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(आलेख) टाइम पत्रिका में आतिश तासीर का शरारती लेख

15/05/2019

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
पाकिस्तानी पत्रकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना समझ में आती है। उसकी मनोदशा को समझा जा सकता है। कुछ दिन पहले ही आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ गया। विश्व समुदाय में पाकिस्तान के खिलाफ विभाजन हो गया। पाकिस्तान के पत्रकार द्वारा नरेन्द्र मोदी पर तोहमत लगाना स्वाभाविक था। लेकिन अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका में प्रकाशित उसके लेख पर कांग्रेस का खुश होना हैरान करने वाला है।
पाकिस्तानी मूल के आतिश तासीर को भारत से नफरत विरासत में मिली है। यह किसी का आरोप नहीं, बल्कि उसके एक लेख से प्रमाणित हुआ था। 2011 में उसका एक लेख द वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इसमें उसने भारत की बहुत आलोचना की थी। उसने यह बताने का प्रयास किया था कि अब्बा भारत से नफरत क्यों करते थे। यही लेख का शीर्षक था। इसमें भारत को खराब दिखाने का उसे भरपूर मौका मिला। उसने बहुत से मनगढ़ंत आरोप भी लगाए थे। ये बात अलग है कि उसके पिता पाकिस्तान में खुद हिंसा के शिकार हुए थे। अब उसने अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम में नरेन्द्र मोदी पर लेख लिखा है। इसे कवर स्टोरी बनाया गया। इसका शीर्षक ही उसकी शरारत को उजागर करता है। नरेन्द्र मोदी को इंडियाज डिवाइडर इन चीफ बताया गया। इसमें प्रमाणिक तथ्यों का नितांत अभाव है। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सम्मान वापसी अभियान चलाया गया था। इस अभियान के सूत्रधारों का कहना था कि भारत में असहिष्णुता बढ़ गई है। किसी को भारत में खतरा नजर आने लगा, कानून व्यवस्था से जुड़े कुछ मामले सामने आए। नरेन्द्र मोदी ने गाय के नाम पर होने वाली हिंसा को निंदनीय बताया। उन्होंने राज्य सरकारों से कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। कार्रवाई की भी गई। ऊना के बाद गुजरात में कोई ऐसी घटना नहीं हुई। इस दौरान अफजल गैंग भी आ गया। जेएनयू की नारेबाजी भी आपत्तिजनक थी। इसमें कांग्रेस व कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेता भी पहुंच गए थे।
टाइम के लेख में इन्हीं सबको तूल दिया गया। विपक्षी नेताओं की मोदी विरोधी बयानों का तो जैसे अघोषित संग्रह बना दिया गया। इस लेख में उजागर आतिश की नफरत गौरतलब है। वह लिंचिंग और गाय के नाम पर हुई हिंसा की चर्चा करता है। लेकिन इन घटनाओं को रोककर हमारा समाज कैसे सौहार्द के साथ रहता है, उसकी चर्चा नहीं की गई। ठीक भी है। पाकिस्तान के पत्रकार इस भावना को समझ भी नहीं सकते। आतिश तासीर कहता है कि गाय को लेकर मुसलमानों पर बार-बार हमले हुए और उन्हें मारा गया। एक भी ऐसा महीना न गुजरा हो जब लोगों के स्मार्टफोन पर वो तस्वीरें न आई जिसमें गुस्साई हिन्दू भीड़ एक मुस्लिम को पीट न रही हो। कुछ घटनाओं को लेकर ऐसा महौल साजिश के तहत बनाया गया था। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं और प्रगतिशील लेखकों ने इसे तूल दिया था। ये सभी लोग नरेन्द्र मोदी के प्रति नफरत में इतना भरे हैं कि उन्होंने भारत की छवि को खराब करने में भी संकोच नहीं किया। आतिश ने इन्हीं सब बातों का उल्लेख कर दिया। वह यहीं तक नहीं रुका। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में भाजपा का चुनाव जीतना भी उसे नागवार लगा। वह लिखता है कि भगवा पहनने वाले और नफरत फैलाने वाले एक महंत को मुख्यमंत्री बना दिया गया। लेकिन आतिश ने यह नहीं बताया कि योगी आदित्यनाथ के शासन में दंगे नहीं हुए। लेख में सिख दंगों और गुजरात दंगों का भी उल्लेख है। आतिश पत्रकार नहीं बल्कि नेता के अंदाज में दिखाई देता है। वह सिख दंगे के लिए कांग्रेस के लोगों को क्लीन चिट देता है, लेकिन गुजरात दंगे के लिए नरेन्द्र मोदी को गुनहगार बताता है। इसी से उसके उद्देश्य को समझा जा सकता है।
इतना ही नहीं, वह कांग्रेस सरकारों पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं करता, कांग्रेस नेताओं द्वारा मोदी पर अमर्यादित बयान का उल्लेख नहीं करता, लेकिन नरेन्द्र मोदी के कामकाज पर तीखी टिप्पणी करता है। वह कहता है कि नरेन्द्र मोदी ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच भाईचारे की भावना को बढ़ाने के लिए कोई इच्छा नहीं जताई। यह बयान उसकी नरेन्द्र मोदी और भाजपा के प्रति नफरत को रेखांकित करता है। लेख में कहा गया है कि नरेन्द्र मोदी का सत्ता में आना इस बात को दिखाता है कि भारत में जिस कथित उदार संस्कृति की चर्चा की जाती थी, वहां पर दरअसल धार्मिक राष्ट्रवाद, मुसलमानों के खिलाफ भावनाएं और जातिगत कट्टरता पनप रही थी। यह लाइन भारत की छवि खराब करने वाली है। वह जैसी स्थिति दिखा रहा है, वह पाकिस्तान में हो सकती है। ऐसा लगता है कि आतंकवाद पर पाकिस्तान की फजीहत का वह बदला निकाल रहा है।
इसलिए कांग्रेस का इस लेख पर खुश होना आपत्तिजनक है। कांग्रेस इस लेख पर गदगद है। आतिश की मुरीद पूरी हो गई। उसने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले अंग्रेजों को भगाया था और मोदी को हटाएगी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पत्रिका का मुख्य पृष्ठ शेयर किया। कहा कि मोदी जी की परिभाषा 'फूट डालो और राज करो' है। चर्चा तो यह होनी चाहिए कि कांग्रेस द्वारा नरेन्द्र मोदी पर किये गए हमलों को इस लेख में जगह कैसे मिली। लेकिन कांग्रेस ने इस पत्रिका के एक अन्य लेख पर कोई टिप्पणी नहीं की। उसमें नरेन्द्र मोदी की आर्थिक नीतियों की तारीफ की गई है।
पत्रकार इयान ब्रेमर ने लिखा है कि नरेन्द्र मोदी ही वो शख्स हैं जो भारत के लिए डिलीवर कर सकते हैं। भारत ने मोदी के नेतृत्व में चीन, अमेरिका और जापान से अपने रिश्ते सुधारे हैं। उनकी घरेलू नीतियों की वजह से करोड़ों लोगों की जिंदगी में सुधार आया है। जीएसटी लागू करने के लिए मोदी की सराहना की गई। इसने भारत की जटिल टैक्स व्यवस्था को सरल और सहज कर दिया। मोदी ने देश में बुनियादी ढांचे में जमकर निवेश किया है। नई सड़कों का निर्माण, हाइवे, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और एयरपोर्ट ने देश की दीर्घकालीन आर्थिक संभावनाओं में आशा का संचार कर दिया है। इस लेख में तथ्यों के आधार पर नरेन्द्र मोदी के कार्यों की प्रशंसा की गई है। कांग्रेस इस पर मौन है। जिस लेख में मोदी पर राजनीतिक अंदाज में आरोप लगाए गए, उन्हें लेकर कांग्रेस खुश है।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।) 


 
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