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जयपुर, 5 अप्रैल (हि.स.)। सीबीआई मामलों की विशेष अदालत ने द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 के पेपर लीक मामले में आरपीएससी के सदस्य रहे बाबूलाल कटारा और एक अन्य आरोपित गोपाल सहारण की ओर से दायर जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया है। पीठासीन अधिकारी सुनिल रणवाह ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं के पेपर लीक होने से समाज पर गहरा प्रभाव पडता है। ऐसे में आरोपितों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
जमानत अर्जी में आरोपित बाबूलाल कटारा ने कहा कि उसे मात्र शंका के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया है। प्रश्न पत्र से संबंधित कोई भी सामग्री उससे बरामद नहीं हुई है। इसके अलावा जिस बस में अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र पढवाया जा रहा था, वह वहां भी मौजूद नहीं था। इसके साथ ही अभियोजन पक्ष के पास उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य भी नहीं है। वह 65 साल का वृद्ध है और करीब दो साल से जेल में बंद है। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा किया जाए। वहीं गोपाल सहारण की ओर से कहा गया कि उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। उसे सिर्फ मुख्य आरोपित भूपेन्द्र सहारण का भाई होने के कारण मामले में शामिल किया जा रहा है। कटारा की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक भंवर सिंह चौहान ने कहा कि आरोपी पेपर लीक करने का मुख्य भागीदार है। आरपीएससी सदस्य होने के कारण उसे प्रश्न पत्र बनाने का दायित्व सौंपा गया था। उसके तैयार प्रश्न पत्र को अपने घर लाकर अपने भांजे से रजिस्टर में उतरवाया। इसके बाद ही प्रश्न पत्र आगे वितरित किए गए। इसके अलावा गोपाल सहारण ने भूपेन्द्र सहारण से प्रश्न पत्र लेकर उसे पेपर हल करवाया। ऐसे में दोनों आरोपितों को जमानत नहीं दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों आरोपितों के जमानत प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक