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अशोकनगर, 05 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश का अशोकनगर जिला अपनी कई खूबियों को लेकर प्रसिद्ध है। मालवा और बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार पर बसे इस जिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन को लेकर तैयारियां हैं, एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारियों का जायजा लेने यहां आ चुके हैं।
अपनी कई खूबियों, धार्मिक, पर्यटन, ऐतिहासिकता को बटोरने के बावजूद ये जिलारोजगार, उद्योग, आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़े जिले के रूप में शुमार है। आगामी 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी के जिले के ईसागढ़ कस्बा अंतर्गत श्री परमहंस अद्वैत मत श्री आनंदपुर धाम आगमन को लेकर आमजन में उत्सुकताएं हैं। वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी का श्री आनंदपुर आगमन, दिल्ली की नवगठित सरकार को बनने को लेकर कारण सामने आ रहे हैं, पर मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जो यहां आकर इतिहास लिख रहे हैं।
उनके आगमन को लेकर जहां श्री आनंदपुर पहुंचने पर उनकी इस यात्रा को धार्मिक यात्रा के रूप में देखा जा रहा है, पर प्रधानमंत्री का जिस जिले में आगमन हो वहां उनके द्वारा कोई बड़ी विकासात्मक सौगात की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता। यहां आवागमन के क्षेत्र में देखें तो अशोकनगर देश की मुख्यधारा दिल्ली, मुंबई बड़े महानगरों से सडक़ और रेल लाइन से कटा हुआ है। इस लिहाज से यहां न कोई उद्योग और न कोई रोजगार के साधन, युवा पलायन करने मजबूर है।
इसी प्रकार न कोई शिक्षा के क्षेत्र में नए कॉलेज और न स्वास्थ के क्षेत्र में कोई बड़े मेडिकल संस्थान अब तक स्थापित हो सके। अति पिछड़े क्षेत्र के रूप में बसे मालवा और बुंदेलखंड के इस प्रवेश द्वार अशोकनगर से सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्धजन यहां आवागमन के रूप में सडक़ और रेल लाइन को मुख्यधारा महानगरों से जोडऩे के लिए समय-समय पर मांग उठाते रहे हैं।
यहां गुना-बीना रेल लाइन जो डबल लाइन के रूप में विकसित हो चुकी है, पर दिल्ली, मुंबई, दक्षिण के लिए कोई सीधी रेल सेवा शुरू नहीं है। यहां ये भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जिस श्री आनंदपुर धाम आ रहे हैं, वहां बैसाखी पर आयोजित होने वाले मेले में आनंदपुर के अनुयायियों के लिए रेलवे तात्कालिक रूप से दिल्ली से अशोकनगर विशेष ट्रेन चलाता है, पर स्थाई रूप से दिल्ली, मुंबई के लिए कोई ट्रेन नहीं।
अशोकनगर को सडक़ मार्ग के रूप में एनएच-3, एनएच-44 से जोड़ा जाए। रोजगार के क्षेत्र में युवाओं का पलायन रोकने बड़े उद्योग स्थापित हों, शिक्षा के क्षेत्र में इंजीयरिंग जैसे कॉलेज, बढ़े मेडिकल संस्थान स्थापित हों। पर्यटन और धार्मिक क्षेत्रों को विधिवत दर्ज प्राप्त हो। इस तरह की मांगे अब तक इस क्षेत्र से उठती रहीं हैं। कुल मिलाकर मालवा और बुंदेलखंड के इस प्रवेश द्वार पर प्रधानमंत्री के आगमन से लोग बढ़ी अपेक्षाएं संजोए हुए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार