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चेन्नई, 10 अक्टूबर (हि.स.)। हार्बर समुद्र तट पर आज महालय अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और अपने पूर्वजों को याद करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की। समुद्र तट पर तिल और जल अर्पित कर तर्पण कर पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी गई। तमिल आध्यात्मिक परंपरा में पुरट्टासी महीने में पड़ने वाली महालय अमावस्या को पूर्वजों की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
मान्यता है कि जो लोग प्रत्येक महीने अमावस्या के दिन तर्पण नहीं कर पाते, उनके लिए इस दिन पूर्वजों की पूजा करना विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा, गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्नदान तथा वस्त्रदान करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है। पूर्वजों के आशीर्वाद से परिवार में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बढ़ने की मान्यता के साथ लोगों ने पूजा-अर्चना की।
इसके अलाव राज्य के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर अपने पूर्वजों को तर्पण दिया। महालय अमावस्या के मौके पर रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने समुद्र में पवित्र स्नान किया और भगवान के दर्शन किए। रामेश्वरम के अग्नि तीर्थ समुद्र तट पर पूर्वजों को तर्पण देने के लिए हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए। थेनी जिले के पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध सुरुली जलप्रपात में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और अपने पूर्वजों के लिए तर्पण कर पूजा-अर्चना की।
वीरपांडी में मुल्लापेरियार नदी के किनारे स्थित पवित्र जल क्षेत्रों में हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। उन्होंने पवित्र स्नान करने के बाद अपने पूर्वजों को तर्पण दिया। इस दौरान अपने पूर्वजों को तिल से बने पिंड अर्पित कर तर्पण किया गया। ‘महालय अमावस्या’ को ‘पितृ अमावस्या’, ‘सर्व पितृ अमावस्या’ और ‘पितृ मोक्ष अमावस्या’ आदि नामों से जाना जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV