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- पुरातन काल में जब भारतीय शिक्षा समाज द्वारा पोषित रही, तब भारतवर्ष विश्व गुरु रहा : डाॅ.बाल मुकुन्द
देवरिया, 03 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय शिक्षा समाज द्वारा जब तक पोषित रही तब तक भारत विश्व गुरु रहा। जब से शिक्षा सरकार देने लगी, तब से उसका असर वह नहीं दिख रहा है, जो पुरातन काल में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में देखने को मिलता था। उक्त बातें अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संगठन मंत्री डॉ. बाल मुकुन्द ने रूद्रपुर में शिवम सेवा संस्थान द्वारा संचालित राजाराम शिक्षा निकेतन और गिरिजा देबी रामेश्वर प्रसाद पूर्व माध्यमिक विद्यालय के वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि कही।
उन्होंने आओ कहा कि लेकिन फिर भी वर्तमान सरकार शिक्षा को लेकर फिक्रमंद है। आज देश में शिक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा के लिए विशेष तौर पर काम कर रही है। पुरातन काल में भारतीय शिक्षा समाज द्वारा पोषित रही है, तब भारत वर्ष विश्व गुरु रहा है। शिक्षा समाज के लिए अति आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पहले गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र सर्वगुण सम्पन्न तैयार होते थे। जिनमें जिस प्रकार की प्रतिभा छिपी रहती थी, गुरुजन उन्हें अनुकूल माहौल प्रदान कर निखार कर समाज हेतु उपयोगी बनाते रहे। उन्होंने कहा की भारतीय शिक्षा नीति के संदर्भ में देश भर से 99 लाख लोगों ने अपने मत व सुझाव दिए थे। जिसके आधार पर भारतीय शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार कर लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं ज्ञान अर्जित कर, उसे विद्यार्थियों में बांटेगा तभी समाज बेहतर होगा।
बरहज की नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने कहा कि बिना शिक्षा मनुष्य, सामाजिक प्राणी नहीं बन सकता। आज यही कारण है कि प्रदेश की योगी सरकार ने अपने बजट में कई धनराशि आवंटित की है। आज अभिभावक भी अपने बच्चों के बेहतर शिक्षा की चिंता कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक