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मुंबई, 27 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल चुनाव में डॉक्टरों की भागीदारी कम रही। राज्य भर में कुल 1.23 लाख मतदाताओं में से महज 17,149 डॉक्टरों ने ही अपने मताधिकार का उपयोग किया। कुल मतदान प्रतिशत सिर्फ 13.71 फीसदी पर सिमट कर रह गया। बुधवार को हाफकिन इंस्टीट्यूट में मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।
चिकित्सा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल चुनाव भले ही राज्यभर में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, लेकिन डॉक्टरों की ओर से बेहद ठंडी प्रतिक्रिया ने सभी को चौंका दिया है। मुंबई जैसे बड़े शहरों में मतदान बेहद कम रहा। इसके विपरीत सिंधुदुर्ग जैसे छोटे जिले में सबसे अधिक उत्साह देखने को मिला। राज्य में काउंसिल की नौ सीटों के लिए 60 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रदेश के हर जिले में मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे और पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारियों की निगरानी में संपन्न हुई। मुंबई में जेजे अस्पताल और उपनगर क्षेत्र के वाकोला में मतदान केंद्र बनाए गए थे, जहां सुबह से ही डॉक्टरों ने मतदान किया, लेकिन संख्या सीमित रही।
इस चुनाव में विभिन्न पैनलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पहली बार इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े पैनलों सहित तीन प्रमुख गुट मैदान में हैं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में आंतरिक मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। वोटिंग के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और स्थानीय पुलिस का व्यापक बंदोबस्त तैनात किया गया था।
आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 1233, पुणे में 1798, ठाणे में 1026, नागपुर में 1327, छत्रपति संभाजीनगर में 1033, नासिक में 1268, नांदेड़ में 938, बीड में 368, लातूर में 552, कोल्हापुर में 439, सांगली में 369, बुलढाणा में 230, अमरावती में 464, अकोला में 310, यवतमाल में 212, परभणी में 341, चंद्रपुर में 333, वर्धा में 182, धुले में 262, धाराशिव में 151, जालना में 153, हिंगोली में 135, रत्नागिरी में 141 और सिंध दुर्ग में 96 वोट पड़े हैं। इसी के साथ ही भंडारा, गोंदिया, नंदुरबार, वाशिम, पालघर, सतारा, रायगढ़ और अहमदनगर में एक भी वोट नहीं पड़े।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार