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कानपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। स्कूलों में नया सत्र शुरू होते ही मनमानी फीस, यूनिफार्म और स्टेशनरी को लेकर होने वाली कमीशनखोरी के मामले में अभिवावक शिकायत करते हैं। तो उसका निस्तारण स्कूल प्रबंधन पंद्रह दिनों में करें। नियमों का उल्लंघन करने पर हो सकती है पांच लाख रुपये तक दंडात्मक कार्रवाई। यह निर्देश गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कही।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्कूलों की मनमानी के खिलाफ का रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से साल 2018 में लागू किये गए शुल्क निर्धारण अध्यादेश के तहत स्कूल प्रबंधन की ओर से की जाने वाली मनमानी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिसमेंअधिनियम के अनुसार समस्त विद्यालय में फीस लेने की प्रक्रिया खुली एवं पारदर्शी होगी। प्रवेश शुल्क विद्यालय में प्रथम बार नये प्रवेश के समय ही लिया जायेगा। परीक्षा शुल्क केवल परीक्षाओं के लिए ही लिया जायेगा। विद्यालय द्वारा किसी छात्र/छात्रा को स्टेशनरी, यूनिफॉर्म आदि किसी विशेष दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य न किया जाये। विद्यालय द्वारा निर्धारित यूनिफार्म को पाँच वर्ष के अन्तर्गत परिवर्तन नहीं किया जायेगा।
स्कूल प्रबंधन की ओर से पहले गलती पाए जाने पर स्कूल को एक्सेस शुल्क वापस करना होगा। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। पूर्णवृत्ति होने पर पांच लाख रुपये दंड और तीसरी बार उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने की संस्तुति की जाएगी।
जिलाधिकारी द्वारा जनपदीय शुल्क नियामन समिति का भी गठन किया गया है। जिसमें डीआईओस, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षक व अभिवावक सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
यह अधिनियम उप्र बेसिक शिक्षा परिषद, उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई, आईसीएसई, आईबी और आईजीसीएसई बोर्ड से समस्त स्व वित्तपोषित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट कॉलेजों पर लागू होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप