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हैदराबाद, 21 सितंबर (हि.स.)। तेलंगाना के वनापर्थी में किसानों के लिए पानी की आपूर्ति की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं और किसानों को पुलिस द्वारा रोकने के बाद सोमवार को जुराला परियोजना पर तनाव बढ़ गया।
मखथल के पूर्व विधायक चित्तम राममोहन रेड्डी को पुलिस ने नंदीमल्ला में रोक लिया। विशाल प्रदर्शन कर रहे किसानों को भी आगे बढ़ने से रोका गया। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों ने खेती में भारी निवेश किया है, लेकिन कांग्रेस सरकार इस नाजुक मोड़ पर पानी नहीं छोड़ रही है। उन्होंने सिंचाई अधिकारियों से अपील की कि कम से कम हर तीन दिन में एक बार पानी छोड़ा जाए ताकि किसान अपनी खड़ी फसलों को बचा सकें और नुकसान से बच सकें।
इधर, बीआरएस नेता जैसे ही जुराला परियोजना की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें कई स्थानों पर रोक लिया। पूर्व मंत्री सिंगीरेड्डी निरंजन रेड्डी और सी. लक्ष्मा रेड्डी, पूर्व विधायक ए. वेंकटेश्वर रेड्डी और अन्य बीआरएस नेताओं को घर में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया।
पुलिस ने वनापर्थी, आत्माकुर, अमरचिंता और नरवा मंडलों से भी बीआरएस नेताओं को विभिन्न स्थानों पर हिरासत में लिया। जुराला परियोजना को पूरी तरह से सील कर दिया गया और बांध पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
गडवाल में, सर्वदलीय गठबंधन समर्थित किसान यूनियनों ने सिंचाई पानी की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के घेराव का आह्वान किया। किसान पिछले तीन दिनों से परियोजना से पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
बीआरएस के कार्यवाहक अध्यक्ष के.टी. रामा राव और वरिष्ठ नेता हरीश राव ने खड़ी फसलों को बचाने के लिए जुराला परियोजना से पानी छोड़ने की मांग करने वाले नेताओं की गिरफ्तारी और नजरबंदी की कड़ी निंदा की। उन्होंने हिरासत में लिए गए बीआरएस नेताओं की तत्काल रिहाई और जुराला आयकट के किसानों के लिए पानी छोड़ने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा और भड़क सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj