(अपडेट) जो कहते थे कि हिंदू समाज में भेदभाव है, महाकुम्भ देख उनकी आंखें खुल गई: योगी आदित्यनाथ
—मुख्यमंत्री ने कश्मीरीगंज प्राचीन राम मंदिर के पुनर्निर्माण का किया शिलापूजन —प्राचीन मंदिर में गायों को खिलाया गुड़ वाराणसी,03 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरूवार को कहा कि जो लोग कहते थे कि हिंदू समाज में भेदभाव
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—मुख्यमंत्री ने कश्मीरीगंज प्राचीन राम मंदिर के पुनर्निर्माण का किया शिलापूजन

—प्राचीन मंदिर में गायों को खिलाया गुड़

वाराणसी,03 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरूवार को कहा कि जो लोग कहते थे कि हिंदू समाज में भेदभाव है, उनकी आंखें महाकुंभ में खुली रह गई। मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी में सभी ने भव्य-दिव्य महाकुंभ प्रयागराज को देखा है। 45 दिन के आयोजन में एक स्थान पर 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सहभागी बने। यह देख दुनिया अभिभूत थी। उसके सामने अकल्पनीय, अविस्मरणीय दृश्य था। एक ही संगम में सब स्नान कर रहे हैं। वहां जाति, मत, संप्रदाय का कोई भेद नहीं है। यही तो सनातन धर्म की सही पहचान है। मुख्यमंत्री कश्मीरीगंज स्थित प्राचीन राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए आधारशिला रख कार्यक्रम में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस प्राचीन राम मंदिर का इतिहास बहुत गौरवशाली है। यहां का इतिहास सात सौ वर्षों का है। इस मंदिर में रहकर ही स्वामी अनंताचार्य, नरहरिदास, गोस्वामी तुलसीदास ने अध्ययन किया था। मुख्यमंत्री याेगी ने कहा कि सवा सात सौ वर्षों के आध्यात्मिक परम्परा के नवीनीकरण के लिए आयोजित शिलान्यास में आना सौभाग्य की बात है। स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती महाराज ने अपने गुरु विरासत को नया स्वरूप भव्य राम मंदिर बनाने का संकल्प लिया है। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि एक समृद्ध विरासत को अपनी आंखों से देखा है। पूज्य संतों की लंबी विरासत ने जिस संकल्प के साथ पूरा जीवन जिया था, सभी ने 22 जनवरी 2024 को अयोध्या धाम में उसे मूर्त रूप लेते हुए देखा, जब काशी के सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से 500 वर्ष बाद श्रीरामजन्मभूमि के भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हुए। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर निर्माण और श्रीरामजन्म भूमि आंदोलन में आरएसएस के नेतृत्व में संतों और विहिप नेता स्मृतिशेष अशोक सिंघल और कार्यकर्ताओं के संघर्ष का भी मुख्यमंत्री ने विस्तार से जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय लोग कहते थे कि यह काम असंभव है, तब आंदोलन के केंद्र बिंदु रहे अशोक सिंहल जी कहते थे कि कोई कार्य असंभव नहीं है। पूज्य संत भी कहते थे कि यह हमारे जीवन का संकल्प है और हम लोग सफल होंगे। इस अभियान से मेरे पूज्य गुरुदेव, दादा गुरु, परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज, पूज्य नृत्य गोपाल दास जी महाराज, सतुआ बाबा आदि संत भी जुड़े थे। जब मैं इन संतों से पूछता था कि महाराज क्या होगा, तो वे कहते थे कि सफलता मिलेगी। मैं कहता था कि आपकी आयु ढल रही है, कैसे सफलता मिलेगी। तो वे कहते थे कि फिर जन्म लेंगे, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर बनाकर रहेंगे।

मुख्यंमत्री ने जगदगुरु रामानंदाचार्य काशी पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती महाराज के प्रयासों की जमकर सराहना की। और कहा कि सवा सात सौ वर्षों के आध्यात्मिक परम्परा के नवीनीकरण के लिए आयोजित शिलान्यास में आना सौभाग्य की बात है। यह विरासत के संरक्षण का अभिनव प्रयास है, जो हर सनातन धर्मावलंबियों के लिए नई प्रेरणा, प्रकाश व मार्ग है। रामनवमी पर संकल्प होना चाहिए कि भगवान राम का यह प्राचीन मंदिर दिव्य-भव्य रूप में फिर से जगमगाकर प्राचीन गौरव की परंपरा के साथ आगे बढ़ता रहे, क्योंकि इन परंपराओं ने भारत की विरासत को बहुत कुछ दिया है। जिस पवित्र परंपरा में हर कोई विकसित हुआ, उस परंपरा का संरक्षण, समर्थन, सहयोग प्रदान करना हमारा नैतिक दायित्व व कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने मंदिर में दर्शन पूजन के बाद गोशाला में गायों को गुड़ भी खिलाया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, विहिप के महामंत्री अशोक तिवारी, संतोष दास सतुआ बाबा आदि संतों के अलावा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र, पूर्व मंत्री व शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, एमएलसी चंचल सिंह आदि भी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी