(वेब शो समीक्षा: 'सास बहू और भूत') अनोखी तिकड़ी ने बढ़ाया मनोरंजन
कलाकार: परन गाला, प्राची घिल्डियाल, मो. मुदस्सिर, साहिल त्यागी, पंकज उपाध्याय, महेंद्र कुमार, मेलानी पेस, रवींद्र कुमार निर्देशक: संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती निर्माता: दुर्गाराम चौधरी, राजेश रणशिंगे रेटिंग: ★★★½ (3.5/5) मुंबई, 02 अक्टूबर (हि.स.)। स
सास बहू और भूत - फोटो सोर्स एक्स


कलाकार: परन गाला, प्राची घिल्डियाल, मो. मुदस्सिर, साहिल त्यागी, पंकज उपाध्याय, महेंद्र कुमार, मेलानी पेस, रवींद्र कुमार

निर्देशक: संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती

निर्माता: दुर्गाराम चौधरी, राजेश रणशिंगे

रेटिंग: ★★★½ (3.5/5)

मुंबई, 02 अक्टूबर (हि.स.)। सास-बहू की नोकझोंक भारतीय टेलीविजन का जाना-पहचाना फॉर्मूला है और भूत वाली कहानियां भी दर्शकों के लिए नई नहीं हैं। लेकिन ‘सास बहू और भूत’ इन दोनों को एक साथ जोड़कर एक अलग तरह का मनोरंजन पेश करता है। यहां भूत लोगों को डराने के बजाय खुद सास-बहू की नोकझोंक से परेशान होता नजर आता है। यही अनोखा विचार इस शो की सबसे बड़ी ताकत है।

कहानी

कहानी की शुरुआत 1976 के एक सुनसान बंगले ‘दीमक धाम’ से होती है। बंगले के एक कमरे में कांच की बोतल में एक भूत 40 साल से कैद है। आजादी की उम्मीद में वह वादा करता है कि जो भी उसे बोतल से बाहर निकालेगा, वह सात साल तक उसकी गुलामी करेगा। कहानी में मोड़ तब आता है जब एक परिवार इस पुराने घर में रहने पहुंचता है। परिवार में सास, बहू, ससुर और बेटा हैं। सास जहां पारंपरिक सोच वाली है, वहीं बहू बेबाक और हाजिर जवाब है। दोनों के बीच की लगातार नोकझोंक कहानी में हास्य का आधार बनती है। घर की सफाई और कमरों की पड़ताल के दौरान सास-बहू की नजर एक बंद कमरे पर पड़ती है। मना किए जाने के बावजूद दोनों कमरे को खोल लेती हैं और वहां रखी लाल रंग की बोतल तक पहुंच जाती हैं। बोतल को लेकर दोनों के बीच छीना-झपटी होती है और वह टूट जाती है। इसके साथ ही भूत आजाद हो जाता है। अब भूत को अपना वादा निभाते हुए सात साल तक इस परिवार की गुलामी करनी है। लेकिन जिस परिवार में सास और बहू ही हर समय एक-दूसरे से उलझती रहती हों, वहां भूत की जिंदगी कैसी होगी, यही शो का मजेदार हिस्सा है। घर के दूसरे सदस्य और उनकी अजीबोगरीब परिस्थितियां कॉमेडी को आगे बढ़ाती हैं।

अभिनय

परन गाला और प्राची घिल्डियाल की सास-बहू की केमिस्ट्री शो की प्रमुख खूबियों में है। दोनों की नोकझोंक और संवाद कहानी को आगे बढ़ाने के साथ हास्य भी पैदा करते हैं। पंकज उपाध्याय ने भूत के किरदार में डर से ज्यादा कॉमेडी पर जोर दिया है। उनका किरदार लोगों को डराने के बजाय खुद परेशान होता दिखाई देता है और यही उलटबांसी शो को मजेदार बनाती है। मो. मुदस्सिर और साहिल त्यागी परिवार के अन्य सदस्यों के रूप में कहानी को सहारा देते हैं। मेलानी पेस इंस्पेक्टर सौदामिनी की भूमिका में कहानी को एक अलग दिशा देती हैं, जबकि रवींद्र कुमार तांत्रिक के किरदार में हॉरर वाले हिस्से को आगे बढ़ाते हैं। महेंद्र कुमार और बाकी कलाकार भी अपने-अपने किरदारों से कॉमिक माहौल बनाए रखते हैं।

निर्देशन

संकेत श्रीरंग चक्रवर्ती ने शो के अनोखे विचार को परिस्थितिजन्य कॉमेडी के साथ आगे बढ़ाया है। निर्देशक ने इसे सिर्फ डराने वाली हॉरर कहानी बनाने के बजाय सास-बहू और भूत के बीच पैदा होने वाली परिस्थितियों पर अधिक ध्यान दिया है। शो की खासियत यही है कि हॉरर के पारंपरिक फॉर्मूले को उलट दिया गया है। यहां भूत खुद सास-बहू की नोकझोंक में फंस जाता है और उसकी मजबूरी ही हास्य का कारण बनती है। हालांकि कुछ जगहों पर कॉमेडी और घटनाक्रम को और कसाव मिल सकता था, लेकिन मूल विचार अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहता है।

अंतिम फैसला

'सास बहू और भूत' का सबसे मजबूत पक्ष इसका अनोखा संयोजन है। सास-बहू की नोकझोंक, भूत की मजबूरी, परिवार के सदस्यों की प्रतिक्रियाएं और अजीबोगरीब परिस्थितियां मिलकर शो को हल्का-फुल्का मनोरंजन बनाती हैं। शो में हॉरर से ज्यादा कॉमेडी है और इसका उद्देश्य दर्शकों को डराने के बजाय हंसाना है। सास-बहू का परिचित फॉर्मूला और भूत की कहानी अलग-अलग भले ही नई न हो, लेकिन दोनों को एक साथ रखकर बनाया गया यह संयोजन इसे कुछ अलग जरूर बनाता है।

कुल मिलाकर, 'सास बहू और भूत' गंभीर हॉरर के बजाय हल्की-फुल्की कॉमेडी और पारिवारिक मनोरंजन पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक अलग तरह का अनुभव है।

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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे