दो छिद्र या उसके शब्दों में कहूं तो खुट्टी खुले होने चाहिए ताकि पौधों में पड़ रहे पानी और उसकी नमी के लिए बाहर निकलने का मार्ग खुला रहे, आसान शब्दों में ‘सर्कुलेशन’ बना रहे । फिर उसने मुझे गमलों से निकली मिट्टी में जड़ों के अवशेष दिखाए, जो सड़े हुए थे, आम तौर से ऐसा नहीं होता । पौधों के मरने का कारण उनकी जड़ों का खराब होना था, जो गमलों में ‘आउटलेट’ न होने के फलस्वरूप हुआ। यह बात सुन उसी समय मानो मेरे अंदर एक गहन विचार उत्पन्न हुआ, एक गहरी प्रेरणा जो जीवन के अनुभवों से भी मेल खा रही थी। प्रेरणा कह रही थी कि देखो सृष्टि भी तुम्हें इसका प्रमाण दे रही है। अब तो इसे पूर्णत: अपने जीवन में उतार लो!!

मैंने सोचा, ‘‘इन पौधों ने मर कर भी क्या अद्भुत शिक्षा दी है, जो यह माली व्यक्त कर रहा है !’’ शिक्षा यह कि पौधा है आपका जीवन, मिट्टी है आपका मन, पानी और खाद है मन और बुद्धि द्वारा ग्रहण किए जाने वाले अनगिनत अनुभव और संवेदनाएं जो मानव जीवन का आंतरिक हिस्सा हैं । खुट्टियां उस निष्कासन प्रणाली का प्रतीक हैं, जहाँ से अवांछित तत्त्व और अवशेष बाहर निकल जाने चाहिए । इस प्रणाली के ठप होने के कारण पौधे पानी और खाद के आने वाले नए रसद और सामग्री को अपने अंदर समेटने में असफल रहे। इतना ही नहीं, पुराने अवशेषों ने उसे अंदर से दीमक की तरह खोखला करना शुरू कर दिया और अंतत: वे मर गये। जीवन भी कुछ ऐसा ही है। पुराने विचारों और अवधारणा को ऐसे पकड़े रहने से जीवन में नीरसता और विकासहीनता बस जाती है । तो हर दिन हम अपना मौलिक आत्म िचंतन करें कि कहीं हम अपने ही गढ़े पुराने ढांचे में नया जीवन रचने का व्यर्थ प्रयास तो नहीं कर रहे?


 
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