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वॉशिंगटन, 05 अप्रैल (हि.स.)। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख जोसेफ वू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता के लिए वाशिंगटन पहुंचे हैं। मीडिय रिपोर्ट के मुताबिक वू “स्पेशल चैनल” के तहत एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जो ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद इस चैनल का पहला उपयोग है। यह चैनल गोपनीय और अनौपचारिक वार्ताओं के लिए जाना जाता है।
जोसेफ वू का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब चीन ने हाल ही में ताइवान के पास दो दिवसीय सैन्य अभ्यास किया, जिसे अमेरिका और ताइवान दोनों ने क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है। वहीं, चीन ने ताइवान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते को परजीवी कहकर संबोधित किया, जिसे ताइवान ने आपत्तिजनक और उकसावे वाला बताया है।
दूसरी ओर, अमेरिका ताइवान को औपचारिक रूप से स्वतंत्र देश नहीं मानता, लेकिन वह उसका प्रमुख सैन्य और कूटनीतिक समर्थक बना हुआ है। ताइवान का कहना है कि उसकी भविष्य की दिशा केवल उसके नागरिक तय करेंगे।
इस राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने ताइवान से आने वाले आयात पर 32 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह चीन पर लगे 36 प्रतिशत टैरिफ से थोड़ा कम है, लेकिन ताइवान ने इस कदम को अनुचित बताया है। हालांकि, ताइवान ने बदले में कोई जवाबी टैरिफ नहीं लगाया और कूटनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया है। अमेरिका के इस टैरिफ का सबसे बड़ा असर ताइवान के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टील उद्योग पर पड़ा है। इसके मद्देनज़र सरकार ने 88 अरब ताइवान डॉलर (2.67 अरब अमेरिकी डॉलर) के राहत पैकेज की घोषणा की है और 200 अरब ताइवान डॉलर के सस्ते कर्ज की योजना भी पेश की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय