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हरिद्वार, 03 अक्टूबर (हि.स.)। प्रेस क्लब सभागार में उत्तराखंड विधि कांग्रेस के अधिवक्ता सम्मेलन में वकीलों ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के समक्ष पांच सूत्रीय मांगें रखीं।
प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट उमेश जोशी और जिलाध्यक्ष एडवोकेट राकेश राजपूत ने कहा कि शासन-प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। प्रमुख मांगों में अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करना, नए अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक 5 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड, 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज और बीमा की सुविधा शामिल हैं। वक्ताओं ने कहा कि महंगाई में नए अधिवक्ताओं के सामने आर्थिक संकट है, शुरुआती वर्षों में आय नहीं होती, स्टाइपेंड से राहत मिलेगी। वहीं इलाज का खर्च भी बड़ी चुनौती है।
मुख्य अतिथि हरक सिंह रावत ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनी तो अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां अधिवक्ताओं के हित में काम हुआ है। उन्होंने उत्तराखंड आंदोलन में अधिवक्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
रावत ने भाजपा सरकार पर अधिवक्ता, किसान, शिक्षक, मजदूर, छात्र और व्यापारियों की उपेक्षा का आरोप लगाया।
अंकिता भंडारी प्रकरण, मंदिरों के चंदे और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनाव के लिए एकजुट होने की अपील की।
सम्मेलन में महामंत्री विवेक जकारिया, हेमंत राय, गुरमीत सिंह, प्रदीप जगता, कविता वैभव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा, महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग, पूर्व राज्यमंत्री डॉ. संजय पालीवाल सहित अन्य मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला