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अहमदाबाद, 24 अप्रैल (हि.स.)। गुजरात में 26 अप्रैल को होने वाली स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया को लेकर शुक्रवार शाम 6 बजे से चुनाव प्रचार पूरी तरह थम गया। इसके साथ मतदान से पहले के 48 घंटे के लिए आचार संहिता का सख्ती से पालन शुरू हो गया है।
राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार अब उम्मीदवार और राजनीतिक दल सार्वजनिक सभाएं, रैलियां और किसी भी प्रकार का प्रचार नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जाती है ताकि मतदाता बिना किसी दबाव और निष्पक्ष माहौल में मतदान कर सकें।
प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी। अहमदाबाद में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जगदीश पंचाल ने रोड शो किया। भाजपा के सांसद मनोज तिवारी और अभिनेता-नेता हितु कनोडिया ने भी प्रचार में भाग लिया। वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए जोरदार अभियान चलाया।
इस बीच चुनाव आयोग द्वारा एजेंट नियुक्ति से जुड़े एक परिपत्र को रद्द किए जाने पर कांग्रेस ने विरोध जताया। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और उपाध्यक्ष डॉ. हेमांग वसावड़ा ने आयोग को पत्र लिखकर इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा नहीं होने पर चुनाव प्रक्रिया अलोकतांत्रिक मानी जाएगी।
वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने राजकोट दौरे के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गुजरात की जनता किसी की “गुलाम” नहीं है और आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी मजबूत विकल्प बनकर उभरेगी।
सूरत के बड़े वराछा क्षेत्र में भी राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जहां आम आदमी पार्टी को झटका लगा। कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।
अब प्रचार बंद होने के बाद राजनीतिक दल पर्दे के पीछे रणनीति बनाने, संपर्क साधने और मतदाताओं को साधने में जुट गए हैं। 26 अप्रैल को होने वाला मतदान राज्य की राजनीति के लिए अहम साबित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे