वक्फ संशोधन बिल पर बोले सुधांशु त्रिवेदी- यह शराफत अली और शरारती खान के बीच की लड़ाई है
नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमने इमानदारी से मुस्लिम समाज के कल्याण की बात की है। एक तरफ खड़ा है ईमानदार मुसलमान, जो शराफत के साथ ईमान को गले लगाए
राज्यसभा में बोलते हुए सुधांशु त्रिवेदी


नई दिल्ली, 03 अप्रैल (हि.स.)। राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमने इमानदारी से मुस्लिम समाज के कल्याण की बात की है। एक तरफ खड़ा है ईमानदार मुसलमान, जो शराफत के साथ ईमान को गले लगाए हुए है। ये मुकाबला शराफत अली और शरारत खान के बीच है। हमारी सरकार शराफत अली के साथ खड़ी है। हम गरीब मुस्लिम के साथ खड़े हैं। यह सिर्फ अमीरी और गरीबी के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि वंचितों के सच्चे दर्द और कट्टरपंथी वोट के दलालों के अहंकार के बीच की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा ने पहले ही कहा है कि हमारी वक्फ समिति ने इस विधेयक के लिए बहुत विस्तृत तरीके से काम किया है। इंडोनेशिया, तुर्की, इराक और सीरिया जैसे कई इस्लामिक देशों में वक्फ नहीं है, तो भारत में क्यों है? अगर हम भारत की बात करें तो क्या सिखों, पारसियों और ईसाइयों के पास ऐसी शक्तियां हैं?

सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, इन जरूरतमंद मुस्लिमों की लड़ाई के लिए गरीबों के मन की कसक और कट्टरपंथी की ठसक के बीच हमारी सरकार ने गरीबों का साथ दिया है। ईमानदार मुस्लिम के लिए ये उम्मीद है लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो उम्मा का ख्वाब पाले हुए थे, उनके ख्वाब पर पानी फिर गया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सिर्फ जूना अखाड़ा ने पिछले साल 71 एससी-एसटी को महामंडलेश्वर बनाया। उन्होंने विपक्ष से सवाल पूछा- मुल्ला, मौलवी, मुफ्ती, हाफिज में से कितने पसमंदा हैं। वक्फ बोर्ड में भी पसमंदा मुस्लिम नहीं हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर इतना ही भाईचारा है तो फिर सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड अलग क्यों है। जमीन पर इनको एक-दूसरे पर एतबार नहीं है, सिर्फ सियासत के लिए साथ आने की बात है। मुस्लिम वर्ग के कई लोग इस चीज से प्रताड़ित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी